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Updated: 09 अगस्त, 2022 06:35 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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बीते हफ्ते बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई एक हिंदी फिल्म 'मासूम सवाल' के पोस्टर (Masoom Sawaal poster) को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. फिल्म मासूम सवाल के पोस्टर को लेकर निर्माता और निर्देशक के खिलाफ एफआईआर भी दर्ज हो गई है. दरअसल, फिल्म मासूम सवाल के पोस्टर में सेनेटरी पैड के ऊपर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाई गई है. जिसके बाद फिल्म के पोस्टर को लेकर बवाल खड़ा हो गया है. और, फिल्म पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगा है. बताया जा रहा है कि फिल्म मासूम सवाल मासिक धर्म यानी पीरियड्स जैसे गंभीर विषय पर बनी जागरुकता पैदा करने वाली फिल्म है.

Masoom Sawaal Film Controversy Lord Krishna Sanitary Padक्या पीरियड्स को लेकर जागरुकता बिना भगवान कृष्ण की तस्वीर लगाए नहीं फैलाई जा सकती थी?

काली पोस्टर विवाद बहुत पुराना नहींं हुआ

करीब एक महीने पहले ही भारतीय मूल की एक फिल्ममेकर लीना मनिमेकलाई की डॉक्यूमेंट्री फिल्म काली के पोस्टर को लेकर भी जमकर विवाद हुआ था. काली फिल्म के पोस्टर में लीना मनिमेकलाई ने एक महिला को देवी काली की भूमिका में दिखाया था. इस पोस्टर में देवी काली बनी कलाकार के हाथ में सिगरेट और LGBTQ कम्युनिटी का झंडा भी था. सोशल मीडिया पर इस फिल्म के पोस्टर का विवाद इस कदर बढ़ा था कि भारत सरकार ने इस पर अपनी आपत्ति जताई थी. जिसके बाद कनाडा में इस फिल्म की स्क्रीनिंग पर रोक लगा दी गई थी. और, अब वैसा ही विरोध फिल्म मासूम सवाल का भी किया जा रहा है.

इतने भी 'मासूम' नहींं हैं फिल्म बनाने वाले

वैसे, सेनेटरी पैड पर भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर लगाने जैसी 'मासूम' कोशिशें बॉलीवुड में लंबे समय से की जा रही हैं. और, बॉलीवुड ही क्यों देश के बुद्धिजीवी वर्ग से लेकर तमाम प्रगतिवादी और सेकुलर लोग हिंदू धर्म से जुड़ी आस्थाओं और देवी-देवताओं का माखौल उड़ाते ही रहते हैं. दरअसल, तार्किक होने के नाम पर इस बुद्धिमान प्रजाति के लोग सामने वाले के तर्कों को ही नकारने पर उतर आते हैं. इन तमाम लोगों की ओर से दलील दी जा रही है कि सेनेटरी पैड पर भगवान कृष्ण की मूर्ति दिखाने से हिंदू धर्म पर कोई आंच नहीं आई है. कुछ हिंदूवादी लोग जबरन इसे लेकर विवाद खड़ा कर रहे हैं.

लेकिन, यही लोग ये बताना भूल जाते हैं कि आखिर फिल्म मासूम सवाल के पोस्टर में हिंदू धर्म की आस्था के अपमान की जरूरत ही क्यों पड़ी? क्या इन तमाम तार्किक लोगों के सामने ये तर्क मायने नहीं रखता है कि अगर पोस्टर में भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति की तस्वीर न लगाई जाती, तो क्या फर्क पड़ जाता? खुद को तर्कवादी बताने वाली ये प्रजाति ये नहीं सोचती है कि मासिक धर्म यानी पीरियड्स से जुड़ी फिल्म के पोस्टर में सेनेटरी पैड दिखाए जाने से ही फिल्म का मंतव्य साफ हो जाता है. तो, जबरन भगवान श्रीकृष्ण की तस्वीर को इस पोस्टर में क्यों घुसेड़ा गया?

अब इस फिल्म पर बवाल या इसका विरोध होगा, तो इसका दोष भी बहुसंख्यक हिंदुओं पर 'कट्टरता' के नाम पर थोप दिया जाएगा. कहा जाएगा कि देश में सहिष्णुता नहीं रह गई है. और, इन्हीं बुद्धिजीवियों और प्रगतिवादी-सेकुलर लोगों की ओर से हिंदूवादी संगठनों और भाजपा जैसे राजनीतिक दल के नाम पर बवाल का सारा बिल फाड़ दिया जाएगा. जबकि, असल में इस बवाल या विरोध को पहले ही टाला जा सकता था. आसान शब्दों में कहा जाए, तो फिल्म मासूम सवाल को बनाने वाले इतने भी 'मासूम' नहीं हैं. क्योंकि, इन विवादों से मुफ्त की पब्लिसिटी भी तो मिलती है.

जागरुकता के नाम पर अपमान कौन सहन करेगा?

आमिर खान की फिल्म लाल सिंह चड्ढा और फिल्म मासूम सवाल के प्रमोशन का तरीका एक जैसा ही है. अभी तक फिल्म लाल सिंह चड्ढा का विरोध केवल आमिर खान को लेकर किया जा रहा था. लेकिन, उसके बाद करीना कपूर खान का दर्शकों पर असफलता का ठीकरा फोड़ने का वीडियो सामने आया. और, अब इस फिल्म के पटकथा लेखक अतुल कुलकर्णी के बयान फिल्म लाल सिंह चड्ढा के लिए विवाद को जन्म दे रहे हैं. दरअसल, बॉलीवुड में फिल्मों को सुर्खियों में लाने के लिए विवाद को सबसे सस्ता तरीके के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. जितना फिल्म को लेकर विवाद बढ़ेगा. उतनी ही फिल्म को पब्लिसिटी मिलेगी.

इस बात में कोई दो राय नहीं होगी कि फिल्म मासूम सवाल के निर्माता और निर्देशक ने जान-बूझकर भगवान कृष्ण की मूर्ति को सेनेटरी पैड पर लगाकर पोस्टर बनवाया है. क्योंकि, अगर ऐसा नहीं होता, तो फिल्म मासूम सवाल में मासिक धर्म जैसे विषय पर जागरुकता फैलाने के नाम पर जबरन हिंदू धर्म का अपमान करने की कोशिश नहीं की जाती. ये फिल्म बनाने वालों की ढिठाई ही है कि अपने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम पेज पर सवाल पूछा जा रहा है कि 'क्या सेनेटरी पैड पर भगवान श्रीकृष्ण का चित्र जायज है?' वैसे, फिल्म चर्चा में आ जाएगी, तो बॉक्स ऑफिस पर ना सही. लेकिन, ओटीटी पर तो अच्छे पैसे दे ही जाएगी. 

 
 
 
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अभिव्यक्ति और कलात्मक आजादी हिंदू धर्म तक ही सीमित

फिल्म 'मासूम सवाल' के निर्माता-निर्देशकों से ये पूछा जाना चाहिए कि उनकी अभिव्यक्ति की आजादी और तमाम क्रिएटिविटी केवल हिंदू धर्म तक ही क्यों सीमित हो जाती है? दरअसल, हिंदू धर्म को लेकर किए जाने वाले इस तरह के अपमान पर ज्यादा से ज्यादा सोशल मीडिया पर विरोध दर्ज कराया जाता है. जबकि, किसी अन्य धर्म को लेकर की गई इस तरह की गलती पर 'सिर तन से जुदा' का फरमान जारी हो जाता है. ज्यादा से ज्यादा क्या होगा? बवाल के बाद माफी मांग ली जाएगी.

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लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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