charcha me | 

होम -> समाज

 |  6-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 17 अप्रिल, 2019 04:33 PM
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa
  • Total Shares

एक तो स्मार्ट फोन ने पहले ही सबको बर्बाद कर रखा था, और जो थोड़ी कसर रह गई थी वो टिक टॉक जैसे एप्प ने पूरी कर दी थी. जैसे ही ये एप्प आया, यूं लगा जैसे दुनिया के सारे निकम्मे लोग काम पर लग गए हों. पर सुप्रीम कोर्ट ने इस एप पर बैन लगाकर अगली पीढ़ी को बर्बाद होने से बचा लिया है. कम से कम मैं तो बहुत खुश हूं. और मेरे खुश होने की कई वजह हैं.

शुरुआत में मैंने देखा कि हर कोई टिकटॉक पर वीडियो बनाने पर तुला हुआ था. पहले तो मैंने इसमें सिर्फ कुछ युवाओं को वीडियो बनाते हुए देखा था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीता और लोगों को इस एप्प के बार में पता चला, बच्चे क्या उनके माता-पिता सब मिलकर इस एप पर अपनी क्रिएटिविटी दिखाने लग गए.

बेहुदा कंटेट की भरमार

युवाओं के जोश के बारे में तो में तो क्या ही कहा जाए, उन्हें तो हर नई चीज ट्राय करनी होती है. लेकिन हैरानी तब हुई जब मैंने एक छोटे से बच्चे का वीडियो देखा जो मां-बहन की गाली दे रहा था. उसपर बहुत लाइक्स थे. बच्चा बहुत छोटा था जो गालियों का मतलब भी नहीं जानता था. फिर भी उससे वो बुलवाया जा रहा था. और उसे सो क्यूट जैसे कमेंट मिल रहे थे.

tiktok banअब टिक टॉक पर बैन लगा दिया गया है

कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता और फूहड़ता

कॉमेडी वीडियो का तो कहना ही क्या सिर्फ टिक टॉक पर नहीं इन्हें शेयर कर कर के लोगों ने वाट्सएप्प भर डाला. कॉमेडी के नाम पर कुछ भी भद्दा परोसा और शेयर किया जाता है. मुझे इन वीडियो को देखखर हंसी नहीं सिर्फ गुस्सा आता है. और मन में तुरंत ये सवाल आता कि इसे बनाने वाले से लेकर इसे शेयर करने वालों तक के सोचने समझने का स्तर किस तरह का है. कॉमेडी के नाम पर अश्लीलता और फूहड़ता फैलाने में मजा कैसे आता है लोगों को?

खुद की मजाक बनाने तक भी सही है, लेकिन ऐसे वीडियो की भी कमी नहीं है जहां अजीबो गपीब फिल्टर लगाकर पब्लिक प्लेस में वीडियो शूट कर लिया जाता है और पब्लिक को डरावना और भद्दा दिखाया जाता है. लोग समझ ही नहीं पाते कि कोई उनका वीडियो बनाकर फिल्टर लगाकर इस तरह प्रचारित कर रहा है. जरा देखिए ये वीडियो एक ट्रेन में बनाया गया जहां महिलाओं के चेहरों पर फिल्टर लगा हुआ है.

tiktok banये पब्लिक प्लेस में बनाए वीडियो हैं

लड़कियों का ये रूप जरा भी अच्छा नहीं

हमारे देश की लड़कियां कितनी प्रगति कर रही हैं और कितनी स्वतंत्र और सशक्त हैं ये आप टिकटॉक पर देख सकते हैं. ये फिल्मी गानों पर जिस तरह के भाव देती हैं, अपनी फिगर दिखाती हैं, ठुमके लगाती हैं, स्वैग दिखाती हैं उससे तो जरा भी नहीं लगता कि इन लड़कियों को भारत में डरने की जरूरत है. वो अपने चेहरे को बेतहाशा खराब और बदसूरत दिखाने में भी गुरेज नहीं करतीं, क्योंकि लाइक्स का सवाल है.

tiktok banचंद लाइक्स के लिए अपना मजाक भी उड़वा रहे हैं लड़कियां

लड़कियों को अपने घरवालों का डर है क्योंकि वीडियो सबसे छिपकर बाथरूम में शूट किया जा रहा है, पर दुनिया के सामने आने में उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता. फेसबुक पर एक लड़के ने कमेंट किया था कि 'लड़कियां टिकटॉक जैसे एप्प पर कुछ भी करती हैं लेकिन बाहर जब लड़के उन्हें छेड़ते हैं तो इन्हें दिक्कत होती है'

युवाओं से ये उम्मीद नहीं

ये टीनेजर्स हैं जो कहीं पढ़ भी रहे होंगे. लेकिन इनके वीडियो को देखकर इनके भविष्य की कल्पना भी की जा सकती है. अफसोस की ये बच्चे और युवा वो कर रहे हैं जिसकी इनसे उम्मीद नहीं है. इस ऐप के जरिए उन्हें ये समझ आ रहा है कि बिना मेहनत किए कैसे ठुमके लागकर, आखें मटकाकर, बॉडी दिखाकर ज्यादा से ज्यादा लाइक्स और शेयर जुटाए जाते हैं और कैसे इस तरह पैसा कमाया जा सकता है. टिकटॉक तो इसके लिए पैसा भी देता है. इसलिए अपना करियर बनाने सब यहीं ढेरा जमाए हैं. लेकिन इस तरह से भविष्य नहीं बनता. 

अश्लील सामग्री की भी भरमार

अश्लील सामग्री तो इतनी है कि कहना ही क्या. लिप-सिंक्ड वीडियो और म्यूजिक वीडियो के अलावा आप यहां द्विअर्थी संवादों वाले वीडियो और अश्लील चुटकुले सुन सकते हैं. और तो और इस एप्प पर एडल्ट कंटेंट प्रसारित करने पर कोई रोक-टोक भी नहीं थी. बच्चे भी देखकर समझदार हो रहे थे. फेसबुक और यूट्यूब पर लड़कियों के वीडियो सेक्सी, हॉट, कड़क जैसे शब्द लिखकर खूब वायरल होते हैं.

tiktok banइस तरह वीडियो फेसबुक पर दिखाई देते हैं

बैन एक समझदार फैसला

लेकिन कुछ समझदार लोगों ने पहली की और Tik Tok पर पोर्नोग्राफी को बढ़ावा देने के आरोप लगाए गए. मामला अदालत तक पहुंचा. मद्रास हाई कोर्ट ने कहा कि ये ऐप बच्चों पर बुरा असर डालते हुए पॉर्नोग्राफी को बढ़ावा दे रहा है और यूजर्स को यौन हिंसक बना रहा है. इसपर टिकटॉक ने करोड़ों ऐसे वीडियो डिलीट किए जो भारतीय मानकों के हिसाब से ठीक नहीं थे. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गूगल और ऐपल ने अपने-अपने प्लेटफॉर्म से इस एप को हटा लिया है.

अगर Tik Tok को एक बीमारी कहा जाए तो इस बीमारी से दुनिया के करीब 1 अरब से ज्यादा लोग पीड़ित हैं. और भारत में Tik Tok के बीमारों की संख्या करीब 25 करोड़ है. पिछले एक साल में देश में टिक टॉक यूजर्स में 33.5 फीसदी की बढ़त देखने को मिली है. यानी बैन से इस चीनी कंपनी को घाटा जरूर होगा. बहरहाल अब ये एप गूगल और ऐपल पर दिखाई नहीं देगा. इस एप पर लगाम लगनी चाहिए थी जो लग गई. लेकिन जो लोग Tik Tok को पहले से इस्तेमाल कर रहे हैं वो करते रहेंगे. यानी जितने लोगों का सत्यानाश होना था हो चुका अब औरों का नहीं होगा. लेकिन इस बैन से ये भी साफ होता है कि जो 25 करोड़ लोग इसपर वक्त बर्बाद करते थे वो इसी तरह करते रहेंगे. और हम इसी तरह पकते रहेंगे. बेहतर ये हो कि इसपर प्रसारित होने वाले कंटेंट को फिल्टर किया जाए. और ये वीडियो सिर्फ इसी एप तक सीमित रहें, बाहर शेयर न किए जा सकें. क्योंकि टिकटॉक के वीडियो हर सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म पर शेयर होते हैं.

और हां, अंत में एक बात जरूर कहना चाहूंगी कि अगर आप सच में चाहते हैं कि आपके बच्चे इस एप से दूर रहें तो बस एक बार उनके फोन से ये ऐप डिलीट कर दें. फिर दोबारा कभी वो इसे डाउनलोड नहीं कर पाएंगे. 

ये भी पढ़ें-

याद रखिये फेसबुक के लाइक और ट्विटर के ट्वीट से कहीं ऊपर देश की सुरक्षा है...

आखिर क्यों बैन कर दिए जाते हैं वायरल एप्स?

 

#टिकटॉक, #प्रतिबंध, #चीन, Tik Tok, Tiktok Ban, Social Media

लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय