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Updated: 30 सितम्बर, 2018 11:34 AM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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दोपहर के 12.30 बज रहे हैं.. अपने दोस्तों से मिलने खूबसूरत सी तैयार होकर वो उस पीजी से निकलती है जहां वो रहती है. नोएडा के एक पॉश इलाके में रहने वाली वो लड़की दिन का पूरा प्लान बना लेती है. शनिवार का दिन होने के कारण वो थोड़ा खुश थी. मेट्रो में जगह भी अच्छी खासी थी. बॉटेनिकल गार्डन से उसने मजेंटा लाइन वाली मेट्रो पकड़ी.

बैठते ही किसी से फोन पर बात करते हुए वो बेफिक्र लड़की व्यस्त हो गई तभी उसकी नजर सामने बैठे लड़के पर पड़ी. ये वो लड़का था जो काफी देर से उसे घूर रहा था और अपना फोन ऊपर नीचे कर रहा था. अचानक कुछ देर के लिए उसके फोन का फ्लैश ऑन हो गया. उसे शक हुआ.. उसने लड़के के पास जाकर पूछने का सोचा, फिर थोड़ा थम गई.. उसे वही डर लगा जो आज शायद हिंदुस्तान के हर कोने में मौजूद लड़की को लग रहा होगा. उसे लगा कि कहीं उसके साथ कुछ गलत न हो जाए, कहीं वो लड़का उसके पीछे न पड़ जाए. उस दिन मेट्रो में लड़कियां भी कम थीं. फिर भी कुछ सोचकर हिम्मत करके वो लड़की उठ खड़ी हुई.

'एक्सक्यूज मी, मुझे आपका फोन देखना है. मुझे लगता है आपने मेरी फोटो खींची है...'

बुलंद आवाज़ में उस लड़की ने कहा. वो लड़का थोड़ा सकपका गया, फिर उसने विरोध किया और लड़ाई करने की सोची पर लड़की की आवाज़ कम नहीं हुई. आखिरकार वो लड़की फोन लेने में कामियाब रही.

मेट्रो, दिल्ली, छेड़छाड़, वीडियो, सोशल मीडिया

फोन की गैलरी खुलवाई गई.. फोन में जो था उससे लड़की के होश उड़ गए. पूरा 40-50 सेकंड का वीडियो जिसमें उसके शरीर के अलग-अलग अंगों को जूम कर-कर के बड़े मज़े से फिल्माया गया था. वीडियो कुछ इस एंगल से बना था कि लड़की को असहज महसूस होने लगा.

लड़की ने फौरन फोन अपने पास रख लिया और चिल्लाने लगी. आस-पास के लोग माहौल देखकर लड़की को ही समझाइश देने लगे.. 'अरे मैडम वीडियो ही तो बनाया है, सॉरी तो बोल रहा है न वो छोड़ो जाने दो' पास बैठे एक अंकल ने बोला.

यही तो हमारे समाज की दिक्कत है, लड़की की गलती गुनाह लगती है और किसी लड़के की गलती को सॉरी के जरिए माफ करने की अपील की जाती है. शायद यही वजह है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध इतने बढ़ रहे हैं.

खैर, लड़की किसी की सुनने वाली नहीं थी. वो लड़की ने अपना पूरा जोर लगाकर चिल्लाया और कहा कि अंकल अभी मैं आपका वीडियो बनाती हूं और वायरल करती हूं आप फिर मुझे बताइएगा कि कितने असहज महसूस कर रहे हैं आप. आस-पास बैठे बाकी भी कुछ बोल न पाए. दोषी लड़का अपना फोन लेने के लिए लड़की के बहुत पास आ गया, लेकिन फिर भी आस-पास बैठे लोग उठने का नाम नहीं लिए, सभी माहौल का मज़ा ले रहे थे. लड़की ने फिर चिल्लाया और इस बार उसकी आवाज़ में गुस्सा ज्यादा था. थोड़ी देर में कालकाजी स्टेशन आया और लड़की सीधे मेट्रो के ड्राइवर के पास गई. वहां से कंट्रोल रूम ले जाया गया. 

कंट्रोल रूम का माहौल कुछ ऐसा था कि कोई भी परेशान हो जाए. पुलिस को बुलाने की बात पर दो घंटे उस लड़की को वहां बैठाए रखा गया. लड़की से कहा गया कि अगर वो गई तो वो ये लिखकर जाए कि वो बाहर कहीं जाकर FIR नहीं करेगी क्योंकि इससे उनके ऊपर बात आ जाएगी. उस लड़की ने वीडियो खुद डिलीट किया ये जानते हुए भी कि ये प्रूफ है, क्योंकि उसे सिस्टम पर भरोसा नहीं था. 

भई अजीब सी बात है ये भी खुद एक FIR करवाने के लिए किसी लड़की को दो घंटे तक इंतज़ार करवाएं और थक हारकर जब वो जाने लगे तो कहें कि रुकिए पहले ये लिखित में दीजिए कि आप कहीं बाहर FIR नहीं करवाएंगी.

लड़की ने जब बिना डरे ये कहा कि पुलिस को बुलाइए और बार-बार दोषी लड़के से उसका आईकार्ड मांगा तब बात सामने आई कि वो दिल्ली मेट्रो का ही एक कर्मचारी था. कंट्रोल रूम वालों ने भी लड़की से कहा कि वो माफी तो मांग रहा है उसे माफ कर दीजिए. बहुत तमाशा हुआ और लड़की अपनी बात से नहीं डरी. जब तक लड़के से लिखित में माफी नहीं मंगवाई.

पर ढाई घंटे बाद 3 बजे तक भी जब पुलिस नहीं आई तो उसे वहां से निकलना ही पड़ा. यहां भी लड़की नहीं डरी, लेकिन उसके घर वाले जो किसी और शहर में थे उन्होंने लड़की को ये मामला यहीं खत्म करने को कहा. उन्हें ये डर था कि कहीं लड़की के साथ कुछ हो न जाए, कहीं कोई उसका पीछा न करे, वक्त रहते ही लड़की अपने ठिकाने पहुंच जाए क्योंकि वो बहुत दूर हैं और किसी भी अनहोनी को दावत नहीं दे सकते.

भारत के हर घर में जहां लड़कियां हैं शायद आजकल के माहौल में उन्हें यही लगता होगा कि लड़कियों को ज्यादा बहस नहीं करनी चाहिए उन्हें मामले को रफा दफा करना चाहिए. घरवालों का ये सोचना भी एक तरह से ठीक है क्योंकि उन्हें सिर्फ अपनी बच्ची की सुरक्षा चाहिए. उन्हें सिर्फ ये चाहिए कि उनकी बच्ची को किसी तरह की कोई तकलीफ न हो. पर कई मामलों में डरने से बेहतर है कि आवाज़ उठाई जाए.

वो लड़की मेरी दोस्त है. उसने अपनी कहानी सुनाई और ये भी कहा कि उसका नाम न बताया जाए या फिर उस दिल्ली मेट्रो में काम करने वाले लड़के का भी क्योंकि वो नहीं चाहती कि किसी की जिंदगी या नौकरी पर उसकी वजह से कोई असर पड़े, लेकिन उसने इतनी हिम्मत तो दिखा दी कि आगे से वो लड़का ऐसी कोई हरकत न करे. इसे कुछ लोग दो ढाई घंटे की परेशानी के तौर पर देखेंगे, लेकिन मैं उस हिम्मत के तौर पर देखती हूं जिसके कारण एक आरोपी को सज़ा मिल सकी.

मेट्रो, दिल्ली, छेड़छाड़, वीडियो, सोशल मीडिया

यकीन मानिए हमें थोड़ी हिम्मत की ज़रूरत होती है. आज से मेरी सहेली के साथ हुआ है कल को किसी और के साथ हो सकता है. सिर्फ एक बार सॉरी बोलने पर अगर उस लड़के को जाने देती तो यकीनन आने वाले समय में उसका हौसला और बुलंद हो सकता था. कंट्रोल रूम का माहौल देखकर अगर वो डर जाती तो यकीनन इसी सिस्टम के आगे वो हार मान लेती, मेट्रो में मौजूद लोगों की बातें अगर वो सुन लेती तो एक और अपराधी हाथ से निकल जाता.

कोई फोटो/वीडियो बिना पूछे ले तो ये करें..

किसी का वीडियो या फोटो बिना उसकी मर्जी के बना लेना कानूनी अपराध है. आर्टिकल 21 में राइट टू प्राइवेसी के बारे में बताया गया है. हालांकि, ये काफी डिटेल में नहीं है. इसके अलावा, अगर किसी महिला को लगता है कि उसका वीडियो या फोटो बिना उसकी जानकारी के लिए लिया गया है और इससे उसकी इज्जत पर कोई भी खतरा हो सकता है तो IPC के सेक्शन 354(Section 354 of IPC (outraging the modesty of a woman) के तहत केस कर सकती है.

बात सिर्फ इतनी सी है कि कोई कहीं भी वीडियो या फोटो बिना आपकी मर्जी के लेता है तो वो कानूनन गलत है. हां, ये इस बात पर भी निर्भर करता है कि वीडियो कहां बनाया गया है, लेकिन पब्लिक प्रॉपर्टी पर अगर ऐसा कुछ हो रहा है तो तुरंत शिकायत करें. हो सकता है आपके एक छोटे से कदम से एक अपराधी को सबक मिल जाए.

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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