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Updated: 10 जनवरी, 2020 08:41 PM
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JNU में 5 जनवरी को हुई हिंसा (JNU Violence) की जांच कर रही दिल्ली पुलिस (Delhi Police Probe Questionable) ने 9 तस्वीरें जारी की है - एक तस्वीर JNUSU अध्यक्ष आइशी घोष (Aishe Ghosh) की भी है.

आइशी घोष को भी उसी दिन चोट लगी थी और जख्मी हालत में उनकी तस्वीर वायरल हुई जिसमें खून बहते दिखा था. हिंसा को लेकर जो जानकारी आई थी उसके मुताबिक करीब तीन दर्जन छात्र घायल हुए थे और उनका दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल और एम्स में इलाज हुआ - बाद में छुट्टी दे दी गयी.

ये हिंसा कुछ नकाबपोश हमलावरों ने की जिनमें बाहरी लोग बताये गये. बाद में खुद को हिंदूवादी नेता बताते हुए एक शख्स ने हमले की जिम्मेदारी भी ली थी.

दिल्ली पुलिस की प्रेस कांफ्रेंस के बाद आइशी घोष और ABVP की तरफ से भी प्रेस कांफ्रेंस हुई है - और सभी ने अपना अपना पक्ष रखा है.

आइशी घोष का आरोप है कि दिल्ली पुलिस उन्हें भी ठीक वैसे ही फ्रेम करने की कोशिश कर रही है, जैसे पहले कन्हैया कुमार को फंसाया गया. हालांकि, आइशी घोष का कहना है कि उन्हें कानून पर भरोसा है और वो डर नहीं रही हैं.

हाल फिलहाल दिल्ली पुलिस का एक्शन भी सवालों के घेरे में रहा है - लेकिन सवाल ये है कि आइशी घोष को क्यों लगता है कि उन्हें फंसाने की कोशिश हो रही है?

क्या आइशी घोष को फंसाया जा रहा है

दिल्ली पुलिस की प्रेस कांफ्रेंस के बाद आइशी घोष ने कहा - 'हम कानून के साथ खड़े होंगे और शांति और लोकतांत्रिक तरीके से अपने आंदोलन को आगे बढ़ाएंगे.'

आइशी घोष ये तो कहती हैं कि कानून-व्यवस्था पर पूरा भरोसा है कि जांच निष्पक्ष होगी और न्याय भी मिलेगा, लेकिन उनकी शिकायतें भी हैं - 'दिल्ली पुलिस पक्षपात क्यों कर रही है? मेरी शिकायत एफआईआर के रूप में दर्ज नहीं की गई है.'

1. आइशी घोष का कहना है कि एक तरह से हमारे ऊपर ही आरोप मढ़ने की कोशिश की जा रही है.

2. आइशी घोष का भी दावा है कि उनके पास भी सबूत है.

3. आइशी घोष का सवाल है - 'ऐसा कोई विडियो है जिसमें मैं रॉड या लाठी लेकर खड़ी दिख रही हूं?'

जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष ने कहा, 'हमने कुछ भी गलत नहीं किया है. हम दिल्ली पुलिस से नहीं डरते.' साथ ही वो ये भी कहती हैं कि पहले कन्हैया कुमार को फंसाने की कोशिश की गयी और अब ऐसी ही कोशिश उनके साथ भी हो रही है.

दिल्ली पुलिस के दावे में लोचा भी है

दिल्ली पुलिस ने बताया कि हिंसा को लेकर तीन केस दर्ज किये गये हैं और SIT उसकी जांच कर रही है. पुलिस ने ये भी बताया जांच आगे बढ़ाने से पहले उसे मीडिया के सामने इसलिए आना पड़ा क्योंकि तरह तरह की बातें फैलायी जा रही थीं.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच के डीसीपी जॉय टिर्की बताया कि जिनकी पहचान हुई है, वे हैं - चुनचुन कुमार, पंकज मिश्रा, योगेंद्र भारद्वाज, प्रिया रंजन, विकास पटेल, डोलन, आइशी घोष.

aishe ghosh photo by delhi policeदिल्ली पुलिस की भूमिका फिर सवालों के घेरे में

प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली पुलिस का कहना रहा कि किसी भी संदिग्ध को हिरासत में नहीं लिया गया है, लेकिन जल्द ही पूछताछ शुरू की जा सकती है. पुलिस के मुताबिक अंजाम देने के लिए हिंसा के वक्त ही व्हाट्सऐप ग्रुप बनाया गया था और नौ संदिग्धों में से एक उसका एडमिन भी है.

फिर भी कुछ सवाल हैं जो दिल्ली पुलिस के दावों के बीच से ही निकल कर आ रहे हैं - और वे ही पुलिस के दावों की पोल भी खोल सकते हैं.

1. वायरल वीडियो से जांच: दिल्ली पुलिस का ही कहना है कि हिंसा के सीसीटीवी फुटेज नहीं मिले हैं. पुलिस के मुताबिक, वायरल वीडियो के जरिये आरोपियों की पहचान की गयी है. पुलिस का ये भी कहना है कि घटना के सिलसिले में 30-32 गवाहों से भी बातचीत की गयी है.

क्या शानदार जांच है - वायरल वीडियो के आधार पर संदिग्धों की सूची बना दी गयी है. गजब है जिस वीडियो के ही सही होने का कोई आधार नहीं वो जांच का सबसे बड़ा आधार बन रहा है.

कन्हैया कुमार के केस में भी दिल्ली पुलिस ने ऐसे ही वायरल वीडियो के आधार पर केस तैयार किया था - और आज तक दिल्ली पुलिस को वो वीडियो नहीं मिला जिसे वो कन्हैया कुमार के खिलाफ बतौर सबूत पेश कर सके.

अब अगर आइशी घोष कहती हैं कि कन्हैया कुमार की तरह ही फिर से एक छात्रसंघ अध्यक्ष को फ्रेम करने की कोशिश हो रही है तो दिल्ली पुलिस की भूमिका पर सवाल तो उठेंगे ही.

2. सिर्फ लेफ्ट संगठन क्यों: दिल्ली पुलिस का दावा है कि लेफ्ट से जुड़े 4 संगठनों ने पेरियार हॉस्टल में छात्रों पर हमला किया और उसमें आइशी घोष भी शामिल थीं. हमलावरों के मुंह ढके हुए थे और कुछ को चिह्नित किया गया है.

सबसे ज्यादा हैरान करने वाली बात ये लगी कि डीसीपी टिर्की के साथ प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद मनदीप रंधावा स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया को स्टूडेंट्स फ्रंट ऑफ इंडिया बता रहे थे - और ऐसा कई बार हुआ.

ये दावा तो प्रेस कांफ्रेंस में ही हवा हवाई साबित हो गया - अदालत में इसका क्या होगा? मालूम नहीं डीसीपी बचाव पक्ष के वकीलों को कैसे समझाएंगे कि वो संगठन का नाम ले रहे थे वो एक नहीं अलग अलग है. अगर ऐसा हुआ तो नये संगठन को लेकर दस्तावेज भी पेश करने होंगे.

जिस अफसर को संगठन का नाम तक सही नहीं मालूम उससे सही जांच की कितनी अपेक्षा की जा सकती है?

3. दूसरा गुट गायब क्यों: अब तक सुनने में आ रहा था कि कैंपस में छात्रों के दो गुटों के बीच मारपीट हुई थी - लेकिन पुलिस की मानें तो सिर्फ लेफ्ट संगठनों के छात्रों ने हमला किया था. पुलिस ने ये क्यों नहीं बताया कि दूसरा गुट क्या कर रहा था या उसका नाम क्या है?

फिर तो पुलिस को ये भी साबित करना होगा कि लेफ्ट संगठनों के छात्रों ने ही आइशी का भी सिर फोड़ दिया - सवाल तो ये भी है कि आइशी का सिर फूटा उसके बाद हमले कर रही थीं या पहले?

4. हमलावर बाहरी नहीं तो नकाबपोश कौन: दिल्ली पुलिस का ये भी मानना है कि नकाबपोश हमलावर कैंपस से अच्छी तरह परिचित थे. दलील ये कि अगर कोई बाहरी होता तो वो इतनी आसानी से एक हॉस्टल से दूसरे हॉस्टल नहीं जा पाता - क्योंकि कोई भी बाहरी सभी रास्तों से परिचित नहीं होता. फिर वो शख्स कौन है जिसने वीडियो मैसेज जारी कर जेएनयू में नकाबपोशों के हमले की जिम्मेदारी ली है - क्या पुलिस ने उसके बारे में जानने की जहमत नहीं उठायी. आखिर वायरल तो उसका भी वीडियो हुआ ही है.

5. शाम की तस्वीरें क्यों नहीं: दिल्ली पुलिस ने जो भी तस्वीरें जारी की है - सब की सब दिन में ली गयी मालूम पड़ती हैं, बशर्ते उसे फोटोशॉप ट्रीटमेंट न दी गयी हो. साबरमती हॉस्टल में जो हमला हुआ था वो शाम की घटना है और नकाबपोशों की तस्वीरें वहीं की वायरल हुई हैं.

पुलिस ने नकाबपोशों की तस्वीरें वायरल होने के बावजूद न तो उसके बारे में कुछ बताया और न ही अभी तक वे जांच का हिस्सा लगती हैं.

सबसे बड़ी बात प्रेस कांफ्रेंस के बाद दोनों पुलिस अफसर तेजी से उठे और अपनी गाड़ी की तरफ बढ़ गये - मीडिया के सवालों के जवाब देने से भी मना कर दिया.

दिल्ली पुलिस की भूमिका पर कन्हैया कुमार के मामले में भी सवाल उठे थे - और हाल फिलहाल जामिया उपद्रव और JNU हिंसा में भी अलग अलग व्यवहार को लेकर कठघरे में खड़ा किया गया है.

दिल्ली पुलिस के कामकाज पर मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की भी टिप्पणी आयी है. कभी दिल्ली के पुलिसवालों को ठुल्ला करार देने वाले केजरीवाल ने कहा है कि पुलिस के कामकाज में कोई कमी नहीं है - क्योंकि वो वही कर रही है जो उसे ऊपर से आदेश मिल रहे हैं. दिल्ली पुलिस ऐसा बोल कर गृह मंत्री अमित शाह को टारगेट करते हैं. दरअसल, दिल्ली पुलिस मुख्यमंत्री को नहीं बल्कि केंद्रीय गृह मंत्री को रिपोर्ट करती है - और केजरीवाल की पुरानी मांग रही है कि दिल्ली पुलिस को उनके कंट्रोल में दे दिया जाये तो राजधानी की कानून व्यवस्था सुधार देंगे.

जेएनयू हिंसा की जांच को लेकर भी दिल्ली पुलिस के दावे सच तभी माने जाएंगे जब अदालत में भी सारी पड़ताल सही साबित हो - वरना, ये सब भी बिलकुल वैसे ही है जैसे हैदराबाद पुलिस ने गैंग रेप के आरोपियों का एनकाउंटर कर दिया था और उसकी जांच हो रही है.

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Delhi Police Probe Questionable, JNU Violence, Delhi Police Probe Questionable

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