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Updated: 02 फरवरी, 2019 02:38 PM
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लगता है कि Amazon के दिन अच्छे नहीं चल रहे हैं. एक तरफ तो जेफ बेजोस जो अमेजन के कर्ता-धर्ता हैं उनके तलाक की खबरें जंगल की आग की तरह फैल रही हैं और दूसरे अमेजन को नुकसान भी हो रहा है. दुनिया के सबसे अमीर आदमी का तलाक हो या फिर उसे बिजनेस में लगा घाटा ये सब छोटा तो नहीं हो सकता. अमेजन की कमाई पिछले साल में भले ही बढ़ी हो, लेकिन नरेंद्र मोदी सरकार की एक सर्जिकल स्ट्राइक या यूं कहें कि एक छोटे से फैसले ने कंपनी को बहुत भारी नुकसान पहुंचाया है.

शुक्रवार 1 फरवरी को भारत की नई ईकॉमर्स पॉलिसी लागू होते ही अमेजन कंपनी के शेयर गिर गए. वैसे तो ये 31 जनवरी से ही गिरने शुरू हो गए थे. अमेजन के शेयर्स से जो नुकसान हुआ है वो लगभग 800 बिलियन डॉलर (57 करोड़ करोड़ रुपए) है. ये असल में अमेजन की मार्केट वैल्यू के हिसाब से नुकसान है. भारतीय बाजार में हुए बदलावों ने अमेजन को असल मायने में झटका दिया है.

अमेजन, जेफ बेजोस, नरेंद्र मोदी, ईकॉमर्समोदी सरकार ने ईकॉमर्स पॉलिसी में जो बदलाव किए हैं वो अमेजन और फ्लिपकार्ट पर बहुत भारी पड़ सकते हैं.

अमेजन के शेयर अपने 52 हफ्तों के सबसे ऊंचे रिकॉर्ड से लगभग 20% गिर गए. जो शेयर कुछ समय पहले अपनी सबसे ऊंची कीमत पर बिक रहा था वो $2,050.50 प्रति शेयर से गिरकर $1,626.23 प्रति शेयर हो गया. अमेजन ने कुछ समय पहले हॉलीडे सेल के बाद प्रॉफिट होने की घोषणा की थी, लेकिन अचानक अमेजन के सबसे ज्यादा ग्रोथ वाले मार्केट भारत में हुए नियमों के बदलावों से ये सब बिगड़ गया. अकेले शुक्रवार को ही शेयर 5.4 प्रतिशत गिर गए.

दरअसल, गुरुवार 31 जनवरी को ही कंपनी ने अपने निवेशकों के साथ एक मीटिंग की थी और इसी दौरान अमेजन द्वारा 2019 में निवेश बढ़ाने के बारे में सोचा जा रहा है और साथ ही साथ भारतीय मार्केट के उतार चढ़ाव के बारे में भी चिंता जताई गई. अमेजन सीएफओ Brian Olsavsky इस मीटिंग में भारत के मार्केट को लेकर चिंतित थे.

आखिर क्यों हुआ ऐसा?

26 दिसबंर 2018 को मोदी सरकार ने ई-कॉमर्स सेक्टर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) को लेकर नियम कड़े कर दिए थे. इसके बाद से ही अमेजन और फ्लिपकार्ट काफी परेशान थे. वो तो ये भी चाहते थे कि सरकार नए नियम लागू करने की तारीख बढ़ा दे. सरकार ने नए नियमों को लागू करने की तारीख 1 फरवरी तय की थी, लेकिन अमेजन चाहता था कि उसे 1 जून तक की मोहलत मिल जाए और फ्लिकार्ट चाहता था कि उसे कम से कम 6 महीने का समय दिया जाए ताकि नए नियमों को समझा जा सके. हालांकि, सरकार अपने फैसले पर अड़ी रही और अब ई-कॉमर्स कंपनियों की वेबसाइट से कुछ प्रोडक्ट गायब होने लगे हैं.

दरअसल, सरकार ने ई-कॉमर्स कंपनियों पर उन फर्मों के प्रोडक्ट्स बेचने पर रोक लगा दी थी, जिनमें इन ई-कॉमर्स कंपनियों की हिस्सेदारी हो. इतना ही नहीं, किसी भी उत्पाद की एक्सक्लूसिव बिक्री के लिए करार करने पर भी रोक लगा दी गई है. व्यापारियों के संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने सरकार से आग्रह किया था कि इन बदलावों को लागू करने की समयसीमा न बढ़ाई जाए और ऐसा ही हुआ. तय तारीख यानी 1 फरवरी से नए नियम लागू हो गए.

भारत के नए नियम के कारण अमेजन ब्रांड की कोई भी वस्तु अमेजन इंडिया एप पर नहीं बिक सकती है. भारत के इस फैसले के कारण अमेजन की पहली तिमाही की सेल्स गिर सकती हैं और यही कारण है कि अमेजन कंपनी के शेयर्स के दाम इस तरह से अचानक गिर गए. क्योंकि भारतीय मार्केट कई ईकॉमर्स कंपनियों के लिए बेहद जरूरी मार्केट हैं क्योंकि पिछले 5 सालों में भारतीय मार्केट की ग्रोथ बहुत ज्यादा बढ़ गई है.

अमेजन का रेवेन्यू 60.8 बिलियन डॉलर (अनुमानित) की जगह 56 बिलियन डॉलर (अनुमानित) रह सकता है. ये पहले क्वार्टटर का घाटा होगा. Brian Olsavsky ने उस मीटिंग के दौरान कहा कि कंपनी की पॉलिसी ऐसी रहेगी जिससे भारत में हुए नियमों के बदलाव का कंपनी पर कम से कम असर हो. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि भले ही पहले क्वार्टर में कंपनी को नुकसान हो, लेकिन बाकी जगहों से ये घाटा पूरा कर लिया जाएगा.

भारतीय मार्केट में उथल पुथल का असर सिर्फ अमेजन पर ही नहीं बल्कि फ्लिपकार्ट, मिंत्रा और अन्य सभी ईरिटेलर्स पर पड़ सकता है जिनमें विदेश से पैसा लगा है और वो अपने प्रोडक्ट्स अपने ही प्लेटफॉर्म पर बेच रही हैं.

मोदी सरकार की ये पॉलिसी स्वदेशी विक्रेताओं की मदद करने के लिए बनाई गई है, लेकिन इससे ग्राहकों को भी एक नुकसान है.

क्या इससे ग्राहकों को कोई नुकसान होगा?

इस पॉलिसी के बाद विदेशी सामान उसी प्लेटफॉर्म पर मिलना बंद हो जाएगा. अमेजन पैंट्री या शॉपर्सस्टॉप जैसे ब्रांड्स के प्रोडक्ट अमेजन की वेबसाइट पर मिल जाते थे ये बंद हो जाएंगे और साथ ही बड़े डिस्काउंट और एक्सक्लूसिव सेल भी बंद हो जाएंगी. ऐसे में ग्राहकों को सीधा तो कोई नुकसान नहीं लेकिन अगर दूसरी तरफ से देखें तो सस्ते प्रोडक्ट्स जो ऑनलाइन कम दाम पर मिल जाते थे अब उन्हें पाने के लिए स्टोर तक जाना पड़ेगा और साथ ही उन बड़ी एक्सक्लूसिव सेल का लुत्फ नहीं उठा पाएंगे कंज्यूमर जिनमें बहुत ज्यादा डिस्काउंट के साथ लोगों को सामान मिल जाता था.

हां, Amazon और Flipkrt के ब्रांड प्रोडक्ट्स की जगह कई भारतीय विक्रेताओं के सामान खरीदे जा सकेंगे.

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