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Updated: 23 मार्च, 2021 01:57 PM
मृगांक शेखर
मृगांक शेखर
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मुकेश अंबानी के एंटीलिया बंगले के बाहर तो विस्फोटकों से भरी एक गाड़ी ही मिली थी, धमाका तो अब हुआ है. मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह (Parmveer Singh) की चिट्ठी की चिट्ठी से - और इसके सामने तो कंगना रनौत के मुंबई पुलिस को लेकर दिये PoK वाला बयान भी फीका लगने लगा है.

परमबीर सिंह ने अपनी चिट्ठी में महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) पर भ्रष्टाचार के अत्यंत गंभीर आरोप लगाये हैं - निलंबित और NIA की कस्टडी में चल रहे API सचिन वाजे के जरिये हर महीने 100 करोड़ की वसूली का.

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) को हफ्ते भर के भीतर महाराष्ट्र के दो-दो सीनियर मोस्ट अफसरों की चिट्ठियां मिली हैं - चिट्ठी लिखने के हिसाब से परमवीर सिंह दूसरे आईपीएस अफसर हैं, जबकि पहले हैं संजय पांडे.

संजय पांडे की जगह ही परमबीर सिंह डीजी होमगार्ड बनाये गये हैं. परमबीर सिंह को डीजी होमगार्ड बनाये जाने के साथ ही संजय पांडे को महाराष्ट्र स्टेट सिक्योरिटी कॉरपोरेशन का प्रमुख बना दिया गया है. संजय पांडे ने उद्धव ठाकरे को लिखी चिट्ठी में कॅरियर खत्म करने का इल्जाम लगाया है.

उद्धव ठाकरे को लिखे अपने शिकायती पत्र में संजय पांडे ने कहा है कि वो चाहते तो अपने कार्यकाल में ऐसी गलतियां सुधार सकते थे, लेकिन उनको पहले की ही तरह नजरअंदाज किया गया. संजय पांडे की शिकायत है कि राज्य के सबसे वरिष्ठ पुलिस अफसर हैं लेकिन उस हिसाब से उनको कार्यभार नहीं दिया जाता रहा है.

लेकिन परमबीर सिंह का पत्र ऐसी किसी निजी शिकायत की जगह उनके तबादले पर अनिल देशमुख के बयान पर पलटवार लगता है. गृह मंत्री अनिल देशमुख ने परमबीर सिंह के तबादले को अफसर की गंभीर किस्म की गलतियों के खिलाफ पॉलिटिकल एक्शन के तौर पर पेश किया था.

परमबीर सिंह के आरोपों पर अनिल देशमुख का भी बयान आ चुका है - और वो पुलिस अफसर पर जांच से बचने के लिए झूठ बोलने का आरोप लगा रहे हैं. परमबीर सिंह का पत्र सामने आने से करीब 24 घंटे पहले ही अनिल देशमुख अपने नेता एनसीपी प्रमुख शरद पवार से भी दिल्ली पहुंच कर मुलाकात कर चुके हैं.

परमबीर सिंह ने मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को पत्र ऐसे दौर में लिखा है जब पहले से ही अनिल देशमुख को हटाये जाने की जोरदार चर्चा चल रही है - एंटीलिया केस में सचिन वाजे के एनआईए के हत्थे चढ़ने के बाद मुश्किलों से घिरे उद्धव ठाकरे के सामने ये नयी मुसीबत है.

विपक्ष के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस जो बातें अब तक इशारों में कह रहे थे, ऐसा लगता है उनके रुझान आने लगे हैं - लेकिन देवेंद्र फडणवीस जो आरोप लगा रहे थे, उससे मामला थोड़ा अलग लगता है. देवेंद्र फडणवीस ने दावा किया था कि सचिन वाजे शिवसेना का एटेंज था, लेकिन परमबीर सिंह की चिट्ठी से तो ये मामला एनसीपी खेमे में चला गया है.

झूठ कौन बोल रहा है?

चार साल पहले कपिल मिश्रा ने दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगाये थे, लेकिन किसी को यकीन नहीं हुआ. योगेंद्र यादव को भी यकीन नहीं हुआ जिन्हें अरविंद केजरीवाल ने आम आदमी पार्टी से निकाल बाहर किया था - और कुमार विश्वास को भी नहीं जिनका कपिल मिश्रा के पीछे हाथ माना जा रहा था. कुल मिला कर अरविंद केजरीवाल की इमानदारी की विश्वसनीयत के आगे कपिल मिश्रा का आरोप न बिकाऊ रहा न कुछ देर के लिए भी टिकाऊ साबित हुआ.

अरविंद केजरीवाल के मामले में तो उनके सबसे करीबी साथी मनीष सिसोदिया ने मीडिया के सामने आकर आरोपों को टिप्पणी करने लायक भी नहीं बताया था, लेकिन अनिल देशमुख को खुद ही अपनी सफाई भी पेश करनी पड़ रही है. अनिल देशमुख ने एक ट्वीट में परमबीर सिंह पर जांच से बचने के लिए झूठ बोलने का आरोप लगाया है.

parambir singh, anil deshmukhसच कौन बोल रहा है?

महाराष्ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने ट्विटर पर जो पहला रिएक्शन दिया है, उसमें लिखा है, 'पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने खुद को बचाने के लिए झूठे आरोप लगाये हैं क्योंकि मुकेश अंबानी और मनसुख हिरेन के मामले में अब तक हुई जांच से साफ है कि सचिन वाजे शामिल हैं - और इसके तार परमबीर सिंह से भी जुड़ रहे हैं.'

आईपीएस अफसर परमबीर सिंह के मुताबिक, एंटीलिया केस में NIA की हिरासत में चल रहे निलंबित API सचिन वाजे ने ही उनको सारी बातें बतायी थी.

परमबीर सिंह के आरोप के मुताबिक, अनिल देशमुख ने अपने आवास ध्यानेश्वर बुलाकर सचिन वाजे को मुंबई के बीयर बार और रेस्‍तरां से हर महीने 100 करोड़ रुपये वसूलने का टारगेट दिया था.

अब अगर अनिल देशमुख के ट्वीट के अनुसार, ये मान भी लें कि परमबीर सिंह जांच से बचने के लिए झूठ बोल रहे हैं तो सवाल ये उठता है कि क्या ये संभव है कि परमवीर सिंह ये चिट्ठी लिख कर जांच से बच सकते हैं?

परमबीर सिंह ने ये चिट्ठी भी अपने तबादले को लेकर कोई फौरी प्रतिक्रिया में नहीं लिखी है - ये सब तब लिखा है जब अनिल देशमुख ने आईपीएस अफसर के तबादले पर टिप्पणी की है.

अनिल देशमुख ने लोकमत के एक कार्यक्रम में कहा था कि मुंबई पुलिस कमिश्नर के मातहत अधिकारी ने गंभीर गलतियां की हैं, ऐसी गलतियों की माफी नहीं दी जा सकती - और पुलिस कमिश्नर के तबादले का कारण भी यही है. अनिल देशमुख ने कहा था कि ये कोई रूटीन तबादला नहीं है, जांच जारी है और जो सामने आएगा उसके हिसाब से एक्शन लिया जाएगा.

मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को लिखी चिट्ठी के जरिये पुलिस अफसर ने ये बताने की कोशिश की है कि तबादले को लेकर झूठ बोला जा रहा है जबकि सच तो कुछ और ही है.

चिट्ठी के मुताबिक परमबीर सिंह ने ऐसी कई बातें और तमाम तरह की गड़बड़ियों की तरफ ब्रीफिंग में उद्धव ठाकरे का ध्यान तो खींचा ही है, एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कई सीनियर मंत्री भी ऐसी चीजों से वाकिफ हैं. परमबीर सिंह का दावा है कि चिट्ठी में लिखी कई चीजों से तो सरकार के कुछ मंत्री भी पहले से ही काफी बातें जानते हैं.

बड़ी बात ये है कि परमबीर सिंह ने चिट्ठी में अपने मातहत काम कर चुके कई अफसरों का भी नाम लेकर जिक्र किया है - चैट भी तारीख और समय के साथ पेश किया है. सचिन वाजे के हवाले से ही सही, ये भी बताया है कि जब गृह मंत्री अनिल देशमुख पुलिस अफसर सचिन वाजे को तमाम स्रोतों से हर महीने 100 करोड़ की वसूली का टारगेट दे रहे थे तो उनके निजी सचिव पालंदे भी मौके पर मौजूद थे.

जिलेटिन की छड़ों से भी ज्यादा विस्फोटक!

एंटीलिया केस और उसके बाद मनसुख हिरेन की मौत को लेकर शुरू से ही सवाल खड़े करने वाले पूर्व मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने परमबीर सिंह के इस खुलासे को जिलेटिन की छड़ों से भी कहीं ज्‍यादा विस्‍फोटक बताया है. देवेंद्र फडणवीस ने अनिल देशमुख को गृह मंत्री के पद से तत्‍काल प्रभाव से हटाने के साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की उद्धव ठाकरे सरकार से मांग की है.

अनिल देशमुख की कुर्सी पर खतरा तो पहले से ही मंडरा रहा है. खबर तो ये भी रही कि एनआईए की पूछताछ करने की स्थिति में ज्यादा फजीहत न हो इसलिए बचने के मकसद से ही परमबीर सिंह को भी मुंबई पुलिस कमिश्नर के पद से हटाया गया. सचिन वाजे उनको ही रिपोर्ट करते थे, लिहाजा उनकी करतूतों के लिए वो व्यवस्था के तहत जिम्मेदारी तो परमबीर सिंह की बनती ही है.

कुछ मीडिया रिपोर्ट से ये भी पता चला था कि शरद पवार भी पूरे प्रकरण से निकलने का कोई रास्ता खोज रहे थे. ये भी बताया गया कि वो खुद भी अनिल देशमुख को मंत्री बनाये रखने के पक्ष में नहीं हैं, लेकिन हटाने के बाद पार्टी की छवि को लेकर उनकी चिंता है. ऐसे में एक रास्ता तो यही बचता है कि सब कुछ अफसरों के मत्थे मढ़ कर राजनीतिक नेतृत्व पीछा छुड़ा ले.

अभी ये सोच विचार चल ही रहा था कि परमबीर सिंह ने 'हम तो डूबेंगे सनम तुमको भी ले डूबेंगे' वाली स्टाइल में 8 पेज की चिट्ठी लिख कर सारी गड़बड़ियों का सिलसिलेवार ब्योरा ही सार्वजनिक कर दिया है. परमबीर सिंह ने एक चिट्ठी लिख कर अपने साथ साथ अपने साथी अफसरों के भी अलग अलग शिकार किये जाने से बचा लिया है - अब तो जो होगा सबके साथ होगा, वरना नहीं होगा.

केस को लेकर बीजेपी तो पहले से ही उद्धव ठाकरे सरकार पर हमलावर रही, परमबीर सिंह की चिट्ठी के बाद तो हद से ज्यादा आक्रामक हो गयी है. देवेंद्र फडणवीस के साथ साथ महाराष्ट्र बीजेपी के बाकी नेता भी मोर्चे पर आ डटे हैं. देवेंद्र फडणवीस कहते हैं, 'इस मामले में डीजी स्तर के एक पुलिस अधिकारी ने गृह मंत्री के विरुद्ध ऐसे आरोप लगाये हैं... पत्र के साथ व्हॉट्सऐप और एसएमएस चैट के सबूत भी पेश किये गये हैं - इसलिए ये मामला गंभीर है.'

जुझारू, सीनियर और ऐसे मामलों में हमेशा ही सक्रिय रहने वाले बीजेपी नेता किरीट सोमैया याद दिला रहे हैं, मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्‍नर ने कहा है कि मुंबई में जबरन वसूली चल रही थी और सचिन वाजे गृह मंत्री के एजेंट थे - बीयर बार और बाकी जगहों से पैसे वसूले जा रहे थे.

बीजेपी नेता राम कदम तो लंबा चौड़ा ब्योरा ही पेश कर देते हैं, '16 महीने से महाराष्ट्र में उद्धव ठाकरे की सरकार है... हर महीने 100 करोड़ के हिसाब से 1600 करोड़ रुपये हो गये. कई जिले और कई शहर हैं... वहां से भी कई करोड़ रुपये के लिए कहा गया होगा... पुलिस तो एक डिपार्टमेंट है - 22 विभाग हैं तो क्या हर मंत्री ने अपने विभागों को वसूली करने के आदेश दिये हैं?

बीजेपी सांसद मनोज कोटक की तो अलग ही डिमांड है, 'चिट्ठी से ये सच सामने आया है - इसलिए अनिल देशमुख, परमबीर सिंह और सचिन वाजे तीनों का नार्को टेस्ट होना चाहिये.'

पूरी सच्चाई तो अब जांच के बाद ही सामने आनी चाहिये, बशर्ते जांच के नाम पर खानापूर्ति न हो. तब तक ये भी देखना होगा कि परमबीर सिंह ने अपनी चिट्ठी में जिन अफसरों का जिक्र किया है, वे यूं ही खामोश रहते हैं, सामने आते हैं या फिर परमबीर सिंह के दावों पर ही सवाल उठाते हैं?

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लेखक

मृगांक शेखर मृगांक शेखर @mstalkieshindi

जीने के लिए खुशी - और जीने देने के लिए पत्रकारिता बेमिसाल लगे, सो - अपना लिया - एक रोटी तो दूसरा रोजी बन गया. तभी से शब्दों को महसूस कर सकूं और सही मायने में तरतीबवार रख पाऊं - बस, इतनी सी कोशिश रहती है.

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