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Updated: 22 मई, 2019 10:49 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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Loksabha Election 2019 के नतीजे कल आने वाले हैं और इसके पहले Exit poll 2019 Results ने भाजपा और एनडीए की जीत की घोषणा पहले ही कर दी है. पर इसी बीच विपक्षी पार्टियों ने Election Commission के सामने EVM Hacking को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं. EVM और VVPAT को लेकर खुद चुनाव आयोग ने सफाई दी है और 22 विपक्षी पार्टियों की मांग को खारिज कर दिया है. इसी बीच उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश और दक्षिण के राज्यों से भी खबरें आ रही हैं कि सभी विपक्षी पार्टियां भी EVM Strong Room की रखवाली कर रही हैं. AAP ने तो 150 कार्यकर्ता 70 EVM Strong Room की रखवाली के लिए लगा दिए हैं.

जहां EVM की बात हो रही है वहीं इस बार Strong Room की भी बात हो रही है. असल में स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर ये बात तो पता है कि यहां EVM और VVPAT मशीनें वोट डलने के बाद रखी जाती हैं, लेकिन आखिर इनमें क्या खास होता है? क्या नियम है इन स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर? और इनकी रखवाली कैसे की जाती है?

चुनाव आयोग ने पार्दर्शी चुनाव प्रक्रिया के लिए EVM का इस्तेमाल करना तो शुरू कर दिया, लेकिन उसकी सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे. उसके लिए बनाए गए स्ट्रॉन्ग रूम. क्योंकि EVM की सुरक्षा राष्ट्रीय मुद्दा है इसलिए इन कमरों को आम समझने की गलती नहीं की जा सकती.

EVM and VVPAT Strong Room की सुरक्षा के लिए थ्री-लेयर सुरक्षा का इंतजाम किया जाता है. ये पूरे देश में लागू होता है. इन स्ट्रॉन्ग रूम्स में चुनाव आयोग का पूरा नियंत्रण रहता है.

क्या किसी भी बिल्डिंग में बनाया जा सकता है Strong Room?

इस सवाल का जवाब है नहीं. स्ट्रॉन्ग रूम सबसे पहले तो किसी सरकारी बिल्डिंग में ही बन सकता है. इसे किसी भी गैर सरकारी बिल्डिंग में नहीं बनाया जा सकता. ये सरकारी बिल्डिंग पहले से ही चयनित कर दी जाती है. इसे पोलिंग बूथ, अन्य राजनीतिक पार्टियों और पुलिस आदि से दूरी के हिसाब से चयनित किया जाता है. ऐसे में रिटर्निंग ऑफिसर सभी प्रत्याशियों को लिखित में इस जगह की जानकारी देता है, साथ ही ये ध्यान रखा जाता है कि किसी पुलिस स्टेशन को न चुना गया हो.

बिल्डिंग के बाद स्ट्रॉन्ग रूम चयनित किया जाता है जिसके लिए भी कई तरह के नियम होते हैं.

चुनाव आयोग द्वारा स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर निर्धारित की गई गाइडलाइन्स.चुनाव आयोग द्वारा स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर निर्धारित की गई गाइडलाइन्स.

कहां मौजूद होते हैं Strong Room?

स्ट्रॉन्ग रूम कोई ऐसी जगह नहीं हो सकती जहां बाढ़ या पानी आने का कोई भी खतरा हो जैसे बेसमेंट में, छत के सीधे नीचे वाले कमरे में, किचन या कैंटीन के नीचे या चिलर प्लांट के पास, बिल्डिंग के वाटर टैंक के पास या किसी टॉयलेट या पैंट्री के पास, यहां तक कि स्ट्रॉन्ग रूम किसी सीढ़ी या बिल्डिंग के किसी निचले हिस्से के पास भी नहीं हो सकता. यहां तक कि स्ट्रॉन्ग रूम के पास कोई अंडर-कंस्ट्रक्शन बिल्डिंग भी नहीं हो सकती है. ताकि पानी या किसी भी तरह EVM को नुकसान की कोई समस्या न रह जाए. बिल्डिंग की सुरक्षा जिम्मेदारी पहले से ही निर्धारित की जाती है.

इसके अलावा, ऐसी भी कोई जगह नहीं हो सकती जहां आग लगने का कोई डर हो या फिर कैमिकल का इस्तेमाल होता हो. सुरक्षा फोर्स हर तरह की गतिविधी पर ध्यान रखती हैं. अगर आस-पास कोई कंस्ट्रक्शन हो भी रहा है तो ये ध्यान रखा जाता है कि वो ऐसा न हो जिससे cryptographic key loss या चोरी की कोई घटना हो सके. यानी इलेक्ट्रिक ड्रिल आदि का इस्तेमाल बिलकुल न हो रहा हो.

तकनीक का भी रखा जाता है ध्यान-

स्ट्रॉन्ग रूम में तकनीक का भी बहुत ध्यान रखा जाता है जैसे इलेक्ट्रिकल स्विच, एसी, LAN आदि को खास तौर पर चुनाव आयोग के निर्देशों के आधार पर बनाया जाता है. इसे आग न लग सकने वाले डस्ट-फ्री मटेरियल से बनाया जाता है और साथ ही साथ ऐसी सुरक्षा रखी जाती है कि बाहर से फिजिकल या वर्चुअल तौर पर कोई कनेक्शन न रह जाए.

कैसे होती है EVM and VVPAT Strong Room की सुरक्षा?

सेंट्रल पैरा मिलिट्री फोर्स (CPMF) स्ट्रॉन्ग रूम के अंदरूनी हिस्से की सुरक्षा के लिए होती है. ये वो जगह होती है जहां EVM और VVPAT रखे जाते हैं. इस कमरे का बाहरी हिस्सा राज्य सुरक्षा बलों की सुरक्षा में रहता है. ये भी हथियारों से लैस कमांडो होते हैं. इसके अलावा, तीसरा घेरा होता है स्थानीय पुलिस और अन्य स्थानीय सुरक्षा बलों का जिन्हें उस बिल्डिंग के आस-पास गलियों और सड़कों की सुरक्षा की जिम्मेदारी दी जाती है.

District Collectorate (DC) और Superintendent of Police (SP) खुद उनके इलाके के स्ट्रॉन्ग रूम की सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हैं. उन्हें चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित हर नियम को मानना होता है और उसका पूरी जिम्मेदारी से पालन करना होता है.

 स्ट्रॉन्ग रूम के अंदरूनी और बाहरी हिस्से की सुरक्षा हथियार धारक सुरक्षा बलों के जिम्मे होती है. स्ट्रॉन्ग रूम के अंदरूनी और बाहरी हिस्से की सुरक्षा हथियार धारक सुरक्षा बलों के जिम्मे होती है.

सुरक्षा की जिम्मेदारी के लिए कई लोग जिम्मेदार होते हैं. इन स्ट्रॉन्ग रूम को 24*7 वीडियोग्राफी के साथ-साथ हथियारधारक सुरक्षा बलों की निगरानी में रखी जाती है.

स्ट्रॉन्ग रूम को सील करने के क्या हैं नियम?

चुनाव होने के बाद कड़ी निगरानी में ही EVM और VVPAT मशीनें स्ट्रॉन्ग रूम पहुंचाई जाती हैं. इसके साथ ही स्ट्रॉन्ग रूम को सील करने के दौरान राजनीतिक पार्टियों के सदस्य मौजूद रहते हैं. वो वहां मौजूद रह भी सकते हैं और ताले पर अपनी सील भी लगा सकते हैं. इस काम के लिए राजनीतिक पार्टियों को पहले से लिखित में आवेदन देना होता है.

स्ट्रॉन्ग रूम में सिर्फ एक ही एंट्री प्वाइंट होता है और इसमें डबल लॉक सिस्टम होता है. इसकी एक चाभी चुनाव आयोग द्वारा निर्धारित रिटर्निंग ऑफिसर और दूसरी असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर के पास होती है. Strong Room के अन्य एंट्री प्वाइंट यहां तक कि खिड़कियों को भी इस तरह से सील किया जाता है कि बाहर से कोई भी अंदर न जा सके.

लिखित में भी रखा जाता है Strong Room की सुरक्षा का रिकॉर्ड-

न सिर्फ स्ट्रॉन्ग रूम का एंट्री प्वाइंट CCTV कवरेज के साथ रहता है बल्कि इसके लिए लिखित रिकॉर्ड भी मेनटेन किए जाते हैं. इसमें तारीख, समय, घंटे और नाम के हिसाब से वहां हो रही हर हरकत को रिकॉर्ड किया जाता है. इसमें SP, DC, DEO जैसे अफसरों और राजनीतिक पार्टियों के प्रत्याशी और कार्यकर्ताओं का आना-जाना भी शामिल होता है.

स्ट्रॉन्ग रूम से काउंटिंग हॉल तक की सुरक्षा-

अगर काउंटिंग हॉल EVM Strong Room के आस-पास होता है तो उस रास्ते की निगरानी भी रखी जाती है. इसके लिए SP या DEO की जिम्मेदारी पहले से ही निर्धारित रहती है. ये ध्यान रखने वाली बात है कि न तो स्ट्रॉन्ग रूम के अंदरूनी हिस्से में कोई जा पाए न ही वहां सुरक्षा की कोई कमी हो. साथ ही, EVM ट्रांसफर करते समय भी कोई समस्या न हो.

अगर काउंटिंग हॉल दूर है तब स्ट्रॉन्ग रूम से लेकर काउंटिंग हॉल तक बैरिकेड के जरिए सुरक्षा की जाती है. सभी जगहों पर हथियारों के साथ सुरक्षा कर्मी तैनात रहते हैं. रास्ते की सुरक्षा इस हिसाब से रखी जाती है कि किसी भी संसद क्षेत्र की ईवीएम उसी के काउंटिंग हॉल तक पहुंचे किसी अन्य तक नहीं.

काउंटिंग के दौरान CCTV कैमरा भी लगाया जाता है. ये EVM स्ट्रॉन्ग रूम से काउंटिंग हॉल ले जाते समय भी लगाए जाते हैं. ताकि सुरक्षा में कोई कमी न रह जाए.

अगर किसी कैंडिडेट को या पार्टी को ऐसा लगता है कि उसके किसी कार्यकर्ता को स्ट्रॉन्ग रूम के पास सुरक्षा के लिए रहना है तो उसे पहले से लिखित में जानकारी देनी होगी. इसमें भी वो स्ट्रॉन्ग रूम के अंदरूनी हिस्से में नहीं आ सकता है, हां बाहरी घेरे में रह सकता है. ऐसे में वो स्ट्रॉन्ग रूम के एंट्री प्वाइंट को देख सकेगा. यहां पर पीने का पानी, टॉयलेट आदि सुविधाएं उन्हें मुहैया करवाई जाएंगी. अगर स्ट्रॉन्ग रूम के दरवाजे को देखने का कोई सीधा तरीका नहीं है तो उन्हें CCTV की फीड दिखाई जाएगी. ऐसे केस में कुछ समय के अंतराल से वो स्ट्रॉन्ग रूम के दरवाजे का मुआयना करने आ सकते हैं.

स्ट्रॉन्ग रूम के पास जो कंट्रोल रूम होता है उसे 24*7 चलाया जाता है और एक राजपत्रित अधिकारी (gazetted officer) और एक पुलिस अधिकारी हर समय ड्यूटी पर रहते हैं.

मंत्रियों और VVIP के लिए भी नियम-

स्ट्रॉन्ग रूम के पास किसी भी मंत्री या किसी अन्य अधिकारी की गाड़ी नहीं जा सकती. जी हां, सुरक्षित कैम्पस के बाहर तक ही गाड़ियां जा सकती हैं. किसी की गाड़ी कहां तक जा सकेगी इसे पूरी तरह से निर्धारित किया जाता है और उसके आगे बाहरी और अंदरूनी घेरे में पैदल ही जा सकते हैं.

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श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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