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Updated: 09 मई, 2022 08:07 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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नवनीत राणा (Navneet Rana) के अस्पताल से बाहर निकलने के बाद उनके समर्थकों ने जोरदार स्वागत किया. महिलाओं ने नवनीत राणा को तिलक भी लगाया और आरती भी उतारी. हालांकि, सोशल मीडिया पर स्वागत के वीडियो देख कर लोग ये भी पूछ रहे हैं कि वो बॉर्डर से लौटी हैं क्या?

नवनीत राणा को जेल से रिहा होने के बाद मेडिकल चेक अप के लिए अस्पताल ले जाया गया था. तबीयत ठीक न होने के कारण नवनीत राणा तीन दिन तक लीलावती अस्पताल में भर्ती रहीं. जेल से छूटने के बाद नवनीत के पति रवि राणा भी सीधे अस्पताल पहुंचे तो वो रो पड़ी थीं. अस्पताल में नवनीत राणा को देखने महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस भी पहुंचे थे.

नवनीत राणा को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के घर मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा पढ़ने की घोषणा के बाद शिवसैनिकों ने खूब हंगामा किया था. शिवसैनिक तो नवनीत राणा के घर के बाहर डटे ही रहे, बाद में मुंबई पुलिस थाने उठा ले गयी और फिर आईपीसी की धारा 124A के तहत राजद्रोह का केस दर्ज कर जेल भेज दिया था.

जेल से छूटने के बाद तो नवनीत राणा और उनके पति रवि राणा ज्यादा ही आक्रामक लग रहे हैं. हाई कोर्ट ने राणा दंपत्ति की सशर्त जमानत मंजूर की थी, लेकिन बाहर आने के बाद दोनों के पहले से भी ज्यादा उग्र लग रहे हैं.

महाराष्ट्र की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले निगम चुनावों को लेकर नवनीत राणा कह रही हैं कि वो शिवसेना के खिलाफ प्रचार करेंगी - और ऐन उसी वक्त मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ भी चुनाव लड़ने की चुनौती पेश कर रही हैं - ऐसा तो नहीं कि सबक सिखाने का शिवसेना नेतृत्व का दांव उलटा पड़ चुका है?

राणा दंपत्ति के ताजा तेवर के मायने

नवनीत राणा केस को लेकर पब्लिक में मैसेज तो यही गया है कि राणा दंपत्ति के साथ ज्यादती हुई है. ये भी हर किसी को साफ तौर पर समझ में आया कि नवनीत राणा ने मातोश्री के सामने हनुमान चालीसा के पाठ की घोषणा कर कोई कानून नहीं तोड़ा था.

navneet rana, ravi rana, uddhav thackerayजेल से छूटने के बाद राणा दंपत्ति तो कापी उग्र हो चुके हैं - उद्धव ठाकरे का अगाल कदम क्या हो सकता है?

बेशक नवनीत राणा का ये कदम राजनीतिक वजहों से आगे बढ़ा, लेकिन ये भी तो विरोध जताने का एक तरीका है - और विरोध जताने की छूट तो संविधान से मिली हुई है. ये बात अलग है कि मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को ये बेहद नागवार गुजरा. शायद वो बीजेपी की तरफ से इसे एक तरीके के शक्ति प्रदर्शन की तरह ले लिये.

बगैर नाम लिये ही सही, उद्धव ठाकरे ने कहा भी था कि अगर आपके घर पर हनुमान चालीसा पढ़ने की आदत नहीं है और आप हमारे घर में पढ़ना चाहते हैं तो जरूर आइए, लेकिन उसका एक तरीका होता है. उद्धव ठाकरे ने अपने पिता बाल ठाकरे और मां के जमाने को याद करते हुए कहा था कि दिवाली, दशहरा या त्योहारों पर साधु महात्मा अक्सर आते थे, लेकिन आने से पहले वो बता देते थे. उद्धव ठाकरे ने कहा कि उनके पिता ने हिंदुत्व के पाठ में ये भी पढ़ाया है कि कैसे दादागिरी निकाली जाती है.

जहां तक नवनीत राणा के तेवर का सवाल है, वो तो मुंबई पुलिस के उनके घर पहुंचने से पहले ही सरेंडर कर चुकी थीं, लेकिन जेल से छूटने के बाद तो वो ज्यादा ही आक्रामक नजर आ रही हैं - ऐसे में सवाल तो यही उठता है कि जिस मकसद से नवनीत राणा और उनके पति को राजद्रोह का केस दर्ज कर जेल भेजा गया था, पूरा भी हुआ क्या? दादागिरी निकल पायी क्या?

नवनीत राणा के ताजा तेवर देखकर तो जेल भेजने का उद्धव ठाकरे का मकसद अधूरा ही लगता है. अब तो नवनीत राणा कह रही हैं कि वो उद्धव ठाकरे के खिलाफ अपनी लड़ाई आगे भी जारी रखेंगी. नवनीत राणा तो उद्धव ठाकरे को चुनाव तक लड़ने के लिए चैलेंज कर रही हैं.

नवनीत राणा का कहना है कि उद्धव ठाकरे जहां से भी चुनाव लड़ेंगे वो उनके खिलाफ मैदान में होंगी. नवनीत राणा अमरावती से निर्दल सांसद हैं. अमरावती सीट पर एक बार को छोड़ कर शिवसेना का नब्बे के दशक के आखिर से ही कब्जा रहा है. 2019 के लोक सभा चुनाव में नवनीत राणा ने शिवसेना उम्मीदवार को ही शिकस्त दी थी. उद्धव ठाकरे ने अब तक प्रत्यक्ष चुनाव नहीं लड़ा है. मातोश्री से पहली बार अगर कोई चुनाव मैदान में उतरा तो वो हैं उद्धव ठाकरे के बेटे आदित्य ठाकरे. उद्धव ठाकरे फिलहाल विधान परिषद के सदस्य हैं.

नवनीत राणा, उद्धव ठाकरे को चैलेंज करने के साथ ही कह रही हैं कि वो आने वाले निगम चुनावों में भी शिवसेना के खिलाफ प्रचार करेंगी. ये तो मान कर चला जा रहा है कि महाराष्ट्र की राजनीति में हालिया टकराव की वजह निगम के चुनाव ही हैं. बीजेपी सीधे सीधे शिवसेना नेतृत्व से टकराने की जगह नवनीत राणा और राज ठाकरे जैसे नेताओं के कंधे का इस्तेमाल कर रही है - और उद्धव ठाकरे भी दरअसल उन कंधों को इस्तेमाल कर जवाब भी बीजेपी को ही दे रहे हैं.

बन सकता है अवमानना का मामला: राणा दंपत्ति से हड़बड़ी में कुछ गलतियां भी हो रही हैं. चाहे वो नवनीत राणा हों या उनके पति रवि राणा दोनों में से किसी के बयान में हाई कोर्ट के जमानत की शर्तों की परवाह नहीं लगती.

बॉम्बे हाई कोर्ट ने ये तो माना है कि नवनीत राणा के बयान उकसाने वाले रहे हैं, लेकिन उतने भर से राजद्रोह का मामला नहीं बनता. कोर्ट की ये टिप्पणी राणा दंपत्ति का हौसला बढ़ा रही है, जो स्वाभाविक भी है - लेकिन वे अदालत की शर्तें भूल जाते हैं.

1. सशर्त जमानत के लिए हाई कोर्ट की शर्त के मुताबिक राणा दंपत्ति केस से जुड़ी कोई बात मीडिया के सामने नहीं कह सकते हैं.

2. जिस मामले में राणा दंपत्ति की गिरफ्तारी हुई है वैसी चीज वे दोहरा नहीं सकते हैं.

3. सबूतों के साथ छेड़छाड़ से मना तो किया ही गया है, जांच में भी राणा दंपत्ति को सहयोग करना होगा और जांच अधिकारी जब भी पूछताछ के लिए बुलाएगा जाना होगा. हालांकि, जांच अधिकारी को 24 घंटे पहले नोटिस देना होगा.

लेकिन राणा दंपत्ति ने मीडिया से तो बात की ही है, ये भी डंके की चोट पर कह रहे हैं कि जो कुछ वो किये हैं, आगे भी करते रहेंगे.

नवनीत राणा का सवाल है कि आखिरकार उनका गुनाह क्या था? अगर हनुमान चालीसा पढ़ना या फिर भगवान का नाम लेना अपराध है तो फिर वो 14 दिन नहीं, बल्कि 14 साल सजा भुगतने के लिए तैयार हैं. ऐसे में अगर सरकार राणा दंपत्ति के खिलाफ कोर्ट की अवमानना की शिकायत के साथ अदालत जाती है तो दोनों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं.

ये लड़ाई धार्मिक है या सामाजिक?

नवनीत राणा के साथ साथ उनके विधायक पति के तेवर भी वैसे ही हैं. रवि राणा कह रहे हैं कि वो दिल्ली जाकर इंसाफ की मांग करेंगे, लेकिन दिल्ली से उनका मतलब सुप्रीम कोर्ट कतई नहीं है - बल्कि वो तो अमित शाह के दरबार में गुहार लगाने की बात कर रहे हैं.

नवनीत राणा अपनी लड़ाई को धार्मिक बताते हुए कह रही हैं कि इसे वो जारी रखेंगी, लेकिन उनके पति रवि राणा की बातों को समझें तो इसे राजनीतिक तरीके से लड़ने के संकेत दे रहे हैं. अस्पताल पहुंच कर नवनीत राणा से देवेंद्र फडणवीस के मिलने के बाद ये भी साफ है कि बीजेपी का पूरा सपोर्ट मिल रहा है. नवनीत राणा की गिरफ्तारी के बाद बीजेपी नेता किरीट सोमैया थाने में मिलने पहुंचे थे.

जिस लड़ाई को नवनीत राणा धार्मिक बता रही हैं, उसको महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के नेता राज ठाकरे सामाजिक मामला होने का दावा करते हैं. सामाजिक बताने से उनका आशय मस्जिद के लाउडस्पीकर से समाज को होने वाली दिक्कत की बात हो सकती है.

राज ठाकरे कहें जो भी लेकिन लड़ाई का तरीका तो धार्मिक ही है. एक धर्म के खिलाफ राजनीतिक वजहों से दूसरे धर्म का इस्तेमाल हो रहा है - और दावा ये है कि ये सामाजिक मामला सुलझाया जा रहा है.

रवि राणा के मुताबिक, जल्दी ही वो दिल्ली जाएंगे और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात करेंगे. कहते हैं, 'हमारे ऊपर जो भी अत्याचार हुआ है, उसकी पूरी जानकारी हम उनको देंगे. रवि राणा शिवसेना नेताओं संजय राउत और अनिल परब के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई किये जाने की मांग करने वाले हैं.

महाराष्ट्र के राजनीतिक हालात को समझने की कोशिश करें तो ऐसा लगता है जैसे ये लड़ाई नये रंग रूप लेने वाली है. महाराष्ट्र के गृह मंत्री दिलीप वलसे पाटिल तो ये भी इशारा कर चुके हैं कि राज ठाकरे के खिलाफ भी एक्शन हो सकता है. जिस तरीके से नवनीत राणा उद्धव ठाकरे को नये सिरे से चैलेंज करने लगी हैं निगम चुनाव आते आते मामला काफी पेंचीदा हो सकता है.

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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