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Updated: 24 मई, 2022 05:21 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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कोरोना महामारी के बीच करीब 15 देशों में मंकीपॉक्स ( Monkeypox) बीमारी तेजी से फैल रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी जारी कर दी कि मंकीपॉक्स के मामले उन देशों में भी तेजी से बढ़ सकते हैं, जहां यह बीमारी पहले नहीं फैली है. विश्व स्वास्थ्य संगठन की ये चेतावनी भारत जैसे देश के लिए चिंता का विषय कही जा सकती है. और, मंकीपॉक्स से निपटने के लिए सतर्कता जरूरी है. फिलहाल दुनियाभर में मंकीपॉक्स के करीब 100 मामले ही सामने आए हैं. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, मंकीपॉक्स बीमारी आमतौर पर दक्षिण अफ्रीका के देशों में फैलती है. लेकिन, अमेरिका और इजराइल जैसों देशों में मंकीपॉक्स से संक्रमित लोगों के मिलने से चिंता बढ़ गई है. आइए जानते हैं मंकीपॉक्स से जुड़ी 10 जरूरी बातें...

what is Monkeypoxमंकीपॉक्स वायरस इससे संक्रमित जानवर या इंसान के करीबी संपर्क में आने से ही फैलता है.

क्या है मंकीपॉक्स वायरस?

मंकीपॉक्स वायरस 'चेचक' की तरह ही एक वायरल इन्फेक्शन है. लेकिन, यह चेचक की तुलना में कम गंभीर माना जाता है. मंकीपॉक्स वायरस जानवरों से इंसानों में फैलता है. मंकीपॉक्स वायरस भी चेचक की बीमारी के लिए जिम्मेदार ऑर्थोपॉक्सवायरस के समूह का ही हिस्सा है. यह बीमारी जानवरों से इंसानों में फैलती है. पहली बार 1958 में यह बंदरों में पाया गया था. इसका पहला मामला 1970 में सामने आया था.

मंकीपॉक्स के लक्षण क्या हैं?

मंकीपॉक्स वायरस की चपेट में आने वाले मरीजों को आमतौर पर बुखार, सिरदर्द, बदनदर्द, ठंड लगना, थकान और थकान महसूस होती है. वहीं, गंभीर मामलों में शरीर के अलग-अलग हिस्सों में चेचक की तरह ही दाने निकल आते हैं. ये सभी लक्षण तीन से चार सप्ताह में अपनेआप ही खत्म हो जाते हैं. हालांकि, गंभीर मामलों में जान का खतरा भी बना रहता है. मंकीपॉक्स बीमारी से मृत्यु दर करीब 3-6 प्रतिशत है.

कैसे फैलता है मंकीपॉक्स वायरस?

मंकीपॉक्स वायरस इससे संक्रमित जानवर या इंसान के करीबी संपर्क में आने से ही फैलता है. मंकीपॉक्स वायरस इंसानों में त्वचा के संपर्क (सेक्स), रेस्पिरेटरी डॉपलेट्स के जरिये- आंख, नाक और मुंह से शरीर में प्रवेश कर सकता है.

समलैंगिकों से क्यों जुड़ रहा है मंकीपॉक्स?

स्पेन की राजधानी मैड्रिड में एक सॉना बाथ (भाप का स्नान) में आए लोगों में मंकीपॉक्स सबसे पहले पाया गया था. दरअसल, सॉना बाथ के लिए समलैंगिकों ने आयोजन किया था. जिसके बाद इस कार्यक्रम में शामिल कई समलैंगिक पुरुष मंकीपॉक्स की बीमारी से ग्रस्त पाए गए थे. विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी कहा है कि मंकीपॉक्स से ग्रस्त किसी मरीज के साथ शारीरिक संपर्क (सेक्स) करने वाले लोगों में इस बीमारी के फैलने का ज्यादा खतरा है. इस बीमारी के अधिकतर मामले पुरुषों में ही सामने आ रहे हैं.

मंकीपॉक्स का इलाज क्या है?

मंकीपॉक्स के इलाज के लिए चेचक के ही टीकों का इस्तेमाल किया जाता है. मंकीपॉक्स वायरस को खत्म करने के लिए अलग से कोई वैक्सीन नहीं बनी है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो इस वायरस के लिए अब तक कोई वैक्सीन नहीं बनी है. और, ये फिलहाल लाइलाज बीमारी ही है. लेकिन, विशेषज्ञ मानते हैं कि चेचक के टीकों को मंकीपॉक्स बीमारी के लिए प्रभावी माना जाता है. मंकीपॉक्स वायरस के मरीजों को आइसोलेशन में रखे जानी की सलाह दी जाती है. और, उनसे किसी भी तरह के करीबी संपर्क में आने से बचने की भी सलाह दी जाती है.

क्यों चिंता बढ़ा रहा है मंकीपॉक्स का फैलना?

WHO के अनुसार, मंकीपॉक्स वायरस से संक्रमित लोगों की बड़ी संख्या दक्षिण अफ्रीका के देशों से ही सामने आती थी. लेकिन, अभी तक सामने आए मामलों में किसी भी तरह से दक्षिण अफ्रीकी देशों का कनेक्शन नजर नहीं आया है. जो चिंता बढ़ाने वाला कहा जा सकता है. इजरायल जैसे देश में भी मंकीपॉक्स वायरस के संक्रमित का सामने आना चौंकाता है. दक्षिण अफ्रीका के कांगो में सालाना 6000 मामले सामने आते हैं. नाइजीरिया में हर साल 3000 मामले रिपोर्ट किए जाते हैं.

क्या भारत में फैल सकता है मंकीपॉक्स?

अब तक मंकीपॉक्स वायरस को लेकर सामने आई जानकारी में इसके बड़ी आबादी को अपनी चपेट में लेने की संभावना कम ही नजर आती है. हालांकि, भारत में समलैंगिकों को एहतियात बरतने की आवश्यकता कही जा सकती है. खासकर ऐसे मामलों में जहां हालिया विदेश यात्रा का कोई मामला हो.

क्या कोरोना जितना ही खतरनाक है मंकीपॉक्स?

WHO के अनुसार, मंकीपॉक्स वायरस कुछ लोगों गंभीर हो सकता है. और, बच्चे, गर्भवती महिलाएं और कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग इसका आसान निशाना हो सकते हैं. लेकिन, मंकीपॉक्स वायरस कोरोना वायरस की तरह से तेजी से फैलने वाला वायरस नहीं है. तो, इसे एक बहुत बड़ी आबादी के लिए खतरे के तौर पर नहीं देखा जा सकता है. तीन से चार सप्ताह में यह खुद ही खत्म हो जाता है. हालांकि, गंभीर मामलों में इसकी देखरेख जरूरी है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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