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Updated: 27 जनवरी, 2020 05:41 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
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दिल्ली (Delhi) वाले चाहे चांदनी चौक रहे हैं या फिर चेकोस्लोवाकिया चले जाएं, एक स्वैग बरक़रार रहता है. गजब का एटीट्यूड. बात करने का लहजा उसका तो कहना ही क्या! दिल्ली वालों के कन्वर्सेशन में गाली गलौज और स्लैंग एक साधारण सी चीज है. इतने गुणों के बाद टशन सोने पर सुहागा वाली कहावत को पूरा करता है. जिक्र दिल्ली वालों का निकला है और हम विराट कोहली (Virat Kohli) को भूल जाएं? ये हरगिज़ संभव नहीं है. याद करिए वो दौर जब विराट नए नए क्रिकेट में आए थे. उनका स्टाइल तो सबको मोहित करता ही था. हर कोई उनके एटीट्यूड (Virat Kohli attitude) का भी कायल था. शुरूआती दिनों में विराट ने अपने गुस्से से (Virat Kohli angry) भी क्रिकेट प्रेमियों को खूब परिचित करवाया. थोड़ा मामला इधर उधर हुआ नहीं कि मिडिल फिंगर से लेकर हिलते हुए होंठों तक, विराट ने न सिर्फ विरोधी खिलाड़ियों बल्कि आप क्रिकेट लवर्स तक को इस बात का एहसास कराया कि दिल्ली वालों में स्वैग है और ख़बरदार जो किसी ने उसे हलके में लिया. पहले के विराट अलग थे अब की बातें और हैं. जैसे जैसे उम्र और जिम्मेदारियां बढ़ रही हैं विराट के स्वाभाव में भी परिवर्तन देखने को मिल रहा है. टीम इंडिया न्यूजीलैंड दौरे (India vs New Zealand t20) पर है और उसने दो मैचों में जबरदस्त तरीके से न्यूजीलैंड को धोया है.

जीत के बाद विराट कोहली मीडिया से मुखातिब हुए और उनसे सवाल हुआ कि क्या वो न्यूजीलैंड से बदला ले रहे हैं? ध्यान रहे कि ये वही न्यूजीलैंड की टीम थी जिसने 2019 के वर्ल्ड कप (ICC cricket world cup 2019) के सेमी फाइनल मैच में टीम इंडिया को कप से महरूम रखा था. सवालों का जवाब देते हुए विराट कोहली के अन्दर का संत बाहर आ गया. वो मदर टेरेसा की तरह बातें करने लग गए. विराट की बातों पर यकीन करें तो बदले जैसा कुछ नहीं है और टीम अच्छा क्रिकेट खेलने न्यूजीलैंड गई है.

Virat Kohli, Arvind Kejriwal, New Zealand, Delhi पूर्व के मुकाबले विराट कोहली वर्तमान में शांत और मैदान पर भी हंसते मुस्कुराते नजर आते हैं

मीडिया से हुई बातचीत में विराट ने दो टूक होकर कहा है कि, अगर आप इस बारे में सोचते भी हैं तो यह लोग इतने अच्छे हैं कि आप उस बदले की जोन में जा ही नहीं सकते.’ साथ ही उन्होंने ये भी कहा कि यह सिर्फ मैदान पर प्रतिस्पर्धी होने की बात है. यह वो टीम है जिसने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने आप को संभालने के उदाहरण दिए हैं. जब यह टीम विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी तो हम खुश हुए थे. जब आप हारते हो तो आपको बड़े पैमाने पर चीजें देखनी होती हैं.’

सच में हैरत हो रही है विराट की ये संतई देखकर. ये शहद में डूबी मीठी मीठी बातें सुनकर. हमारे लिए तो यकीन करना ही मुश्किल हो जा रहा है. विराट की खेल भावना को देखते हुए उन्‍हें हाल ही में ICC spirit of Cricket award से नवाजा गया. विराट के इस रूप को देखकर हम खुद यही सोच रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या हो गया जिसने आदमी को इतना ट्रांसफॉर्म कर दिया कि उसने अपना वो गहना ही उतार दिया जिसने उसे खेल जगत में एक अलग ही पहचान दी थी.

विराट के अतीत पर नजर डालें और उसपर गौर करें तो मिलता है कि वो एक ऐसे व्यक्ति थे जिनके खेल की दहशत सामने वाली टीम पर तो रहती ही थी. खुद उनकी अपनी टीम के खिलाड़ी भी उसने टेरर में रहते थे. पूर्व में हुए मैचों की हम ऐसी तमाम झलकियां देख चुके हैं जिनमें विराट कोहली थोड़ी बहुत लापरवाहियों के कारण अपनी ही टीम के खिलाड़ियों पर खफा होते नजर आए हैं.

पूर्व का जो बिंदास विराट था और जो सॉफिस्टिकेटेड विराट अब हमारे सामने है उसने तमाम दिल्ली वालों को कॉम्प्लेक्स दे दिया है. बेचारे दिल्ली वाले भी अब तो एक दूसरे से यही कहते पाए जाते हैं कि क्या ये विराट वाकई हमारे बीच का था? हमारा ही आदमी था? दिल्ली वाले विराट को इतना सभ्य होते देखकर उसे पचा पाने में तमाम तरह की दुश्वारियों का सामना कर रहे हैं.

Virat Kohli, Arvind Kejriwal, New Zealand, Delhi विराट कोहली की तरह अरविंद केजरीवाल ने भी अपने को शांत कर लिया है और अब कम ही मौके आते हैं जब वो आपा खोते हैं

जो लोग विराट को देखकर भौचक्के हैं उन्हें दिल्ली के ही एक अन्य शख्स से जरूर मिलना चाहिए. इस व्यक्ति को देखकर महसूस हो रहा है कि इनमें और विराट में कोईकम्पटीशन चल रह है कि कम से कम समय में कौन अपने आपको ज्यादा बड़ा संत साबित कर सकता है. सवाल होगा कौन? तो जवाब है दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल. विराट की ही तरह केजरीवाल ने भी अपने बर्ताव से लोगों की रातों की नींद और दिन का चैन उड़ाया हुआ है.

जैसे विराट को देखकर क्रिकेट लवर्स कन्फ्यूज है वैसा ही कुछ हाल राजनीति के धुरंधरों का है. अन्ना आंदोलन के बाद देश की सक्रिय राजनीति में आए केजरीवाल भी विराट की तरह एक अलग किस्म का स्वैग और एटीट्यूड रखते थे. पीएम मोदी, भाजपा और अमित शाह रहे हों या दिल्ली के एलजी केजरीवाल ने किसको क्या-क्या नहीं कहा. कई बार तो नौबत यहां तक आई कि इन्हें अपने कहे पर माफ़ी तक मांगनी पड़ी. पूर्व में केजरीवाल इतना बोले, इतना बोले की विपक्ष तक ने इन्हें बड़बोले नेता की संज्ञा दे दी.

विराट की ही तरह ट्रांसफार्मेशन केजरीवाल ने भी अपना खूब किया और अब ये या तो ज्यादातर चुप रहते हैं. या फिर उतनी ही बात करते हैं जितनी की जरूरत है. यानी केजरीवाल ने भी स्वैग और एटीट्यूड को कहीं दूर किनारे रखकर संतई का चोला ओढ़ लिया है.

बहरहाल, अब तक की जिंदगी में हमने सिर्फ कैलेंडर को ही बदलते देखा था. मगर जिस तरह दिल्ली के ये दो लोग, कोहली और केजरीवाल बदले हैं और जिस तरह इन्होंने संतई अपनाई है चर्चा तो होगी ही. किस्से तो गढ़े जाएंगे ही. अच्छा जाते जाते इतना बता दें कि यहां केजरीवाल और विराट की चर्चा इसलिए भी हुई है क्योंकि शुरूआती दिनों में जैसे इनके तेवर और जिस तरह का इनका रवैया था. शायद ही किसी ने कभी ये सोचा हो कि ये लोग चेंज होंगे और इस तरह ये बदलते बदलते एकदम धर्मात्मा बन जाएंगे.  

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लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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