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Updated: 02 जून, 2021 07:37 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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अब तक हम यह सुनते आए हैं कि पूरी दुनिया में सबसे अधिक जनसंख्या चीन (China Population) की है. इसलिए जब लोगों को यह पता चला कि चीन थर्ड चाइल्ड पॉलिसी (Third child allowed in China) कानून लागू करने जा रहा है तो हैरान होना लाजिमी है.

जनसंख्या के मामले में चीन के बाद भारत दूसरे नंबर पर है जबकि अमेरिका तीसरे नंबर पर है. जहां एक तरफ भारत में बढ़ती जनसंख्या चिंता का विषय है वहीं चीन में तीन बच्चों के जन्म के लिए परमिशन मिल गई है. असल में चीन सरकार ने परिवार नियोजन के नियमों में ढील देने का ऐलान कर दिया है. यानी अब चीन में कोई भी कपल तीन बच्चे पैदा कर सकेगा. इसके पहले यहां दो बच्चे पैदा करने की ही इजाजत थी. चीन की आबादी इस समय 144 करोड़ है जबकि भारत की जनसंख्या 139 करोड़ है.

China, Population, China Population, China Population ruleचीन में तीसरे बच्चे की परमिशन से क्या फर्क पड़ेगा

एक बात और, चीन ही पहला ऐसा देश है जहां जनसंख्या जनसंख्या नियंत्रण को लेकर 1979 में One Child Policy जैसे कड़े कानून बनाए गए, इस काफी विवादों में भी रहा. यह कानून 37 सालों तक लागू रहा जिस वजह से यहां 40 करोड़ बच्चों के जन्म को रोक दिया गया. यानी जन्मदर काफी घट गया. वहीं 2016 में चीनी सरकार ने Second Child Policy का नियम लागू किया. जिसके तहत कोई भी कपल दो बच्चे पैदा कर सकते थे. लेकिन ऐसा करने के बावजूद भी चीन के जन्मदर में कोई खास बदलाव नहीं आया.

यानी की दो बच्चे पैदा करने की छूट के बाद तो जन्मदर बढ़ना चाहिए था लेकिन ऐसा हुआ नहीं. कुछ दिन पहले ही चीन की कम्युनिस्ट पार्टियों की एग्जीक्यूटिव कमेटी (Politburo) की एक बैठक हुई. जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी मौजूद थे. इस कमेटी में यह बात सामने आई कि चीन में राष्ट्रीय जन्म दर लगातार कम हो रही है. इस समय जन्म दर 1 प्रतिशत के आसपास ही रह गई है. इसके अपोजिट यहां बूढ़े लोगों की संख्या बढ़ रही है, यानी चीन तेजी से बूढ़ा हो रहा है. इसी बात को ध्यान में रखते हुए चीन ने Third Child Policy को लागू करने का ऐलान किया जो जल्द ही लागू कर दी जाएगी.

चलिए आपको आंकड़े के अनुसार समझाते हैं. दरअसल, चीन की जनसंख्या दर में काफी तेजी से गिरावट दर्ज की गई है. माना जा रहा है कि यह अब तक की ऐतिहासिक गिरावट है और चीन की आबादी का पीक वर्ष 2025 से 2030 के बीच देखने को मिलेगा. यानी इस दौरान जनसंख्या 145 करोड़ से 150 करोड़ के बीच बनी रहेगी, लेकिन इसके बाद भारी गिरावट देखने को मिल सकती है. इस समय चीन में जन्मदर सिर्फ 1.3 प्रतिशत रह गई है. जो चीन के लिए टेंशन की वजह है. असल में 2020 में जन्म दर में कमी की वजह से सिर्फ 1 करोड़ 20 लाख बच्चों ने ही जन्म लिया, ऐसा 60 वर्षों में पहली बार हुआ.

किसी भी देश में आर्थिक तरक्की तभी संभव हो सकती है जब वहां के अधिक से अधिक लोगों की उम्र 15 वर्ष से 60 वर्ष के बीच हो. कामगारों की घटती संख्या भी चीन में थर्ड चाइल्ड पॉलिसी की वजह है. चीन में जवानों की संख्या कम हो रही है और बूढ़े लोगों की संख्या ज्यादा. चीन में जन्म दर कम होने की वजह से बूढ़े लोगों की संख्या बढ़ रही है. चीन अपने इस लक्ष्य में तो सफल रहा लेकिन वहां की सरकार को 2016 में यह एहसास हुआ कि अगर ऐसे ही जन्म दर घटती रही तो वह एक बूढ़ा देश बन जाएगा.

इस वजह से सेकंड चाइल्ड पॉलिसी को मंजूरी दी लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ. इसकी सबसे बड़ी वजह है यह है कि वहां के लोग शादी और बच्चे पैदा करने में कोई दिलचस्पी खत्म होती जा रही है. वहां के युवाओं में शादी ना करने का क्रेज हावी होते जा रहा है. बढ़ती उम्र की वजह से वहां के लोगों में रोजगार की भी समस्या बढ़ती जा रही है. इसलिए चीन ने तीसरे बच्चे की परमिशन दी है ताकि वहां जन्म दर में बढ़ोतरी हो सके. चीन हर मामले में काफी आगे है लेकिन कभी-कभी अपनी ही नीति का खुद ही शिकार हो जाता है, यह भी उनमें से एक ही है.

लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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