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Updated: 23 जनवरी, 2018 09:20 PM
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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2018 का स्वागत भारत ने कई नए इतिहास रचने से किया. सबसे पहले तो भारत का 100वां सैटेलाइट लॉन्च हुआ, दूसरा ये कि डावोस में WEF (वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम) में भारत का सम्मान हो रहा है. दुनिया के सामने भारत के नेत्रित्व का सम्मान हो रहा है और दूसरी तरफ आन, बान, शान और संस्कृति को लेकर भारत में कोहराम मच रहा है. नहीं, फिलहाल मैं पद्मावत की बात नहीं कर रही.

पुणे में एक शादी में तीन युवकों की जमकर पिटाई कर दी गई. पिटाई के लिए बेल्ट, कुर्सियां, लड़की, मुक्के, लात, सबका इस्तेमाल किया गया. ये मौका था कंजारभट समाज की एक शादी का जहां तीन नौजवानों की पिटाई सिर्फ इसलिए कर दी गई क्योंकि वो समाज की एक बहुत पुरानी प्रथा 'वर्जिनिटी टेस्ट' का विरोध कर रहे थे. सिर्फ इसलिए 40 लोगों ने मिलकर बेरहमी से तीन नौजवानों की पिटाई कर दी.

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ये वही कंजारभट समाज है जहां लड़कियों की वर्जिनिटी का फैसला पंचायत करती है. जहां शादी की रात को सफेद चादर का खून से मैला होना एक शुभ संकेत माना जाता है. ये वही समाज है जिसने पिछले साल एक पुलिस ऑफिसर बनने का सपना देखने वाली लड़की को कई दिनों तक कमरे में बंद रखा था. कारण था वो वर्जिनिटी टेस्ट में फेल हो गई थी और उसके पति ने उसे शादी के 48 घंटों बाद ही छोड़ दिया था.

लड़की पुलिस ऑफिसर बनने के लिए कड़ी मेहनत कर रही थी और कड़ी फिजिकल एक्सरसाइज करने के कारण उसे शादी की रात ब्लीडिंग नहीं हुई थी. उसे कमरे में बंद कर रखा गया था क्योंकि वो इसकी शिकायत कर सकती थी. इस मामले में जब दबाव बनाया गया तो लड़की को पति ने वापस अपना लिया, लेकिन अगर देखा जाए तो इस समाज की मानसिकता तो नहीं बदली.

हाल ही की पिटाई वाली घटना इसलिए हुई क्योंकि प्रशांत इंद्रेकर, सौरभ मच्छाले और प्रशांत तामचिकर ने ‘Stop the V ritual’ नाम से एक ग्रुप बनाया था. ये ग्रुप बनाया गया था वर्जिनिटी टेस्ट की इस बुरी परंपरा को खत्म करने के लिए.

क्या है इस समाज की परंपरा...

क्विंट की एक रिपोर्ट के मुताबिक इस समाज में शादी की रात को पति को एक सफेद चादर दी जाती है जो सुहागरात के समय पति को पत्नी के साथ संबंध बनाते वक्त बिछानी होती है. अगले दिन पंचायत पति से पूछती है कि क्या पत्नी ठीक थी. इस मामले में पति को तीन बार दोहराना होता है कि 'माल खरा है'.. (यहां माल मतलब पत्नी.. यही एक घिनौनी बात है)

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अगर पति ऐसा नहीं करता तो पत्नी से पूछा जाता है कि उसने अपनी वर्जिनिटी किसे दी. साथ ही साथ दोनों को जुर्माना देना होता है. ये जुर्माना अलग-अलग जोड़ों के हिसाब से तय किया जाता है.

यानि ये सीधा-साधा धंधा ही हुआ. बस अगर माल खरा है तो पैसे नहीं देने होंगे और अगर खरा है तो पैसा देकर जुर्माना भरना होगा. पति की वर्जिनिटी टेस्ट करने का ऐसा कोई तरीका नहीं है. पत्नी दहेज में भी पैसे दे, पत्नी खरी साबित न हुई तो भी पैसे दे और पंचायत इसका फायदा उठाए. कई बार तो एक जोड़े से शादी अप्रूव करने के लिए भी पंचायत पैसे लेती है. और यही अभी हो रहा था. सिर्फ शादी अप्रूव करवाने के लिए 10 हज़ार रुपए लिए जा रहे थे और इसी को इंद्रेकर और उसके साथियों ने फोन में रिकॉर्ड कर लिया.

सोचने वाली बात ये है कि जिस हिंदुस्तान को अपने 100वें सैटेलाइट स्पेस में भेजने पर गर्व है, उस पढ़े-लिखे समाज में अभी भी ये वाहियात बातें होती हैं. न खुद कुछ करो और अगर कोई कुछ अच्छा कर रहा है तो उसे करने मत दो. भई वाह!

एक कुप्रथा के नाम पर समाज के दबंग अपने हिसाब से कुछ भी करते रहें? सोच बदलना है ये सभी कहते हैं, लेकिन सभी नए समाज का निर्माण करना चाहते हैं ये सही नहीं है. सिर्फ कुछ ही लोग हैं जो बदलाव लाना चाहते हैं, लेकिन उन कुछ लोगों को न ही काम करने दिया जाता है और अगर कोई हिम्मत कर आगे भी बढ़ना चाहे तो उसे इसी तरह दबा दिया जाता है. भारत वाकई एक एक्सट्रिमिस्ट देश है जहां विज्ञान के सहारे आगे भी बढ़ा जा रहा है, जहां अर्थव्यवस्था के कारण तारीफ भी होती है और जहां संस्कृति के नाम पर न जाने कितने बेगुनाह बली चढ़ जाते हैं.

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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