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Updated: 03 जनवरी, 2022 11:02 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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दुनियाभर के देशों और वैश्विक बैंकों के कर्ज में गले तक डूबे पाकिस्तान के आर्थिक हालात दिन-ब-दिन बिगड़ते जा रहे हैं. कर्ज उतारने के लिए पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान नए-नए तरीकों की ईजाद कर रहे हैं. पहले भी पाकिस्तान ने अपने कर्ज को कम करने के लिए चीन को गधे बेचने से लेकर संरक्षित प्रजाति की सोन चिरैया के शिकार के लिए सऊदी राजघरानों को लाइसेंस देने तक के अजीबोगरीब फैसले लिए हैं. वहीं, अब इमरान खान ने पाकिस्तान का कर्ज उतारने के लिए एक नई स्कीम लॉन्च की है. दरअसल, इमरान खान सरकार दुनियाभर के लोगों को पाकिस्तान की नागरिकता देने की तैयारी कर रही है. और, इसके लिए बस एक छोटी सी शर्त है, जो घूम-फिर कर पाकिस्तान का कर्ज कम करने की तरकीब ही कही जा सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो पाकिस्तान की इमरान खान सरकार ने एक मिलियन डॉलर का निवेश करने वाले किसी भी विदेशी नागरिक को अपने देश की नागरिकता देने का मन बनाया है. 

कौन लेना चाहेगा पाकिस्तान की नागरिकता?

पाकिस्तान के अखबार द डॉन की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधानमंत्री इमरान खान ने केवल अफगानिस्तान के व्यवसायियों और बड़े धनकुबेरों को पाकिस्तान की नागरिकता देने के प्लान को नकार दिया. इमरान खान का मानना था कि पाकिस्तान की नागरिकता को केवल अफगानिस्तान के लोगों तक ही सीमित नहीं रखा जा सकता है. दुनियाभर के जो भी लोग पाकिस्तान में निवेश करना चाहते हैं, उन्हें पाकिस्तान की नागरिकता दी जानी चाहिए. इस स्कीम को लेकर हुई बैठक में इमरान खान ने माना कि सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों ने भी अपने यहां पर निवेश को बढ़ावा देने के लिए ऐसी ही पॉलिसी अपनाई हैं, तो पाकिस्तान को भी इस मामले में पीछे नहीं रहना चाहिए. दुनियाभर के लोगों के लिए पाकिस्तान की नागरिकता के रास्ते खोल देना एक बड़ा कदम कहा जा सकता है. लेकिन, सबसे बड़ी बात यह ही है कि आखिर पाकिस्तान जैसे आतंकिस्तान की नागरिकता कौन लेना चाहेगा?

अगर किसी देश की नागरिकता लेने का मौका मिला, तो लोग अमेरिका, रूस, ब्रिटेन जैसे देशों को तरजीह देते हैं. शायद ही कोई कम अक्ल होगा, जो पैसे लगाकर पाकिस्तान की नागरिकता लेना चाहेगा. सवाल ये भी है कि जिस देश अफगानिस्तान के लोगों को पाकिस्तान ने नागरिकता देने की योजना बनाई है, वहां के लोग भी 'आसमान से गिरे और खजूर में अटके' वाली कहावत को क्यों चरितार्थ करना चाहेंगे? पाकिस्तान में पहले से ही रह रहे अफगानिस्तानी नागरिकों और अफगानिस्तान में तालिबान का असर बढ़ने के बाद देश छोड़ रहे लोगों को जब पैसों का निवेश ही करना होगा, तो वो पाकिस्तान में क्यों बसना चाहेंगे? क्योंकि, पैसों का निवेश कर सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों का रास्ता भी तो खुला हुआ है. और, वहां पर किसी तरह के इस्लामिक आतंकी संगठन का खतरा भी नहीं होगा. पाकिस्तान पर तो वैसे ही तालिबान के आतंकियों को शरण देने का आरोप लगा है. इस स्थिति में अफगानिस्तान के व्यापारी पाकिस्तान पर कितना भरोसा कर पाएंगे, ये सोचने का विषय है.

Imran Khan Citizenship Policyपैसों का निवेश कर लोगों के पास सऊदी अरब और तुर्की जैसे देशों में बसने का रास्ता भी खुला हुआ है.

तालिबान के खौफ में इमरान ने बदली नागरिकता पॉलिसी

वैसे, इमरान खान की दुनियाभर के लोगों को पाकिस्तान की नागरिकता देने की बात करने के पीछे की वजह भी बहुत दिलचस्प है. दरअसल, अगर पाकिस्तान की ये पॉलिसी केवल अफगानिस्तान के लोगों के लिए ही मान्य होगी, तो अफगानिस्तान में सरकार चला रहे तालिबान का भड़कना स्वाभाविक है. क्योंकि, हाल ही में तालिबान की ओर से ऐलान किया गया है कि पाकिस्तान के सैनिक अगर अफगानिस्तान की जमीन पर एक भी कदम रखें, तो उन्हें गोलियों से भून दिया जाए. तालिबान का ये आदेश इस नागरिकता पॉलिसी की सुगबुगाहट के बीच ही आया है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो पाकिस्तान की इस पॉलिसी में बदलाव की सबसे बड़ी वजह तालिबान का डर है. इसी वजह से इमरान खान ने इस पॉलिसी को दुनियाभर के लोगों के लिए बनाने का निर्देश दिया है. वैसे भी पाकिस्तान के पास दोस्त देशों के नाम पर चीन, तुर्की और अफगानिस्तान ही हैं. अगर इनमें से भी एक भड़क गया, तो पाकिस्तान के पास बचेगा कौन? क्योंकि, सऊदी अरब को तो पाकिस्तान पहले ही कश्मीर मामले को लेकर गुस्सा कर चुका है.

खैर, अरबों के कर्ज में लदे पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था लगातार गिरती जा रही है. हालात इस कदर खराब होते जा रहे हैं कि पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान कर्ज उतराने के लिए भी कर्ज ले रहे हैं. इतना ही नहीं, आईएमएफ द्वारा ग्रे लिस्ट में डाले जाने के बाद से इमरान खान किसी भी देश से कर्ज लेने में उसकी नियम-शर्तों पर भी ध्यान नहीं दे रहे हैं. हाल ही में पाकिस्तान ने सऊदी अरब की कई शर्मनाक शर्तों को मानते हुए कर्ज लिया था. जिसमें कहा गया था कि अगर सऊदी अरब अपनी पैसों को वापस मांगता है, तो पाकिस्तान को 10 दिनों के अंदर पूरा कर्ज वापस करना होगा. पाकिस्तान के सरकारी आंकड़ों की बात की जाए, तो हर पाकिस्तानी नागरिक के ऊपर करीब एक लाख 75 हजार रुपये का कर्ज है. वैसे, गिरती अर्थ व्यवस्था को संभालने के लिए इमरान खान की ये स्कीम कितना काम करेगी, ये तो वक्त ही बताएगा. लेकिन, ये देखना दिलचस्प होगा कि आतंकिस्तान के नाम से मशहूर पाकिस्तान की नागरिकता लेता कौन है?

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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