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Updated: 23 जुलाई, 2019 05:46 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर एक ऐसी समस्या है, जो सालों से अनसुलझी पड़ी है. दोनों देशों की सरकारें बदलती रहती हैं, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकल सका है. वैसे समाधान निकले भी तो कैसे, पाकिस्तान लगातार आतंकी गतिविधियों में लिप्त रहता है. भारत की ओर से ये साफ किया जा चुका है कि दोनों देशों के बीच कश्मीर मुद्दे पर तब तक कोई बात नहीं हो सकती है, जब तक पाकिस्तान की ओर से आतंकी गतिविधियां बंद नहीं कर दी जाती हैं. पूरी दुनिया जानती है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर का मसला कितना पेंचीदा है, लेकिन इसकी गंभीरता को जानने के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा बयान दिया है जो दोनों देशों के बीच की इस समस्या को और पेंचीदा बना सकता है.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान से मुलाकात के दौरान दावा किया है कि पीएम मोदी ने उनसे कश्मीर मसले पर मध्यस्थता करने का आग्रह किया है. डोनाल्ड ट्रंप ने न जाने क्या सोचकर ये बात कह दी. जबकि भारत ने दावा किया है कि ऐसा कुछ नहीं है. पीएम मोदी ने ट्रंप से ऐसा कोई आग्रह नहीं किया. अब सवाल ये उठता है कि जब पीएम ने ट्रंप से कुछ कहा ही नहीं, तो वह झूठ क्यों बोल रहे हैं? क्या वह खुद को एक सुपरपावर की तरह देखने लगे हैं, जिसके पास हर देश हाथ जोड़े चला आए? या उन्हें ये लगने लगा है कि हर देश अपने विवादों के निपटाने के लिए अमेरिका की मदद चाहता है?

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भारत-अमेरिका के संबंधों पर भी पड़ सकता है असर

ट्रंप ने इमरान खान से मुलाकात के दौरान जो दावा किया है उससे भारत-पाकिस्तान के बीच कश्मीर समस्या का हल तो नहीं निकलेगा, लेकिन पूर्व राजनयिकों का मानना है कि इस बयान से भारत पाकिस्तान के संबंधों में खटास आ सकती है. भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत रिचर्ड वर्मा ने भी कहा है कि राष्ट्रपति ने अपने बयान से बहुत नुकसान किया है. भारत की ओर से ट्रंप के दावों को खआरिज करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने ट्वीट किया है- 'हमने अमेरिकी राष्ट्रपति के उस बयान को देखा जिसमें उन्होंने कहा है कि यदि भारत और पाकिस्तान रिक्वेस्ट करते हैं तो वे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता के लिए तैयार हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से इस तरह का कोई अनुरोध नहीं किया है.'

हाफिज सईद पर भी दिया था विवादित बयान

हाल ही में पाकिस्तान में मुंबई हमलों के मास्टमाइंड आतंकी हाफिज सईद की गिरफ्तारी हुई थी. उस दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट कर के कहा था कि पाकिस्तान ने हाफिज सईद को 10 साल तक खोजने के बाद पकड़ा है. उन्होंने ये भी कहा था कि 2 सालों में अमेरिका ने पाकिस्तान पर आतंकवाद के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए बहुत दबाव डाला है. यानी सीधे-सीधे कहें तो ट्रंप ये कहना चाहते थे कि हाफिज की गिरफ्तारी की वजह अमेरिका का दबाव है. यानी तब भी वह हाफिज सईद की गिरफ्तारी का क्रेडिट खुद ही लेना चाहते थे.

भारत हमेशा से इस बात को लेकर स्पष्ट है कि जब तक सीमा पार से आतंकी गतिविधियां और घुसपैठ नहीं रोकी जाती, तब तक कश्मीर को लेकर कोई बात नहीं होगी. ट्रंप ने सब जानते हुए मध्यस्थता की बात कह दी है, जबकि भारत ने ऐसा कोई अनुरोध नहीं किया. हैरानी तो इस बात की है कि उन्होंने पीएम मोदी का नाम लिया और कहा कि उन्होंने ही ट्रंप से अनुरोध किया था, जबकि ऐसा कुछ नहीं है. ट्रंप ने पहले हाफिज सईद को लेकर बयान दिया, जिसमें उनका झुकाव पाकिस्तान की ओर दिखा और अब कश्मीर मुद्दे पर उन्होंने जो कहा है वह भी यही दिखा रहा है कि उनका झुकाव पाकिस्तान की ओर है. अब ये देखना दिलचस्प होगा कि ट्रंप इस मामले पर क्या सफाई देते हैं. हो सकता है कि अगर वह नहीं कहते तो शायद कभी वाकई अमेरिका की मध्यस्थता के जरिए भी इस मामले सुलझाने की कोशिश की जाती, लेकिन ट्रंप के बयान ने मामले को और अधिक पेंचीदा कर दिया है.

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