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Updated: 01 अक्टूबर, 2018 02:02 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में मल्टीनेशनल कंपनी के एरिया सेल्स मैनेजर विवेक तिवारी की हत्या में एसआईटी ने जांच शुरू कर दी है. पहले विवेक को गोली मारने वाले पुलिसवाले सवालों के घेरे में आए और अब एसआईटी की जांच भी कठघरे में खड़ी नजर आ रही है. वहीं दूसरी ओर, लखनऊ और वाराणसी में इस मामले को लेकर पोस्टर तक लगने लग गए हैं. इन पोस्टर में लिखा हुआ है- 'पुलिस अंकल आप गाड़ी रोकेंगे तो पापा रुक जाएंगे, प्लीज गोली मत मारियेगा.' पोस्टर में सबसे ऊपर लिखा है- 'विवेक तिवारी अमर रहें.' हर गुजरते दिन के साथ इस मामले में नए पन्ने खुलते जा रहे हैं. साथ ही सियासी गलियारे में राजनीतिक बहस भी शुरू हो गई है.

विवेक तिवारी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश, पुलिस, योगी आदित्यनाथइस पोस्टर को बाल गायिका अंशिका सिंह ने तैयार किया है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है.

पोस्टर दिखाता है पुलिस का खौफ

बच्ची के हाथ में दिख रहा ये पोस्टर साफ दिखाता है कि आम आदमी के मन में पुलिस को लेकर कैसा खौफ समाया हुआ है. इस पोस्टर को बाल गायिका अंशिका सिंह ने तैयार किया है, जो अब सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है. विवेक तिवारी की भी दो बेटियां हैं और ये पोस्टर बेटी-पिता के रिश्ते के संदर्भ में ही बनाया गया है. इंटरनेट के अलावा ये पोस्टर आपके लखनऊ की सड़कों पर दौड़ रही तमाम गाड़ियों पर चस्पा हुआ भी मिलेगा. लोगों में विवेक तिवारी की हत्या को लेकर गुस्सा भी है और दूसरी ओर इस बात का डर भी है कि कहीं वह भी ऐसी ही किसी घटना का शिकार ना हो जाएं.

विवेक तिवारी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश, पुलिस, योगी आदित्यनाथलखनऊ में गाड़ियों पर विवेक तिवारी की हत्या के मामले को लेकर पोस्टर तक लगने लग गए हैं.

गंभीरता भूल लापरवाह बनी एसआईटी

विवेक तिवारी की हत्या के मामले में जो एसआईटी बनाई गई है, उसके काम में भी लापरवाही देखी जा रही है. रविवार को एसआईटी गोमतीनगर एक्सटेंशन के पास घटनास्थल पर पहुंची और वहां पर क्राइम सीन को रीक्रिएट किया गया. लेकिन इस दौरान न तो कार को डमी के तौर पर रखा गया ना ही बाइक को. साथ ही, चश्मदीद गवाह सना खान भी क्राइम सीन पर मौजूद नहीं थीं, जो घटना के वक्त विवेक के साथ गाड़ी में ही मौजूद थीं. इतना ही नहीं, शनिवार दोपहर बाद से घटनास्थल से सुरक्षा पट्टी हटा दी गई थी. ये सब देखकर तो यूं लग रहा है मानो पुलिस खुद ही नहीं चाहती है कि इस मामले का सच बाहर आए. इस मामले में विवेक की पत्नी और लखनऊ के एडीजी राजीव कृष्णा सीबीआई जांच की मांग भी कर रहे हैं.

पुलिसवाले हुए एकजुट

विवेक तिवारी के भाई ने आरोप लगाया है कि पुलिसवाले आरोपी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं. अगर एसआईटी की जांच को ही देखा जाए तो इसमें हुई लापरवाही भी इसी ओर इशारा कर रही है. वहीं आरोपी की मदद के लिए अन्य सिपाही लामबंद भी होने लगे हैं. सोशल मीडिया पर पुलिस वाले आरोपी के परिवार को आर्थिक मदद मुहैया कराने के लिए अभियान भी चला रहे हैं. लोगों ने आरोपी के मेरठ स्टेट बैंक के खाते में पैसे भेजना शुरू भी कर दिया है.

आपको बता दें कि विवेक तिवारी शुक्रवार को देर रात अपने घर लौट रहे थे, तभी रास्ते में बाइक सवार यूपी पुलिस के कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी ने उन्हें रोकने की कोशिश की. प्रशांत के मुताबिक विवेक ने गाड़ी नहीं रोकी और उन पर चढ़ाने की कोशिश की, जिसके बाद अपने बचाव में उन्होंने गोली चलाई, जो सीधे विवेक के सिर में जा लगी. हालांकि, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के मुताबिक गोली बेहद नजदीक से चलाई गई बताई जा रही है.

इस मामले में आरोपी पुलिसवाले की तरफ से कई दावे किए गए, जो सवालों के घेरे में हैं. अभी तक मामले की तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं हुई है. इस मामले की सही तस्वीर सामने लाने के लिए पुलिस घटनास्थल के आस-पास की इमारतों पर लगे सीसीटीवी कैमरों को भी छान रही है. जिस तरह हर घटना में राजनीति होती है, वैसे ही इस घटना में भी राजनीति खूब हो रही है. अब ये देखने वाली बात होगी कि विवेक हत्याकांड का सच सामने आएगा या फिर ये मामला भी राजनीति की भेंट चढ़ जाएगा.

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