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Updated: 25 जुलाई, 2019 12:41 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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इधर कर्नाटक का नाटक खत्म हुआ तो उधर मध्य प्रदेश में सियासी हलचल शुरू हो गई है. कर्नाटक में करीब 22 दिनों तक इस बात को लेकर बहस होती रही कि कुमारस्वामी सरकार फ्लोर टेस्ट का सामना कब करेगी. कुमारस्वामी ने भी कई बार फ्लोर टेस्ट को टाला, लेकिन 23 जुलाई मंगलवार का दिन कुमारस्वामी के लिए काफी अमंगल साबित हुआ. कर्नाटक विधानसभा में हुए फ्लोर टेस्ट में उनकी सरकार फेल हो गई और भाजपा को बहुमत मिल गया. अभी कर्नाटक में भाजपा को एक बड़ी जीत मिले 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि मध्य प्रदेश में उन्हें एक झटका लग गया. भाजपा के दो विधायकों ने विधानसभा में एक बिल के लिए कांग्रेस के हक में वोटिंग कर दी.

लोकसभा चुनाव के बाद से ही इस बात के कयास लगाए जाने लगे थे कि कर्नाटक सरकार कभी भी गिर सकती है. इसकी वजह ये थी कि लोकसभा चुनाव में कर्नाटक की 28 सीटों में से 25 सीटों पर भाजपा ने कब्जा कर लिया था. वैसे जो डर कर्नाटक के लिए था, वही डर मध्य प्रदेश के लिए भी था. मध्य प्रदेश के 29 लोकसभा सीटों में से 28 पर भाजपा ने किया, जबकि कांग्रेस के खाते में सिर्फ एक सीट आई. अब कर्नाटक सरकार गिर चुकी है और जो भाजपा के दो विधायकों ने किया है, उसने कांग्रेस को मजबूत नहीं किया, बल्कि भाजपा को गुस्सा दिलाने वाला काम किया है. वो कहते हैं, घायल शेर ज्यादा खतरनाक होता है. इस समय भाजपा की मध्य प्रदेश में हालत किसी घायल शेर से कम नहीं कही जा सकती है. कांग्रेस फिलहाल तो जश्‍न मना रही है. लेकिन ये खुशी कब तक कायम रहेगी, देखना होगा.

मध्य प्रदेश, कर्नाटक, भाजपा, कांग्रेसनारायण त्रिपाठी और शरद कोल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी से उनके घर जाकर मिले.

इन 2 विधायकों ने भाजपा को गु्स्सा दिलाया है !

ये बात बुधवार की है. मध्य प्रदेश विधानसभा में क्रिमिनल लॉ (मध्य प्रदेश अमेंडमेंट) बिल 2019 के लिए वोटिंग हो रही थी. कुल 122 विधायकों ने कांग्रेस सरकार के हक में वोट किया, जिसने पिछले ही साल दिसंबर में सत्ता संभाली है. कांग्रेस के 120 विधायकों के अलावा भाजपा के भी 2 विधायकों ने कांग्रेस के हक में वोट किया. इनमें एक हैं मैहर से चुने गए नारायण त्रिपाठी और दूसरे हैं बेओहारी से चुनकर आए शरद कोल. अभी कर्नाटक में कांग्रेस की सरकार गिरे 24 घंटे भी पूरे नहीं हुए थे कि मध्य प्रदेश में सियासी हलचल शुरू हो गई. भले ही कांग्रेस को लग रहा हो कि ये दो विधायक उनकी नैय्या के खेवइया साबित होंगे, लेकिन उन्हें ये बिल्कुल नहीं भूलना चाहिए कि अभी कांग्रेस की नाव उस मझधार में है, जहां कुछ भी हो सकता है. भाजपा के इन दो विधायकों ने पार्टी को गुस्सा दिलाने का काम किया है. और अगर इन दोनों विधायकों को तोड़ने का काम कांग्रेस का है, तो अब भाजपा 2 बदले कितने विधायक तोड़ेगी, ये देखने वाली बात होगी.

ये है विधायकों की घर वापसी

त्रिपाठी और कोल ने अभी तक भाजपा से इस्तीफा नहीं दिया है, लेकिन ये तय है कि वह भाजपा का दामन छोड़कर कांग्रेस का हाथ थामने वाले हैं. इसकी एक वजह तो यही है कि उन्होंने विधानसभा में कांग्रेस को साथ दिया है और दूसरी वजह ये है कि वह कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सुरेश पचौरी से उनके घर जाकर मिले, जिसकी तस्वीर भी खूब वायरल हो रही है. आपको बता दें कि पहले ये दोनों विधायक कांग्रेस में ही थे, जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए. उन्होंने कहा है कि अब उनकी घर वापसी हो रही है. वहीं दूसरी ओर कमलनाथ ने कहा है- भाजपा रोज कहती थी कि हमारी सरकार किसी भी दिन गिर सकती है. हालांकि, विधानसभा में बिल की वोटिंग के दौरान भाजपा के दो विधायकों ने हमारे हक में वोट दिया.

मध्य प्रदेश का हो सकता है कर्नाटक जैसा हाल

जब कर्नाटक में विधानसभा चुनाव हुए थे तो भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन किसी भी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था. उस समय कांग्रेस और जेडीएस ने भाजपा के विजय रथ को रोकने के लिए हाथ मिला लिया था. चुनाव के बाद कांग्रेस-जेडीएस ने जो भाजपा के साथ किया था, उसका बदला तो भाजपा ने अब ले ही लिया है. उसने कांग्रेस-जेडीएस के करीब 15 विधायक तोड़ दिए. अब मध्य प्रदेश में कांग्रेस खुद को मजबूत करने के लिए भाजपा के विधायक तोड़ रही है. ऐसे में भाजपा का आग बबूला होना तो बनता है. तनिक भी हैरानी नहीं होनी चाहिए अगर भाजपा अपने 2 विधायक टूटने के बदले कांग्रेस के 20 विधायक तोड़ दे.

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