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Updated: 19 अगस्त, 2022 03:49 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया के घर सीबीआई ने शराब नीति से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले पर छापेमारी मारी की है. खुद मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर अपने घर पर सीबीआई के छापे की जानकारी साझा की थी. सीबीआई की छापेमारी को आम आदमी पार्टी ने बदले की राजनीति से प्रेरित बताया है. और, आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के हिसाब से पीएम नरेंद्र मोदी को अरविंद केजरीवाल की बढ़ती ताकत से डर लग रहा है.

वैसे, AAP नेता सिसोदिया के घर पर हुई इस छापेमारी पर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने भी प्रतिक्रिया दी है. पवन खेड़ा ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि 'एजेंसियों के निरंतर दुरुपयोग का एक बड़ा नुकसान यह भी होता है कि जब वह एजेंसी सही काम करे, तब भी उसके कदम को शक की दृष्टि से देखा जाता है. ऐसे में भ्रष्ट लोग दुरुपयोग की दुहाई देकर बच निकलते हैं और जो ईमानदारी से जनता के मुद्दे उठाते हैं, वो दुरुपयोग का शिकार होते रहते हैं.'

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा का ये बयान चौंकाने वाला है. क्योंकि, देश के तकरीबन सभी विपक्षी राजनीतिक दल भाजपा पर सरकारी एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते रहते हैं. और, खुद कांग्रेस ने भी नेशनल हेराल्ड केस में राहुल गांधी-सोनिया गांधी से पूछताछ पर काफी हो-हल्ला मचाया था. इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि मनीष सिसोदिया के घर पर सीबीआई के छापे को पवन खेड़ा 'सही कदम' क्यों बता रहे हैं?

CBI raid on Manish Sisodia why Congress Leader Pawan Khera said right decision Arvind Kejriwal praised news in New York Timesभ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को विपक्षी दलों ने मजाक बनाकर रख दिया है.

सियासी आधार पर मिलती है सरकारी एजेंसियों को 'क्लीन चिट'

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की बात पर गौर करें, तो एक ही बात सामने आती है. जिन भी राज्यों में ईडी, सीबीआई, आईटी जैसी सरकारी एजेंसियों किसी राजनीतिक पार्टी के विरोधी सियासी दल के नेताओं पर कार्रवाई करती है. तो, इन सरकारी एजेंसियों की छापेमारी को क्लीन चिट पकड़ा दी जाती है. लेकिन, अगर यही छापेमारी या पूछताछ कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व पर की जाएगी, तो यह दुरुपयोग साबित हो जाती है. फिर चाहे बात एनसीपी नेता नवाब मलिक की हो या अनिल देशमुख की. टीएमसी नेता पार्थ चटर्जी की हो या शिवसेना नेता संजय राउत की. इन सभी मामलों में ये सरकारी एजेंसियां बदले की राजनीति को पूरा करने के लिए काम करने वाली साबित कर दी जाती हैं. जैसा कि पवन खेड़ा ने भी अपने ट्वीट में साफ किया है कि भ्रष्ट लोग दुरुपयोग की बात कह बच निकलते हैं और ईमानदारी से काम करने वाले शिकार हो जाते हैं.

मनीष सिसोदिया की NYT और खलीज टाइम्स में 'तारीफ' भी घोटाला ही!

मनीष सिसोदिया की तारीफ करते हुए न्यूयॉर्क टाइम्स और खलीज टाइम्स ने दिल्ली सरकार को पहले पन्ने पर जगह दी है. लेकिन, अब इस 'तारीफ' में भी घोटाला सामने आ गया है. दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे जिस लेख को लेकर अरविंद केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया को स्वतंत्र भारत का सबसे बढ़िया शिक्षा मंत्री घोषित किया है. ठीक वैसा ही एक आर्टिकल दुबई के एक अखबार खलीज टाइम्स में भी छपा है. इसमें भी रोचक बात ये है कि न्यूयॉर्क टाइम्स और खलीज टाइम्स के लिए ये लेख लिखने वाला संवाददाता भी एक ही है. 

वहीं, दोनों लेखों के साथ छपी मनीष सिसोदिया की एक तस्वीर भी कॉमन है. वैसे, इस लेख के बारे में सबसे ज्यादा रोचक ये बात है कि दोनों में छपा कॉन्टेंट भी एक जैसा ही है. जिसमें एक शब्द का भी हेर-फेर नहीं किया गया है. इसके बारे में जानकारी सामने आने के बाद भाजपा ने न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे इस लेख को विज्ञापन घोषित कर दिया है. भाजपा सांसद प्रवेश सिंह वर्मा ने न्यूयॉर्क टाइम्स के इस लेख पर सवाल खड़ा करते हुए कहा है कि खुद अरविंद केजरीवाल के मुंह से निकला है, न्यूयॉर्क टाइम्स में खबर छपवाई गई है. वैसे, ये पूरी तरह से अलग ही मामला है कि दिल्ली की शराब नीति में सामने आई खामियों की तुलना दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था से की जा रही है. 

AAP की खबर अमेरिका पहुंची, तो इसका भ्रष्टाचार से क्या लेना-देना?

आम आदमी पार्टी के संयोजक और दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया का अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स में छपे एक लेख का हवाला देते हुए बचाव किया है. जबकि, मनीष सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई की जांच दिल्ली की शराब नीति में सामने आई खामियों को लेकर की जा रही है. जिसमें करोड़ों रुपये की लाइसेंस फीस को वापस करने जैसी कई चीजें शामिल हैं. लेकिन, अरविंद केजरीवाल दिल्ली की शराब नीति से जुड़ी बातें नहीं करते हैं. बल्कि, न्यूयॉर्क टाइम्स में छपी एक खबर के सहारे मनीष सिसोदिया को कट्टर ईमानदार होने का लाइसेंस थमा देते हैं. वैसे, ये पूरी तरह से अलग ही मामला है कि दिल्ली की शराब नीति में सामने आई खामियों की तुलना दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था से करने के बारे में अरविंद केजरीवाल ही बता सकते हैं.

भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई को बना दिया गया 'मजाक'

हमारे देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ सरकारी एजेंसियों की कार्रवाई को मजाक सा बना दिया गया है. तृणमूल कांग्रेस नेता पार्थ चटर्जी की करीबी के फ्लैटों से कूड़े की तरह पड़े करोड़ों रुपये और सोना जब्त किये जाने पर इसे साजिश करार दे दिया जाता है. पात्रा चॉल घोटाले में सड़क पर रहने को मजबूर हुए सैकड़ों परिवारों के आंसुओं से किसी को लेना-देना नहीं रहता है. लेकिन, शिवसेना नेता संजय राउत को इस मामले में गिरफ्तार किए जाने पर ये लोकतंत्र पर हमला बन जाता है. जो कांग्रेस मनीष सिसोदिया पर कार्रवाई को सही बता रही है. वहीं, कांग्रेस झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के खिलाफ खनन घोटाले की जांच को गलत बताती है. क्योंकि, झारखंड में कांग्रेस की हेमंत सोरेन के साथ सरकार में साझीदार है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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