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Updated: 07 अक्टूबर, 2016 08:27 PM
मोहम्मद वक़ास
मोहम्मद वक़ास
  @mohammad.waqas.1401
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यह कहानी पुरानी नहीं है. एक पड़ोसी ने दूसरे की रोज-रोज की टंटेबाजी, गुंडई और दहशतगर्दाना हरकतों से आजिज आकर उसके घर में घुसकर पीट दिया. यह काम रात के अंधेरे में किया गया. इसे उस चौकीदार ने भी नहीं देखा, जिससे इलाके की निगरानी की उम्मीद की जाती है. खैर, अगले दिन पड़ोसी ने ईमानदारी से बता दिया कि उसने दूसरे की धुनाई कर दी है. लेकिन पिटने वाले पड़ोसी ने कहा कि ऐसा कुछ नहीं हुआ है. इसे आप क्या कहेंगे? क्या यह झगड़े को आगे न बढ़ाने का एक तरीका है? क्या यह दो पड़ोसियों के आपस में मिलकर रहने की इच्छा का संकेत है? क्या यह दो भाइयों के बीच मारपीट का मामला नहीं लगता, जिसे दुनियावाले सुनकर भी अनुसना करते लग रहे हैं कि इनके मामले में कौन पड़े?

दरअसल, ये दोनों पड़ोसी मूलत: एक ही वृहत्तर परिवार के हैं. दोनों भाइयों में बंटवारे के समय से ही जमीन को लेकर यह झगड़ा बरकरार है. छिटपुट झड़पें तो होती ही रहती हैं, अब तक चार बार बड़ी लड़ाई हो चुकी हैं, जिसमें दोनों खानदानों का नुक्सान हुआ है. एक जंग में तो पड़ोसी का घर ही बंट गया और एक नया घर बन गया, जो उसके जुल्मो-सितम की वजह से उतनी ही नफरत करता है,जितना बड़े भाई के परिवारवाले करते हैं. बड़े भाई को मालूम है कि वह पड़ोसी बदल नहीं सकता लिहाजा उसको दुनिया के लिए अछूत बना देना और उसके घर में फूट डालकर घर का और बंटवारा करवाना ही बेहतर रहेगा. इस तरह यह कमजोर होकर अपनी हद में ही रहेगा. अब तक इसी नीति पर काम किया जा रहा था और अब भी जारी है. कभी-कभी अति होने पर बड़ा भाई चुपके से उसकी ठुकाई भी करता रहा है, लेकिन कभी सार्वजनिक नहीं किया.

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चूंकि दोनों एक ही वृहत्तर परिवार के हैं. दोनों के खानपान, भाषा-बोली, मान्यताएं या यूं कहें कि सभ्यता-संस्कृति साझी है, इसलिए उनके बीच एक तरह का प्यार-नफरत का रिश्ता स्वाभाविक है. लेकिन बड़े भाई के घर के कुछ सदस्य थोड़े गर्म स्वभाव के हैं, जो पड़ोसी की हरकतों का मुंहतोड़ जवाब देने के समर्थक हैं. उनका मुखिया पैर उचका-उचकाकर घर के मुखिया को ताने देता था कि पड़ोसी को उसी की भाषा में समझाना चाहिए. उनके समर्थक उनके वादे की व्याख्या यहां तक कर देते हैं कि वे पड़ोसी को ऐसे उजाड़ेंगे कि दुनिया में उसका नामो-निशान तक नहीं बचेगा. पिछले चुनाव में उन्होंने उस शख्स को घर का मुखिया चुन लिया.

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 भारत पाकिस्तान संबंधों में दुश्मनी खानदानी है

बड़े भाई के घर का माहौल बदल गया. लोग खुश हो गए कि खानदान की पुरानी शानो-शौकत और खुशहाली फिर लौट आएगी. घर के मुखिया ने मुहल्लेभर में घूम-घूमकर अपनी पुरानी रवायतों को फिर जिंदा करने और दूसरे परिवारों से दोस्ती बढ़ाने की मुहिम शुरू की. उसने उन परिवारों को अपने पक्ष में कर लिया, जो उसके पड़ोसी के हिमायती रहे थे. पड़ोसी के घर में बहस होने लगी कि अगर हम लोगों की यही हरकत रही तो हम सचमुच अलग-थलग पड़ जाएंगे, हमारा हुक्का-पानी बंद हो जाएगा. हालांकि उसके पक्ष में भी एक एक-दो मजबूत परिवार खड़े हो गए.

यहां यह भी बताते चलें कि मुहल्ले में एक दूसरा रसूखदार खानदान भी है. उसके घर में काफी लोग हैं और इतने बड़े परिवार का पेट पालने के लिए उसे काफी सामान की जरूरत होती है. लेकिन मुहल्ले और शहर से सामान लाने-ले जाने के लिए बहुत लंबा रास्ता अपनाना होता है. उसने छोटे भाई के घर वालों को प्रस्ताव दिया कि वह उसके इलाके में साफ-सुथरी सडक़ बनाएगा, मेट्रो रेल बनाएगा. तरह-तरह कल-कारखाने खोलेगा, बिजली पैदा करेगा, जिससे उसके लोगों को रोजगार मिलेगा और खुशहाली आएगी. इससे उसे मुहल्ले और शहर में जाने-आने का रास्ता मिल जाएगा साथ ही उसका धंधा भी चमक जाएगा. बड़े भाई से निबटने का अच्छा मौका देखकर छोटे भाई ने ऐसी जगह पर भी काम शुरू करवा दिया जिसका बंटवारा विवादित है. दोनों भाई उस पर अपना हक जताते हैं. इस तरह छोटे भाई के परिवार ने इस मामले में मुहल्ले के एक दबंग को शामिल कर लिया. उस दबंग के साथ बड़े भाई के परिवार की नहीं बनती क्योंकि दोनों के घर की सरहद दुनिया की सबसे लंबी विवादित सरहद है और इसको लेकर दोनों के बीच 1962 में जंग हो चुकी है.

इस पूरे मामले को भाइयों का झगड़ा कहना इसलिए मुनासिब है कि इस तरह के झगड़े केवल भाइयों में ही हो सकते हैं. दोनों शक्ल से एक जैसे नजर आते हैं, एक जैसी भाषा-बोली बोलते हैं, एक दूसरे के साहित्य, पहनावे, खान-पान, रहन-सहन के तरीकों को सराहते-कोसते हैं. दबंग पड़ोसी से उसका ऐसा कुछ नहीं मिलता. वह अगर घर की सरहद भी पार कर लेता है तो बड़े भाई के घर में कोई चूं-चपड़ नहीं करता. उसकी कुटाई करने से कतराता है. लेकिन छोटे भाई की तो ऐसे करता है जैसे उसे सुधारकर, रास्ते पर लाकर ही दम लेगा. लेकिन छोटे भाई का परिवार उसे सुधरने नहीं दे रहा है, मानो उसे यही मलाल है. उसे अब भी लगता है कि छोटा भाई सुधर जाए तो यह वृहत्तर परिवार दबंग तो क्या शहर के किसी भी खानदान को शानो-शौकत, इशरत में काफी पीछे छोड़ देगा.

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लेकिन छोटे भाई के खानदान में आम लोगों की राय को अक्सर नजरअंदाज करने की रवायत रही है. घर की हिफाजत करने वाले हमेशा हावी रहे हैं. इन मुहाफिजों ने घर के लोगों में इतनी पैठ बना रखी है कि उन्हीं की वजह से यह घर महफूज है. यही वजह है कि जब पिछले दिनों बड़े भाई ने उसे रात के अंधेरे में पीटा तो उसने साफ तौर पर कह दिया कि उसकी कोई पिटाई-विटाई नहीं हुई, झगड़ा हुआ है जिसमें बड़े भाई के लोग भी मार खाए हैं. दूसरी ओर, बड़े भाई के घर के मुखिया के समर्थक फूले नहीं समा रहे कि शरारती छोटू को कंबल ओढ़ाकर पीटा है.

बड़े भाई के घर में आम लोगों की राय को तरजीह दी जाती है. छोटू की पिटाई को सबने सही ठहराया और घर के मुखिया के विरोधियों ने भी इसका स्वागत किया, लेकिन वे साथ में इसका सबूत भी मांग रहे हैं. उन्हें लगता है कि बड़बोले किस्म के मुखिया ने तिल का ताड़ बना दिया है. लेकिन घर के निष्पक्ष लोगों का कहना है कि सबूत के तौर पर फोटो-वीडियो दिखाने की जरूरत नहीं है, ये असली-फर्जी हो सकते हैं. इससे पड़ोसी के घर वाले अपने मुहाफिजों पर बदला लेने के लिए दबाव बना सकते हैं और फिर खुलकर जंग हो सकती है.

बहरहाल, दोनों घरों में सियासी सरगर्मी बढ़ गई है. आखिर, सियासत से शुरू हुई दुश्मनी इसी से खत्म होगी. 

लेखक

मोहम्मद वक़ास मोहम्मद वक़ास @mohammad.waqas.1401

लेखक इंडिया टुडे मैगजीन के सीनियर एसोसिएट एडिटर हैं

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