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Updated: 13 अक्टूबर, 2021 12:50 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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आईफोन (iphone 12) शब्द सुनने में ही आम इंसान के लिए भारी भरकम सा लगता है. सैलरी वाले भी केलेज पर पत्थर रखकर 10 जगह ऑफर देखकर ईएमआई पर ही खरीदने में अपनी भलाई समझते हैं. एक साथ इतनी मोटी रकम फंसाना तो बेवकूफी ही लगता है उपर से इतने पैसे एक साथ होने भी तो चाहिए.

आजकल इंसान की जितनी सैलरी होती है खर्चे उससे कहीं ज्यादा ही होते हैं. अब इस समय त्योहार के नाम पर इतने ऑफर मिलते हैं कि सेल का लालच देख जिसे नया फोन नहीं लेना होता है वह भी खरीद ही लेता है. सीने पर पत्थर रखकर आईफोन खरीदने वाले को अगर हकीकत में फोन के बदले पत्थर मिल जाए तो? सोचकर ही रूह कांप जाती है ना???

Amazon online shopping, cyber fraud, Flipkart online shopping, Online Shopping, flipkart, iphoneApple iPhone 12 के बदले में मिला निरमा साबुन

जी हां आप सही समझे हैं. अक्सर ऐसी खबरें सामने आती हैं कि ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट से फलाने ने मोबाइल ऑर्डर किया और पैकेट खोला तो पत्थर निकला. उसने ऑनलाइन चांदी मंगाई और पैकेट में गेंहूं निकला...ऐसी खबरें सुनकर पहले लगता था कि हें, ऐसा सच में होता है?

असल में इसका खरीदारी से मतलब नहीं है, ये तो डिलिवरी एजेंट्स की बदमाशी होती है. हां, कुछ वेबसाइट्स से भी फ्रॉड होता है, लेकिन वो जानीमानी नहीं होतीं हैं और अकल्‍पनीय ऑफर देती हैं. इसलिए ऐसे वेबसाइट से तो सावधान ही रहना चाहिए. हैरानी तब होती है जब ऐसे मामले जानी-मानी शॉपिंग वेबसाइट में देखने को मिलती हैं. अब अमेज़न और फ्लिपकार्ट पर तो लोग भरोसा करते हैं लेकिन एजेंट बीच में धोखाधड़ी कर देते हैं. अब बेचारे जिसे आईफोन के बदले पत्थर या साबुन मिलेगा उसकी हालत तो आप समझ ही सकते हैं.

अब हाल ही में एक मामला सामने आया है. ग्राहक सिमरनपाल सिंह ने फ्लिपकार्ट बिग बिलियन डेज का फायदा लेते हुए 53000 रुपए का Apple iPhone 12 ऑर्डर कर दिया. अब वे बड़ी ही बेसब्री से मोबाइल आने का इंतजार कर रहे थे. भाई साहब हर इंतजार का फल मीठा नहीं होता क्योंकि जब उन्होंने डिलीवरी के बाद आईफोन का बॉक्स को खोला तो दंग रह गए. उस बॉक्स में आईफोन तो था ही नहीं, हां फोन की जगह निरमा साबुन जरूर रखा था. 53000 रुपए के बदले 20 रुपए का साबुन, इ तो बहुत नाइंसाफी है भाई साहब. बस फिर क्या? क्या सोचा था सरदार खुश होगा, शाबाशी देगा? ऐसी हालात में तो बेचारे कमजोर दिलवाले का दौरा ही पड़ जाए.

अब सिमरनपाल को तो ऑनलाइन शॉपिंग की पूरी जानकारी है इसलिए उन्होंने डिलीवरी बॉय को ओटीपी नहीं बताया. इसके बाद उन्होंने फ्लिपकार्ट कस्टमर केयर को फोन कर पूरी बात बताकर शिकायत दर्ज कराई. इसके बाद कंपनी ने गलती स्वीकार करते हुए फोन का ऑर्डर कैंसिल कर दिया है और उनका पूरा पैसा रिफंड कर दिया है. अगर वो ओटीपी शेयर कर देते तो उनकी तरफ से ऑर्डर एकसेप्ट हो जाता. कुछ ऐसा ही गाजियाबाद के रहने वाले वरुण त्यागी के साथ हुआ.

वरुण ने 9 अगस्‍त को अमेजॉन ऐप से 21 हजार का रेडमी नोट 10 प्रो ऑर्डर किया. जिसके बाद 3 से 4 प्रयास में उन्हें डिलीवरी तो कर दी गई, लेकिन मोबाइल के डिब्बे में साबुन निकला. इसके बाद वरुण को को कानून का सहारा लेना पड़ा. मोबाइल बॉक्स में पत्थर निकलने के बाद लोगों का बहुत परेशान होना पड़ता है.

एक तो मेहनत के पैसे गए, फोन भी नहीं मिला और वेबसाइट वालों को यकीन दिलाने के लिए सबूत कलेक्ट करो. मेल करो, कस्टमर केयर को फोन करते रहो, पुलिस में एफआईआर दर्ज कराओ...फिर भी कोई भरोसा नहीं कि आपका पैसा मिलेगा या नहीं...उपर से मेंटल स्ट्रेस, बीवी के ताने, महीने की इएमआई भरते सयम दर्द और अपने पुराने फोन को देखकर चिढ़ आना तो आम बात है.

जिंदगी में दोबारा ऑनलाइन शॉपिंग ना करने की कसम खाना भी शामिल है. लोगों के बीच आपको ठगे जाने के मजाक और पड़ोसियों की मुफ्त वाला ज्ञान...अब जब एक बार प्रोडक्ट आपसे पास डिलवर हो गया तो भले ही पत्थर ही क्यों ना हो, सामने वाले के कस्टमर केयर अधिकारी के लिए वो एक लाख के फोन से कम का नहीं होता.

क्या बरतें सावधानी-

जब भी सामान ऑर्डर करें तो ओपन बॉक्स डिलीवरी का विकल्प जरूर रखें.

ऐसी ई-कॉमर्स कंपनियां चुनें, जिनका खुद का डिलीवरी सिस्‍टम हो.

मोबाइल ऐप से ऑर्डर किया है तो अपने प्रॉडक्‍ट के बारे में मोबाइल ऐप में ट्रैक करते रहें.

सामान की डिलीवरी से पहले किसी भी तरह का कोड कूरियर बॉय को न बताएं.

किसी भी परिस्‍थति में अपना मोबाइल कूरियर बॉय को न दें.

अनबॉक्सिंग का वीडियो शूट कर लें.

कस्टमर केयर से मेल मंगवाए और उनकी कॉल रिकॉर्ड करें.

नोट- ऑनलाइन शॉपिंग की धोखाधड़ी से बचने के लिए कंज्यूमर प्रोटक्शन एक्ट में संशोधन किया गया है. जिसके अनुसार, कंपनियां अपनी जवाबदेही से पल्ला नहीं झाड़ सकतीं. नए नियमों के अनुसार सामान ऑर्डर किए जाने से लेकर ग्राहकों को सही सामान की डिलीवरी होने तक कंपनियों की जवाबदेही तय की गई है.

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लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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