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Updated: 28 अप्रिल, 2021 11:22 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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नाइट कर्फ्यू में कोरोना गाइडलाइन का पालन न करने पर जिलाधिकारी शैलेश कुमार यादव (Tripura DM Shailesh Kumar Yadav) ने दो मैरिज हॉल को सील कर दिया और शादी समारोह (marriage party in night curfew) को रुकवा दिया. उनकी कार्रवाई का वीडियो सार्वजनिक होने के बाद कंट्रोवर्सी हो गई. उन पर शादी में शामिल लोगों के साथ अभद्रता करने का आरोप लगा. नतीजे में उन्हें माफी मांगना पड़ी. हालांकि, सोशल मीडिया अब इसमामले में पूरी तरह विभाजित हो गया है. एक पक्ष उन्हें सिंघम कह रहा है, तो दूसरे उन्हें सस्पेंड करने की मांग कर रहा है.

दरअसल, हम भारतीयों की एक आदत है हम बस बोलते रहते हैं. हर चीज में कमी ढूंढने के हम आदी है. अगर कोई काम नहीं कर रहा है तो भी हमें परेशानी होती है और कोई काम कर रहा होता है तो भी हम दिक्कत में आ जाते हैं. हम हमेशा दूसरों पर इल्जाम लगाने के लिए तैयार रहते हैं. किसी गलती की जिम्मेदारी अपने ऊपर लेना तो हमें आता नहीं है.

पश्चिम त्रिपुरा डीएम शैलेश west tripura dm shailesh त्रिपुरा डीएम tripura dmडीएम ने माफी मांगते हुए कहा, मेरा इरादा किसी को आहत करने का नहीं था

क्यों क्या लगता है, अगर हर भारतीय कोरोना प्रोटोकॉल (corona protocol) का ईमानदारी से पालन करता तो क्या आज ये दिन देखने को मिलता? ऐसा कहने से आप यह मत समझ लेना कि हम इस महामारी (covid-19 infection) को नहीं झेल रहे हैं. हमारे अपने घरवाले, दोस्त, रिश्तेदार, पड़ोसी और सहकर्मी सभी इस तकलीफ से गुजर रहे हैं.

सरकार की बात तो छोड़ दीजिए, लेकिन हमने जो किया क्या हमें याद है? कोरोना महामारी (covid-19 infection) में थोड़ी गिरावट आई तो हमने घूमने का प्लान बना लिया. हमने सबको इकट्ठा करके त्योहार सेलिब्रेट किए. हम दोस्तों से मिलने बाहर गए. मॉल, बाजार, रेस्त्रां, पब सबके साथ पार्टी करने गए. बर्थडे पार्टी, शादी सब हमने साथ में मनाया, इस दौरान कई लोगों ने मास्क को अलमारी में रख दिया.

हम यह नहीं कह रहे कि ऐसा बोलने से सिस्टम की गलतियों पर पर्दा पड़ जाएगा, लेकिन जब अधिकारी अपनी ड्यूटी करते हैं तब भी हमें दिक्कत होती है. त्रिपुरा के डीएम डॉ. शैलेश यादव (tripura dm shailesh yadav) ने शादी समारोह में कोविड प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की. उन्होंने दूल्हे (groom and bride) को भगा दिया और दुल्हन को भी स्टेज से उतरने के लिए कहा.

डीएम (tripura dm) ने मैरेज हॉल (marriage hall) में मौजूद दूल्हा-दुल्हन समेत सभी लोगों के खिलाफ आपदा प्रबंधन एक्ट और अन्य मामलों के तहत केस दर्ज किया और 30 लोगों को हिरासत में लिया. इसके साथ ही कोरोना गाइडलाइन का पालन नहीं करने पर दो मैरिज हॉल को सील कर दिया.

इसकी एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई. जिसके बाद नाइट कर्फ्यू में शादी के खिलाफ एक्शन लेने वाले डीएम को लोगों ने आड़े हाथों लिया और सोशल मीडिया पर आलोचना शुरू कर दी. नतीजे में उन्हें माफी मांगना पड़ी.

जब पिछले साल कोरोना की शुरुआत हुई थी तभी कई प्रदेशों ने यह नियम बनाया था कि शादी में 50 से अधिक लोग शामिल नहीं होंगे, लेकिन हम तो महान लोग हैं, ये नियम तो हमारे शान के खिलाफ है. इसलिए भर-भर के भीड़ शादियों में इकट्ठा हुई, कोई नहीं माना.

अरे जब रात 10 बजे बाद शादियों में डीजे बंद हो जाता है तो लोग ऊपर तक पहुंच है बताकर, दोबारा गाना चालू करवा देते हैं, क्योंकि हमारे यहां हर काम में जुगाड़ बहुत चलती है. वो सभी नियम हमें बेकार लगते हैं जो हमारी भलाई के लिए होते हैं. जब हम मुसीबत में फंसते हैं तो दूसरों को कोसना शुरू कर देते हैं.

त्रिपुरा डीएम को लेकर भी लोग अलग-अलग बातें कर रहे हैं, कुछ लोगों का कहना है कि यह आपने ठीक नहीं किया डीएम साहब. कई लोगों ने डीएम के व्यवहार की आलोचना की. वो भी तब जब त्रिपुरा में भी कोरोना संक्रमण की रफ्तार तेज है.

यहां हर दिन औसतन कोरोना संक्रमण के 100 नए केस सामने आ रहे हैं और राज्य में 1,000 से अधिक मरीजों की देखभाल करने के लिए अस्पताल में बुनियादी ढांचा नहीं है. बढ़ते कोरोना संक्रमण के मद्देनजर अगरतला नगर निगम (AMC) क्षेत्रों में 22 से 30 अप्रैल तक रात 10 बजे से सुबह 5 बजे तक नाइट कर्फ्यू है.

चौतरफा सवालों से घिरे डीएम शैलेश कुमार यादव ने आखिरकार माफी मांगते हुए यह कहा कि उन्होंने किसी की भावना आहत करने के लिए ऐसा नहीं किया है.

वहीं कई लोगों ने डीएम को सही बताया है, एक ने लिखा है कि 'कठिन वक्त पर कठिन फैसले लेने पड़ते हैं. उम्मीद करता हूं कि ऐसे ही सख्त कार्रवाई दूसरे धार्मिक आयोजनों पर भी हो.'

एक दूसरे यूजर ने लिखा, 'ग्रेट वर्क बाय डीएम वेस्ट त्रिपुरा.' लेकिन कई लोग यह कह रहे हैं कि अगर शादी किसी नेता या अधिकारी के घर होती क्या तब भी डीएम ऐसे ही एक्शन लेते...या फिर मिडिल क्लास ही इनको दिखता है. आप इस बारे में क्या सोचते हैं, कमेंट करके जरूर बताएं.

यदि सड़क दुर्घटना होती है तो यातायात की बदइंतजामी के लिए पुलिस को कोसा जाता है. यदि वही पुलिस यातायात के नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई करती है तो उस पर ऐसा न करने के लिए दबाव बनाया जाता है. दरअसल, यह हमारी आदत का हिस्सा है, कई बार कुछ लोग सही कामों में भी कमी निकालते हैं और जब गलत होता है तब तो बोलना ही है. हम बस बोलते ही तो हैं, खुद पर कोई नियम लागू करना हमने सीखा ही नहीं!

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लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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