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Updated: 27 जून, 2021 03:35 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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भारत के कई राज्यों में पेट्रोल-डीजल के दाम (petrol diesel prices) शतक लगा चुके हैं या 100 की आंकड़ा छूने की ओर बढ़ रहे हैं. बीते करीब एक महीने में ही पेट्रोल-डीजल के दामों में 7 रुपये से ज्यादा की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है. पेट्रोल (petrol) और डीजल (diesel) का इस्तेमाल माल ढुलाई में भी किया जाता है, जिसकी वजह से अन्य चीजों के दामों में भी काफी उछाल आया है. दरअसल, पेट्रोल-डीजल के दामों में होने वाले बढ़ोत्तरी कहीं न कहीं देश की हर चीज के मूल्य पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से असर डालती है. आंकड़ों की मानें, तो महंगाई अपने चरम को छू चुकी है. वहीं, कोरोना महामारी की वजह से देश की अर्थव्यवस्था बुरी तरह से चरमरा गई है. पेट्रोल-डीजल के दामों में हुई बढ़ोत्तरी पर विपक्षी दलों की ओर से मोदी सरकार (modi government) को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा जा रहा है.

कीमतों की वजह से जनता हलकान है, इसके बावजूद मोदी सरकार की ओर से कोई राहत मिलती नहीं दिख रही है. कोरोना महामारी के चलते देशभर में पेट्रोल-डीजल की मांग घटी है. लेकिन, इसके उलट आश्चर्यजनक रूप से मोदी सरकार ने पहली बार आयकर से ज्यादा पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क यानी एक्साइज ड्यूटी से सर्वाधिक कमाई की है. वित्त वर्ष 2020-21 में पेट्रोल-डीजल पर टैक्स से मोदी सरकार ने 5.25 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं. मांग घटने के बाद भी कमाई बढ़ाने वाला ये आंकड़ा चौंकाने वाला कहा जा सकता है.

वहीं, पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों पर मोदी सरकार की ओर से तर्क दिया जा रहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत बढ़ रही है. केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कीमतों में आए उछाल की एक वजह 80 फीसदी तक कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता को बताया है. मोदी सरकार की ओर से ये भी तर्क दिया जा रहा है कि यूपीए सरकार के दौरान जारी किए गए ऑयल बॉन्ड की वजह से भी कीमतों में वृद्धि हो रही है. इस स्थिति में सवाल उठना लाजिमी है कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम 'आपदा में अवसर' है या मोदी सरकार की मजबूरी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021 पेश करते हुए पेट्रोल पर 2.5 और डीजल पर 4 रुपये कृषि सेस लगाने की घोषणा की थी.वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021 पेश करते हुए पेट्रोल पर 2.5 और डीजल पर 4 रुपये कृषि सेस लगाने की घोषणा की थी.

37 रुपये के पेट्रोल पर लगता है 168% का टैक्स

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2021 पेश करते हुए पेट्रोल पर 2.5 और डीजल पर 4 रुपये कृषि सेस लगाने की घोषणा की थी. कहा गया था कि इस सेस का असर उपभोक्ताओं पर नहीं पड़ेगा और तेल कंपनियां इसे वहन करेंगी. उपभोक्ताओं पर इसका असर न पड़े, इसलिए बेसिक एक्साइज ड्यूटी को कम भी किया गया था. इसके बावजूद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में भारी उछाल आया और ये टैक्स भी अब उपभोक्ताओं से ही वसूला जा रहा है. 2014 में सत्ता में आने पर नरेंद्र मोदी सरकार एक लीटर पेट्रोल पर 10.38 रुपये और डीजल पर 4.52 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूलती थी. बीते सात सालों में मोदी सरकार ने 13 बार एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई है. हालांकि, यह घटाई भी गई है, लेकिन सिर्फ तीन बार.

जिसका सीधा सा मतलब है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम कम होने पर भी मोदी सरकार ने आम जनता को बहुत ज्यादा राहत नहीं दी. इंडियन ऑयल की वेबसाइट से मिले दिल्ली के आंकड़ों के हिसाब से मोदी सरकार एक लीटर पेट्रोल पर 32.90 और डीजल पर 31.80 रुपये एक्साइज ड्यूटी वसूल रही है. वहीं, राज्य सरकारें पेट्रोल और डीजल पर क्रमश: 22.31 और 12.79 रुपये वसूल रही हैं. 2014 और आज की कीमतों की तुलना की जाए, तो मोदी सरकार ने सात सालों में पेट्रोल पर तीन गुना और डीजल पर 7 गुना टैक्स बढ़ा दिया है. वहीं, अगर इसमें राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले वैट और अन्य टैक्स को जोड़ लिया जाए, तो पेट्रोल पर उसकी असल कीमत से 168 फीसदी टैक्स लगता है.

भारत करता है 80 फीसदी कच्चे तेल का आयात

भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम सीधे तौर पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करते हैं. भारत में इस्तेमाल होने वाले ईंधन की 80 फीसदी आयात किया जाता है, जो पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी का एक बड़ा कारण कहा जा सकता है. वहीं, हाल ही में आई ताउते तूफान की वजह से देश में कच्चा तेल के उत्पादन में कमी आई है. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, भारत में क्रूड ऑयल का उत्पादन मई 2021 में 24.30 लाख टन रहा है, जो बीते साल मई में हुए 26 लाख टन उत्पादन के मुकाबले 6.32 फीसदी कम है. वहीं, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोर वैल्यू भी पेट्रोल-डीजल की कीमतों में उछाल का एक कारण कहा जा सकता है. ओपेक और तेल उत्पादक देशों में कच्चे तेल का उत्पादन पूरी तरह से नहीं हो रहा है. जिसकी वजह से डिमांड और सप्लाई का बैलेंस बिगड़ रहा है और क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ रही हैं.

इसी वर्ष इन ऑयल बॉन्ड्स पर करीब 20,000 करोड़ रुपये का ब्याज केंद्र सरकार को चुकाना है.इसी वर्ष इन ऑयल बॉन्ड्स पर करीब 20,000 करोड़ रुपये का ब्याज केंद्र सरकार को चुकाना है.

यूपीए सरकार द्वारा जारी ऑयल बॉन्ड का असर

मोदी सरकार की ओर से लगातार कहा जाता रहा है कि यूपीए सरकार की ओर से जारी किए गए ऑयल बॉन्ड्स की वजह से पेट्रोल-डीजल के दामों में वृद्धि हो रही है. दरअसल, यूपीए सरकार के दौरान तेल कंपनियों को पेट्रोल-डीजल की बढ़ी कीमतों को कम रखने और इसका बोझ जनता पर न डालने देने के लिए ऑयल बॉन्ड जारी किए गए थे. केंद्र सरकार को इस वर्ष अक्टूबर से लेकर मार्च, 2026 तक यूपीए सरकार द्वारा जारी किए गए 1.31 लाख करोड़ रुपये के ऑयल बॉन्ड का भुगतान मार्च 2026 तक करना है. इसी वर्ष इन ऑयल बॉन्ड्स पर करीब 20,000 करोड़ रुपये का ब्याज केंद्र सरकार को चुकाना है. मोदी सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर 2014 से लेकर 2021 तक लोगों से करीब 20 लाख करोड़ रुपये वसूले हैं.

केवल वित्त वर्ष 2020-21 में ही पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी के जरिये मोदी सरकार ने 5.25 लाख करोड़ रुपये की कमाई की है. अगर आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए, तो मोदी सरकार एक बार में ही ऑयल बॉन्ड का पूरा कर्ज चुका सकती है. लेकिन, ऐसा कहना गलत होगा. केंद्र सरकार के पास कमाई के साथ खर्च का भी हिसाब होता है. बजट 2021 में मोदी सरकार ने 35000 करोड़ रुपये वैक्सीनेशन के लिए देने का फैसला किया था. किसानों की आय दोगुनी करने के लिए भी कई घोषणाएं हुई थीं. कुल मिलाकर अलग-अलग विभागों और मंत्रालयों को कुल 34.83 लाख करोड़ के फंड का आवंटन किया गया था. कहने का मतलब ये है कि सरकार के पास कमाई के साधन हैं, तो उसके साथ खर्च भी जुड़े हैं.

खैर, मोदी सरकार फिलहाल लोगों को पेट्रोल-डीजल पर लगने वाले टैक्स में कमी कर राहत देने के मूड में नजर नहीं आ रही है. वहीं, पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाए जाने के फैसले पर भी कई राज्य सहमत नही हैं. दरअसल, राज्य सरकारों को भी पेट्रोल-डीजल पर टैक्स के जरिये भारी कमाई होती है. इस तमाम तथ्यों के आधार पर आसानी से कहा जा सकता है कि पेट्रोल-डीजल के बढ़ते दाम 'आपदा में अवसर' तो नही है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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