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Updated: 27 दिसम्बर, 2018 12:36 PM
गोपी मनियार
गोपी मनियार
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गोवर्धन झड़फिया, गुजरात बीजेपी का ये वो नाम है जो केशुभाई के साथ मंत्री और 2002 के दंगों के वक्त तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ गृहमंत्री के तौर पर रहे. हालांकि, 2002 के बाद नरेन्द्र मोदी से गोवर्धन झड़फिया के रिश्तो में दरार आने लगी, और ये दरार बढ़ते-बढ़ते एक वक्त पर दो टुकड़ों में तब्दील हो गयी थी. जिसके बाद एक बार फिर पांच साल पहले गोवर्धन झड़फिया बीजेपी के साथ जुड़े और अब यूपी के प्रभारी के तौर पर उन्हें नियुक्त किया गया है.

gordhan zadafiaगोवर्धन झड़फिया को उत्तर प्रदेश का प्रभारी नियुक्त किया गया है

गोवर्धन झड़फिया की राजनीति गुजरात में काफी पुरानी है, झड़फिया खुद पाटीदार हैं और विध्यार्थी परिषद से यानी 1985 से बीजेपी के साथ जुड़े. गुजरात में पहली बार जब बीजेपी की सरकार बनी तब केशुभाई पटेल की सरकार में संजय जोशी के साथ गोवर्धन झड़फिया महामंत्री के तौर पर कार्यकरते थे. 2002 में जिस वक्त गुजरात में दंगे हुए गोवर्धन झड़फिया मोदी सरकार में बतौर गृहमंत्री काम कर रहे थे. हालांकि 2002 दिसम्बर में जब दंगों के बाद चुनाव हुआ और पहली बार बीजेपी को गुजरात में 127 सीट मिली थीं और उसके साथ नरेन्द्र मोदी मुख्यमंत्री बने थे, तो नरेन्द्र मोदी के कहने में गोवर्धन झड़फिया को मंत्रीमंडल में स्थान नहीं दिया गया था. उसके बाद जब गुजरात में मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ गुजरात बीजेपी के नेता केशुभाई पटेल, ऐ.के पटेल ने अपने विधायकों के साथ विरोध जताया तब गोवर्धन झड़फिया इन सभी नेता और विधायक को एक जुट करने का काम कर रहे थे. विधायकों के विरोध के चलते आलाकमान के दबाव में आकर जब मोदी सरकार ने मंत्री मंडल में नाराज विधायकों को स्थान दिया तो, गोवर्धन झड़फिया अकेले ऐसे विधायक थे जिन्होंने राजभवन के अंदर सबके सामने बतौर मंत्री शपत ग्रहण करने से इनकार कर दिया था.

गोवर्धन झड़फिया ने ना सिर्फ मोदी सरकार का विरोध किया था, बल्कि 2005 में बीजेपी से इस्तीफा देकर खुद की महागुजरात जनता पार्टी लेकर आए, जिसके बाद 2012 के चुनाव से पहले केशुभाई पटेल के साथ मिलकर गुजरात परिवर्तन पार्टी की भी शुरुआत की. लेकिन दोनों ही बार जनता का साथ उन्हें नहीं मिला और पहले 2007 में और फिर 2012 में वो चुनाव हार गये. हालांकि 2013 में केशुभाई ओर गोवर्धन झड़फिया की गुजरात परिवर्तन पार्टी बीजेपी में मर्ज हो गयी और एक बार फिर वो बीजेपी में संगठन के काम में जुट गये. गोवर्धन झड़फिया को यूपी जहां से देश की सबस ज्यादा लोकसभा सीटें आती हैं उसका प्रभारी बनाया गया है, ऐसे में सवाल उठना लाजमी है.

gordhan zadafiaअमित शाह ने गोवर्धन झड़फिया के कांधों पर बड़ी जिम्मेदारी लादी है

2013 से ऐसा क्या हुआ कि गोवर्धन झड़फिया को बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने इतनी अहम जिम्मेदारी सौंपी गयी. ये है उसकी वजह-

1) झड़फिया के लिये कहा जाता है कि वो जमीन से जुड़ा हुआ नेता है, बीजेपी में उनकी संगठन शक्ति सबसे ज्यादा है. जिला से लेकर तहसील तक और गांव से लेकर शहर के छोटे से छोटे कार्यकर्ता तक गोवर्धन झड़फिया के पर्सनल रिश्ते हैं.

2) 2017 के गुजरात चुनाव में जब पाटीदार बीजेपी के बीच विरोध चल रहा था, उसी वक्त बीजेपी के पाटीदार नेता के तौर पर झड़फिया ने अपनी जिम्मेदारी उठायी और ज्यादा से ज्यादा पाटीदारों पर हार्दिक पटेल के आरक्षण का असर ना हो ऐसा प्रयास किया. जिसका नतीजा ये हुआ कि, बीजेपी चुनाव जीत गयी, सीटें भले ही कम हुईं.

3) मार्च 2017 में जब यूपी में बीजेपी अब तक के इतिहास की सबसे ज्यादा विधानसभा सीट जीतकर आयी थी, उस वक्त गोवर्धन झड़फिया को उत्तर प्रदेश में किसान मोर्चा की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. जिसमें किसानों को लेकर और किसानों को बीजेपी के साथ लाने में उन्होंने अहम भुमिका भी आदा की थी.

4) झड़फिया के लिये ये भी कहा जाता है, कि पिछले पांच सालों में उन्होंने अमित शाह का विश्वास जीता है, और बीजेपी संगठन में वापस आपनी जगह बनायी है.

5) राजनैतिक जानकार लोग ये भी मान रहे हैं कि अमित शाह के साथ सुधरे रिश्तों की वजह से अमित शाह लोकसभा चुनाव में अपनी मनमानी और दूसरे दो प्रभारी दुष्यंत गौतम और नरोत्तम मिश्रा पर भी अपनी नजर बनाये रखना चाहते हैं.            

वही गोवर्धन झड़फिया एक वक्त पर बीजेपी के साथ वीएचपी के प्रवीण तोगडिया के साथ भी काफी करीबी रिश्ते रखते थे. ऐसे में हिन्दुवादी नेता ओर राम मंदिर की राजनीति के बीच गोवर्धन झड़फिया बीजेपी की उत्तर प्रदेश क राजनीति में अमित शाह के लिये हुक्कम का इक्का साबित हो सकते हैं. 

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गोपी मनियार गोपी मनियार @gopi.maniar.5

लेखिका गुजरात में 'आज तक' की प्रमुख संवाददाता है.

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