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Updated: 02 फरवरी, 2019 11:47 AM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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लोकसभा चुनाव 2019 से पहले मोदी सरकार की ओर से पीयूष गोयल ने बजट पेश कर दिया है. ये interim budget था और पूर्ण बजट नई सरकार जुलाई में पेश करेगी. क्योंकि ये बजट चुनाव से पहले पेश किया गया, तो इसमें ऐसी बहुत सी घोषणाएं हैं, जो सुनने में बहुत बड़ी लगती हैं, लेकिन हकीकत में उसका फायदा सबको नहीं मिलेगा. यानी ये कहना बिल्कुल गलत नहीं होगा कि इस बजट को पेश करने में एक शब्दों का खेल भी खेला गया. जिसकी वजह से घोषणाओं का मतलब अलग-अलग शख्स अपने हिसाब से लगा रहा है. यहां जरूरत है इन घोषणाओं को सही से समझने की ताकि आगे चलकर आपको कोई दिक्कत या मायूसी ना हो. चलिए जानते हैं कुछ घोषणाओं के बारे में, जिन्हें सुनने के बाद अनायास ही मुंह से निकल गया 'वाह!!' लेकिन हकीकत जानने पर कई मुस्कुराते चेहरे मायूस हो गए.

बजट 2019, मोदी सरकार, टैक्सइस बजट में कुछ घोषणाओं की हकीकत जानने पर कई मुस्कुराते चेहरे मायूस हो गए.

5 लाख तक की आय पर टैक्स नहीं

इस बार के बजट में घोषणा की गई है कि 5 लाख रुपए तक की आय पर कोई टैक्स नहीं लगेगा. ये सुनने में यूं लगता है जैसे टैक्स छूट की सीमा 2.5 लाख से बढ़ाकर 5 लाख रुपए कर दी गई हो, लेकिन वास्तविकता में ऐसा नहीं है. ये छूट आयकर की धारा 87ए के तहत दी जा रही है. इसके तहत अभी तक 3.5 लाख रुपए तक की आय वालों पर कोई टैक्स नहीं लगता था, क्योंकि उन्हें 87ए के तहत छूट मिल जाती थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 5 लाख कर दिया गया है. यानी 5 लाख तक की आय वालों को तो कोई टैक्स नहीं चुकाना होगा, लेकिन अगर आपकी आय 5 लाख से एक भी रुपए अधिक हुई तो 2.5 लाख से अधिक की सारी आय पर आपको तय स्लैब के अनुसार टैक्स देना होगा.

किसानों को 'सम्मान' के 6000 रुपए

मोदी सरकार ने चुनाव से पहले पेश किए गए बजट में किसानों को खुश करने के लिए एक नई योजना 'प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि पीएम-किसान' शुरु करने की घोषणा की है, जिसके तहत किसानों को सालाना 6000 रुपए दिए जाएंगे. इसमें पहली बात तो ये समझने की है कि ये पैसे सभी किसानों को नहीं मिलेंगे. इसका फायदा सिर्फ छोटे किसानों को होगा, जिनके पास 2 हेक्टेयर यानी करीब 5 एकड़ तक जमीन है. साथ ही ये पैसे 3 किस्तों में 2-2 हजार रुपए कर के आएंगे.

मजदूरों को प्रतिमाह 3000 रुपए की पेंशन

इस बजट में मोदी सरकार ने मजदूरों का भी ख्याल रखा और उनके लिए 'प्रधानमंत्री श्रम योगी मान-धन' पेंशन योजना शुरू कर दी. ये योजना असंगठित क्षेत्र के मजदूरों के लिए है, जिसमें उन्हें 60 साल की आयु के बाद प्रति माह 3000 रुपए की पेंशन मिलेगी. ध्यान रहे कि इसमें सिर्फ उन कामगारों को शामिल किया जाएगा, जिनकी मासिक आय 15 हजार रुपए से कम है. 29 साल की उम्र वाले मजदूर के इसमें 100 रुपए प्रति माह अंशदान करना होगा और 18 साल की उम्र वाले मजदूर को इसमें सिर्फ 55 रुपए का अंशदान करना होगा. यहां सबसे अहम बात ये है कि मजदूर वर्ग वह तबका होता है तो अपने वर्तमान को जीता है, भविष्य के बारे में चिंतित रहने का वक्त उसके पास नहीं होता. खैर, अगर भविष्य की चिंता करते हुए इस योजना में कोई मजदूर पैसे डाल भी दे तो उसे महज 3000 रुपए की पेंशन मिलेगी, जिसके 30-40 साल बाद वैल्यू कितनी कम होगी, इसका अंदाजा आप लगा सकते हैं.

2 फ्लैट वाले मालिकों को खुश किया

जिन लोगों के पास 2 घर थे, उन्हें अब तक अपने दूसरे घर के अनुमानित किराए पर आयकर चुकाना होता था. इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ा कि वो दूसरा घर खाली पड़ा है या उसमें कोई रह रहा है. अब ऐसा नहीं होगा. अब दूसरा घर जब तक खाली होगा, उस पर आपको टैक्स नहीं देना होगा. यानी जब उससे किराया आएगा, सिर्फ तभी आपको टैक्स देना होगा. यहां एक बात ध्यान रखने की है कि अगर आपको पास तीन घर हैं तो आपको तीसरे घर का कोई फायदा नहीं मिलेगा. उस पर तो अनुमानित किराए के हिसाब से टैक्स देना ही होगा. अब अगर ऐसे लोगों की गिनती करें, जिनके पास एक से अधिक घर हैं तो ऐसे लोग बेहद कम ही मिलेंगे. यानी बजट में एक घोषणा भी हो गई और उसकी वजह से सरकार को वित्त का नुकसान भी लगभग ना के बराबर होगा. इसे ही कहते हैं 'स्मार्ट मूव'.

ग्रेच्युटी भुगतान की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 20 लाख?

अपने बजट भाषण में पियूष गोयल ने ग्रेच्युटी का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि ग्रेच्युटी भुगतान की अधिकतम सीमा को 10 लाख रुपए से बढ़ाकर 20 लाख रुपए किया गया. बहुत से लोगों को ये लग रहा है कि यह प्रस्ताव इसी बजट में किया गया है, जबकि ऐसा नहीं है. मोदी सरकार ने 29 मार्च 2018 से ही ग्रेच्युटी भुगतान (संशोधन) अधिनियम, 2018 लागू कर दिया था. यानी इस साल के बजट में इसका जिक्र करने की भी कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि ये तो पिछले वित्त वर्ष की बात है. इसके तहत 20 लाख रुपए तक की ग्रेच्युटी का भुगतान टैक्स के दायरे से बाहर हो गया था. तो इस बार के बजट में ये प्रस्ताव नहीं किया गया है, बल्कि ये पहले ही पारित हो चुका है. पियूष गोयल ने सिर्फ इसका जिक्र किया.

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