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Updated: 05 अक्टूबर, 2019 05:03 PM
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लोग कहते हैं जमाना बहुत बदल गया है. जाहिर है ऑनलाइन डेटिंग का जमाना है, लिव इन रिलेशनशिप चल रही हैं, लव अफेयर और लव मैरिज भी बहुत कॉमन हैं, यहां तक कि समलैंगिकता को भी अब अपराध नहीं माना जाता. यानी विचार और मानसिकता बदल रही है और समाज आगे बढ़ रहा है.

लेकिन इस बदलते जमाने की एक चीज अभी तक नहीं बदली है. और वो है arrange marriage. समय के साथ आ रहे बदलावों ने हैरान तो किया है लेकिन तब भी भारत में 95 प्रतिशत शादियां अरेंज्ड होती हैं, क्या ये बात हैरानी वाली नहीं है? सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक सरकार का कहना है कि भारत में आज भी 95% शादियां माता-पिता की मर्जी से ही होती हैं.

Millennials को उनकी सोच और उनके लाइफस्टाइल की वजह से कितना ही दोष दे लें, लेकिन शादी की बात हो तो युवा arrange marriage करना ही पसंद करते हैं. और देशभर में 1500 matrimonial websites बाकायदा चल रही हैं वो इस बात का सबूत हैं. हाल ही में किया गया एक सर्वे बताता है कि 65% युवा आज भी अरेंज मैरिज पर ही भरोसा करते हैं.

arrange marriage 65% युवा आज भी अरेंज मैरिज पर ही भरोसा करते हैं

अब मेरे ऑफिस में काम करने वाली सुचि को ही ले लीजिए. वो आजकल की लड़की है, आत्मनिर्भर है, दिल्ली में अकेली रहती है, अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीती है. वो पब में भी जाती है और डिजाइनर कपड़े भी पहनती है. लेकिन बात शादी की हो तो ये नहीं कहती कि शादी अपनी मर्जी से करेगी. बल्कि कहती है कि लड़का ढूंढने का काम मम्मी-पापा का है.

आखिर क्या वजह है कि आज की आत्मनिर्भर लड़कियां भी शादी अपने माता-पिता की मर्जी से कर रही हैं.

मानसिकता ये है कि 'मम्मी पापा बेहतर समझते हैं'

अपने बच्चे के लिए क्या अच्छा है क्या बुरा ये माता-पिता उसके पैदा होने से पहले ही सोचने लगते हैं. यही उनकी प्राथमिकता होती है. फिर सालों का तजुर्बा, रिश्तों को समझना वो बच्चों से बेहतर जानते हैं. इसलिए बेटियां माता-पिता पर हमेशा भरोसा करती हैं. कई मामलों में तो ये भी होता है कि बेटियां अपने माता-पिता को लेकिर इतनी भावुक होती हैं कि उन्हें अपने प्रेम प्रसंग के बारे में बताकर नाराज नहीं करना चाहतीं. इसलिए अगर लड़का शादी के लिए लड़की को आश्वासन नहीं देता है तो वो उसके लिए अपने पेरेंट्स को दुख नहीं देतीं. और माता-पिता की मर्जी से ही शादी करती हैं, इस विश्वास के साथ कि वो उसके लिए जो भी चुनेंगे, अच्छा ही चुनेंगे.

सही समय पर सही लड़का न मिलना

आज के जमाने में लड़कियां अपने करियर पर ज्यादा फोकस करती हैं और उन्हें पेरेंट्स का भी पूरा सपोर्ट मिल रहा है. ऐसे में या तो वो अपने करियर को लेकर इतनी गंभीर हो जाती हैं कि खुद को खड़ा करने में उन्हें वक्त लगता है. कुछ लड़कियों के ऊपर परिवार की जिम्मेदारी भी होती है, जसके चलते वो अपनी शादी delay करती हैं. आज 30 साल की उम्र में भी लड़कियां सिंगल हैं. और 30 के बाद अगर वो डेटिंग के बारे में सोचें भी तो उन्हें अपने स्तर और उम्र के लड़के मिलने में दिक्कत आती है. तब लड़कियां शादी के लिए माता-पिता पर ही भरोसा करती हैं कि उनके हिसाब से वही अच्छा लड़का खोज सकते हैं.

एक खराब रिलेशनशिप

अब आजकल के जमाने में अफेयर होना कोई अनोखी बात तो रही नहीं. लिहाजा अगर लड़की किसी लड़के का साथ रिलेशनशिप में है, और दोनों के बीच किसी भी वजह से ब्रेकअप होता है तो बहुत स्वाभाविक है कि लड़की सब छोड़कर शादी अपने माता-पिता की मर्जी से करती है. एक बार प्यार में धोखा खाकर वो किसी और पर भरोसा करने से डरती है, तब माता-पिता पर उसका भरोसा और मजबूत होता है. लड़की को लगता है कि वो अपने लिए अच्छा लड़का चुनने में असफल रही. लेकिन माता-पिता जो भी करेंगे सही करेंगे.

marriageबेटियां माता-पिता पर सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं

रिजेक्शन पसंद नहीं

भारत में बेटियों के दिमाग में बचपन से ये भरा जाता है कि उन्हें अच्छा लगना है जिससे शादी के लिए अच्छा लड़का मिले. उसे सुंदर दिखना है जिससे कोई भी अच्छा लड़का उसे पसंद कर ले. लेकिन जब किसी भी वजह से एक लड़की को शादी के लिए एक-दो बार रिजेक्ट कर दिया जाता है तो वो न सिर्फ उस लड़की के लिए बहुत अपमानजनक होता है बल्कि माता-पिता भी दुखी होते हैं कि अच्छा लड़का हाथ से निकल गया. तब लड़की दबाव में आकर किसी के लिए भी हां कर देती है. भले ही वो उसे पसंद हो या न हो.

क्योंकि संस्कार आड़े आते हैं

परवरिश बड़ी चीज है. लड़कों और लड़कियों की परवरिश अलग तरह से होती आई है. लड़कों के लिए कोई बंधन नहीं, लेकिन लड़कियों के लिए बहुत सारे हैं. हमेशा बेटी के लिए फैसला माता-पिता ही करते आए हैं. बेटियों को हिदायत दी जाती है कि लड़कों के साथ घूमना फिरना नहीं है. घर की इज्जत उसके ही हाथों में है. तो लड़कियों को बचपन से पता होता है कि उनकी हदें कितनी हैं. ऐसे में लड़कियां माता-पिता की इच्छा के खिलाफ कुछ भी नहीं करतीं. वहीं बहुत से परिवारों में सजातीय विवाह का भी बहुत दबाव होता है. घर की इज्जत, मान सम्मान का मामला होता है. यानी लड़कियों को पता होता है कि लव मैरिज हमारे घर में संभव ही नहीं है. बड़े शहरों में तो नहीं लेकिन छोटे शहरों में अब भी ऐसा ही होता है. इसलिए लड़कियां अरेंज्ड मैरिज करती हैं.

ये अच्छी बात है कि बेटियां अपने माता-पिता को मान देती हैं और अरेंज मैरिज को चुनती हैं. लेकिन उन्हें भी दोष नहीं दिया जा सकता जो अपनी मर्जी से शादी करने की जिद करती हैं. क्योंकि अगर अरेंज मैरिज अच्छी है तो इसके Side effect भी कम नहीं हैं.

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