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Updated: 06 जून, 2016 05:06 PM
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नॉर्वे दुनिया का ऐसा पहला देश बनने जा रहा है जहां डीजल-पेट्रोल से चलने वाली कारों पर पूरी तरह बैन लग जाएगा. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक नॉर्वे में सरकार और विपक्षी दल के बीच इस बात की सहमति बनी है कि 2025 तक नॉर्वे की सड़कों से पेट्रोल और डीजल से चलने वाली कारों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया जाए.

हालांकि अभी ये प्रस्ताव पारित नहीं हुआ है और इस पर विचार जारी है. लेकिन इस प्रस्ताव के पारित होने के बाद नॉर्वे यह ऐतिहासिक कदम उठाने वाला दुनिया का पहला देश बन जाएगा. नॉर्वे के अखबार Dagens Naeringsliv के मुताबिक 'frp (नॉर्वे की शासक पार्टी) सभी गैसोलिन कारों को हटा लेगी.'

नॉर्वे में 2025 तक सभी नॉन इलेक्ट्रिक कारों पर लगने वाले संभावित बैन की अमेरिकी इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला के सीईओ इलोन मस्क ने सराहना की है.

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नॉर्वे 2025 तक डीजल और पेट्रोल से चलने वाली कारों पर पूरी तरह बैन लगाने वाला पहला देश बनने जा रहा है!

नॉर्वे है कीर्तिमान का महारथीः

अब तक के अपने रिकॉर्ड में नॉर्वे एक ऐसे देश के रूप में जाना जाता रहा है जहां पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, और खनिज का ज्यादा उत्पादन होता है. लेकिन इस कार्य से वह पूरी तरह पर्यावरण और प्राकृतिक संपदा का संरक्षण करने मे सबसे आगे हो जाएगा.प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से मिडिल ईस्ट के बाद ये दुनिया का सबसे ज्यादा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस का उत्पादन करने वाला देश है.

नवीकृत ऊर्जा का सफल प्रयोग कर रहा है नॉर्वेः

ऐसा माना जा रहा है कि नॉर्वे 2020 तक अपने आपको मौजूदा पवन ऊर्जा से तीन गुना कर देगा. इस समय नॉर्वे में इलेक्ट्रिसिटी से चलने वाली गाड़ियो की संख्या 24 फीसदी है.

नवीकृत ऊर्जा वह ऊर्जा होती है जिसे बार-बार उपयोग में लाया या बनाया जा सकता है. 2015 नवीकृत ऊर्जा के बढ़ते उपयोग के लिहाज से एक आसाधारण साल रहा क्योंकि दुनिया के सारे देश इसी को बढ़ाने की होड़ में लगे थे. लेकिन नॉर्वे पहले ही नवीकृत ऊर्जा के उपयोग की दिशा में काफी काम कर चुका है.

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