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Updated: 25 जुलाई, 2019 05:41 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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27 मार्च का दिन तो आपको याद ही होगा. अचानक सभी टीवी चैनलों पर एक ही खबर चल रही थी कि कुछ ही देर में पीएम मोदी देश के नाम संदेश देंगे. लोगों ने नोटबंदी से लेकर युद्ध तक के अनुमान लगा लिए थे. और जब पीएम मोदी लाइव आए तो उन्होंने बताया कि देश में इंटी सैलेटेलाइट मिसाइल का सफल परीक्षण कर लिया है. वो परीक्षण जिस खतरे से निपटने के लिए किया गया था, भारत ने अब उस दिशा में कदम आगे बढ़ाने की ठान ली है. भारत ने तय किया है कि अब स्पेस वॉरफेयर एक्सरसाइज की जाए. इसकी तैयारियां भी पूरी हो चुकी हैं और अब 25 और 26 जुलाई को युद्धाभ्यास होना है.

हाल ही में इसरो ने चंद्रयान-2 लॉन्च किया है, जिसकी न सिर्फ भारत, बल्कि पूरी दुनिया में सराहना हो रही है. चंद्रयान-2 को लॉन्च करना इसरो के लिए बहुत ही बड़ी चुनौती था. पहली बार में तो कुछ तकनीकी खराबी आ जाने की वजह से लॉन्चिंग की तारीख भी आगे बढ़ाने पड़ गई थी. हालांकि, दूसरी बार में इसरो ने चंद्रयान-2 को लॉन्च करने में सफलता पा ली. चंद्रयान-2 को लॉन्च कर के इसरो ने एक चुनौती तो पूरी कर दी है, अब स्पेस वॉरफेयर इसरो के सामने दूसरी और सबसे बड़ी चुनौती है.

चंद्रयान 2, स्पेस, इसरो, तकनीकचंद्रयान-2 को लॉन्च करना इसरो के लिए बहुत ही बड़ी चुनौती था. अब स्पेस वॉरफेयर इसरो के सामने सबसे बड़ी चुनौती है.

अब स्पेस से होंगे हमले

हाईलेवल मीटिंग्स में चर्चा हुई कि आने वाले वक्त में करगिल जैसी लड़ाइयां नहीं होंगी. आने वाला वक्त तकनीक से लैस हथियारों का होगा, जिसमें स्पेस में लड़ाइयां होंगी या फिर स्पेस से हमले होंगे. सेना के एक सीनियर अधिकारी की मानें तो चर्चा में ये तय हुआ कि स्पेस की लड़ाई के लिए भारत को अभी से तैयार रहना होगा. इस युद्धाभ्यास से ये पता करने की कोशिश की जाएगी कि अभी भारत कहां पर है और कहां पर कमी है, जिसे पूरा करना बाकी है.

चीन से हुई लड़ाई तो स्पेस पावर दिखानी होगी

मौजूदा समय में स्पेस युद्ध के मामले में अमेरिका, रूस और चीन भारत से आगे निकल चुके हैं. वैसे अमेरिका और रूस से तो भारत के अच्छे संबंध हैं, लेकिन चीन आए दिन किसी न किसी बात कर आंखें दिखाने लगता है. आखिर डोकलाम का विवाद कौन भूल सकता है, जब दोनों देशों की सेनाएं आमने सामने आ चुकी थीं. भविष्य में भी चीन भारत को धमकाने की कोशिश कर सकता है. ऐसी स्थिति का डटकर सामना करने के मकसद से ही आगे का रास्ता तैयार करने के लिए स्पेस वॉरफेयर का प्रैक्टिस की जा रही है.

ये वो वक्त है जब कोई देश स्पेस का इस्तेमाल सिर्फ अपने सैटेलाइट छोड़ने के लिए नहीं कर रहा है, बल्कि उस स्पेस का इस्तेमाल वेपनाइजेशन यानी हथियार तैनात करने और मिलिटराइजेशन यानी सैटेलाइट का इस्तेमाल गाइडेड हथियार की तरह करना जो टारगेट को नष्ट कर सके, के लिए भी हो रहा है. अब धीरे-धीरे वेपनाइजेशन और मिलिटराइजेशन के बीच का अंतर खत्म होता जा रहा है. हर देश स्पेस में अपने हथियार तैनात कर रहा है. ऐसे में किसी मुसीबत की घड़ी से निपटने के लिए आधुनिक स्पेस तकनीक अन्य देशों से मुकाबला करने में मदद कर सकती है. किसी दूसरे देश की जासूसी सैटेलाइट को मार गिराने वाली मिसाइल एसैट तो भारत पहले ही बना चुका है, अब स्पेस में हथियार तैनात कर के देश की सुरक्षा को और सख्त भी किया जाएगा.

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