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Updated: 16 नवम्बर, 2020 08:54 PM
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पूर्व में 2014 फिर 19 कांग्रेस पार्टी (Congress Party) की तरफ से राहुल गांधी ने खूब मेहनत की. चौकीदार चोर है से लेकर राफेल, बेरोजगारी, किसान, चीन पाकिस्तान  तक तकरीबन हर मुद्दे को उठाया लेकिन जो देश की जनता का रुख था, मानों उसने पहले ही ठान लिया था कि उसे क्या करना है. कांग्रेस को करारी शिकस्त मिली. 14 के आम चुनावों से लेकर अब तक कांग्रेस की स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हुआ ह बल्कि स्थिति आए रोज़ बद से बदतर है. कांग्रेस को लोग किस हद तक नापसंद कर रहे हैं? गर जो इस बात का अवलोकन करना हो तो हम हालिया बिहार चुनावों (Bihar Elections) का अवलोकन कर सकते हैं जिसे लेकर वरिष्ठ कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने कहा है कि लोग कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मानते. पार्टी को आत्मनिरीक्षण की ज़रूरत है.

अंग्रेजी अखबार 'इंडियन एक्सप्रेस' से हुई विशेष बातचीत में बिहार चुनावों में कांग्रेस की परफॉरमेंस को लेकर सिब्बल ने अपना मत प्रकट किया है. सिब्बल ने कहा है कि देश के लोग न केवल बिहार में, बल्कि जहां भी उपचुनाव हुए, जाहिर तौर पर कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मानते. यह एक निष्कर्ष है. सिब्बल का कहना है कि बिहार में एनडीए का विकल्प आरजेडी ही थी.

बिहार में विधानसभा चुनावों में जो सियासी उठा पटक देखने को मिली उसपर अपनी राय देते हुए सिब्बल ये भी बोलें हैं कि बिहार में जाहिर तौर पर एनडीए के बाद आरजेडी दूसरे नंबर की पार्टी थी. कांग्रेस का प्रदर्शन बहुत अच्छा नहीं कहा जा सकता, लेकिन पार्टी नेतृत्व का मानना है कि चुनाव में हार से पार्टी का काम नहीं रुकना चाहिए. मुझे उम्मीद है कि कांग्रेस बिहार में मिली हार पर आत्मनिरीक्षण करेगी.

Congress, Bihar Election, Bihar, Kapil Sibal, Rahul Gandhi, Sonia Gandhiअपनी बातों से कपिल सिब्बल ने कांग्रेस को मुसीबत में डाल दिया है

पूर्व में हुए चुनावों और जिस तरह जनता ने कांग्रेस से कन्नी काटी है उस पर तर्क देते हुए सिब्बल का ये भी कहना है कि देश के लोग न केवल बिहार में, बल्कि जहां भी उपचुनाव हुए, जाहिर तौर पर कांग्रेस को एक प्रभावी विकल्प नहीं मानते. यह एक निष्कर्ष है. आखिर बिहार में एनडीए का विकल्प आरजेडी ही थी.

गुजरात का जिक्र करते हुए सिब्बल ने कहा कि हम गुजरात में सभी उपचुनाव हार गए. लोकसभा चुनाव में भी हमने वहां एक भी सीट नहीं जीती थी. उत्तर प्रदेश के कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में हुए उपचुनावों में कांग्रेस के उम्मीदवारों ने 2% से भी कम वोट हासिल किए. गुजरात में हमारे तीन उम्मीदवारों ने अपनी जमानत खो दी.

बातचीत में जैसे तेवर सिब्बल के हैं उससे इतना तो साफ है कि अब कांग्रेस पार्टी में आत्मचिंतन के लिए भी समय ख़त्म हो गया है. जैसे हालात और जैसा समय है कांग्रेस को कई स्तर पर बिगड़ी हुई चीजों को ठीक करना है.

चुनावों विशेषकर बिहार विधानसभा चुनावों में जैसी परफॉरमेंस पार्टी की रही ये भी साफ है कि पार्टी कमजोर हो गई है. ऐसा क्यों हुआ? इसकी एक बड़ी वजह जहां एक तरफ पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी हैं तो वहीं नेतृत्व का आभाव भी एक बड़ी वजह के तौर पर देखा जा सकता है.

पार्टी नेतृत्व द्वारा बिहार में पराजय को हमेशा की तरह सामान्य बात मानने के सवाल पर सिब्बल ने कहा, मैंने ऐसा कुछ नहीं सुना है कि पार्टी नेतृत्व ने मुझे कुछ कहा है. मैं इस बारे में नहीं जानता. मैं केवल उन आवाजों को सुनता हूं जिन्होंने पार्टी नेतृत्व को घेर रखा है. हमें बिहार या एमपी-गुजरात के उपचुनाव को लेकर अभी भी कांग्रेस पार्टी की ओर से अपनी राय रखे जाने का इंतजार है. हो सकता है कि उन्हें लगता हो कि सब कुछ सही चल रहा है और इसे हमेशा की तरह एक सामान्य घटना माना जा रहा हो.

बरहहाल अब जबकि हम बिहार विधानसभा चुनावों में कांग्रेस की परफॉरमेंस और उस पर सिब्बल के तीखे तेवर देख चुके हैं. ये खुद में साफ़ है कि इसकी एक बड़ी वजह लीडरशिप में आभाव है. कांग्रेस पार्टी को समझना चाहिए कि अब वो वक़्त आ गया है जब राहुल गांधी को पार्टी से अलग हो जाना चाहिए. पार्टी तभी आगे बढ़ सकती है जब कुछ दिन राहुल गांधी पार्टी और उसकी नीतियों से खुद को दूर रखें.

वहीं राहुल गांधी को भी समझना होगा कि यदि देश भर में पार्टी की इतनी दुर्गति हो रही है तो उसकी एकमात्र वजह वो खुद हैं. बाकी बात सिब्बल की हुई है तो कम  ही देखने को मिला है कि नेता सच बोलते हैं लेकिन इस बार सिब्बल ने सच बोला है जो पार्टी में कई पुरोधाओं के लिए चिंता का सबब बनेगा.

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