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Updated: 13 अक्टूबर, 2020 03:54 PM
नवीन चौधरी
नवीन चौधरी
  @choudharynaveen
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मुसलमानों का एक बहुत बड़ा हिस्सा कट्टरपंथी है. अब हिंदुओं का एक हिस्सा भी पूरा ज़ोर लगाए हुये हैं कि कट्टरपंथ और मूर्खता में वह मुसलमानों को पीछे छोड़ दे. जिस तरह कट्टरपंथी मुसलमानों को हर जगह काफिर और इस्लाम के दुश्मन नजर आते हैं वैसे ही इस हिस्से को मुसलमान हिन्दू दिखते ही हिन्दुत्व पर खतरा दिखता है. तनिष्क का विज्ञापन आज देखा. प्रॉडक्ट प्लेसिंग, सोशल मैसेज, कल्चरल एलीमेंट, विडियोग्राफी सब कुछ बहुत शानदार है. एडवर्टाइजिंग और मेसेजिंग के नजरिये से यह एक बहुत ही खूबसूरत विज्ञापन है. फिर भी विरोध के तर्क क्या हैं? यह लव जिहाद को बढ़ावा दे रहा है.कैसे भाई? लव जिहाद की जो थ्योरी बताई है उसमें तो लड़की का धर्म परिवर्तन हो जाता है ना? यहां तो लड़की हिंदू ही है और हमारे ही रीति-रिवाज़ को माना जा रहा है.

Tanishq, Advertisement, Dispute, Hindu, Muslim, Love Jihadतनिष्क के विज्ञापन ने एक बार फिर समाज को दो वर्गों में बांट दिया है

दूसरा तर्क पढ़ा कि तनिष्क हिंदू बहू की जगह मुसलमान बहू क्यों नहीं दिखाता? अगर दिखाता तो फतवा जारी हो जाता. यानि आप ये कह रहे हैं कि हिंदू परिवार में मुसलमान लड़की को देखते ही कट्टर इस्लामिक बवाल काट देते. सही कह रहे हो और मैं सहमत हूं कि ऐसा ही होता. बस मुझे ये समझ नहीं आ रहा कि आपने क्या अलग किया. आप भी तो वही कर रहे हैं जो मुसलमान कट्टरपंथी करते.

मैं एक हिंदू हूं और मुझे अपने धर्म पर विश्वास और गर्व दोनों है क्योंकि मुझे अपने धर्म की जीवनशैली काफी संतुलित लगती है. हमारा धर्म किसी के विरोध में नहीं बना है. हमारे राम शबरी के जूठे बेर खाते हैं, कृष्ण ग्वाले के अलावा और सबके आराध्य हैं. हम कर्म के आधार पर लोगों को मानते हैं लेकिन समय के साथ उसी धर्म को हम भूल रहे हैं. जो हिंदू धर्म मैंने जाना है उसमें हमें दूसरे से तब तक बैर नहीं जब तक वह हम पर हमला न करे. जिस हिंदू धर्म को मैंने जाना है उसमें सब का समावेश है.

धर्म कहता है कि कोई आपके धर्म पर हमला करे तो जवाब दो, लेकिन यह विज्ञापन हमला नहीं है धर्म पर. यह विज्ञापन धर्म की एक रीति के खिलाफ नहीं बोल रहा बल्कि उसका सम्मान करते हुये दिखा रहा है. इस विज्ञापन का मुस्लिम परिवार भी उस रीति को हिंदू तरीके से मना रहा है. फिर विरोध किस बात का है? इस बात का कि दो धर्म के लोग एक दूसरे के रीति-रिवाजों का सम्मान कर रहे हैं? मित्रों अगर आपका विरोध इस कारण से है तो मुझे ये समझाओ कि मैं आपमें और उस फतवा जारी करने वालों में मैं कैसे फर्क करूं? दोनों में टीका और टोपी का ही तो फर्क है.

अब ये आकर मत कहिएगा कि मुसलमानों ने ये किया वो किया। मेरे लिए उनका कट्टरपंथ पैमाना नहीं अपने धर्म को मापने का. मैं अपने धर्म को कट्टरपंथियों के हाथ में नहीं देख सकता इसलिए आपकी गलत बातों को हिन्दुत्व के नाम पर नहीं सुन सकता.

और हां लोग समझा रहे हैं कि यह विज्ञापन माइंडवाश है. अगर यह लव जिहाद को समर्थन ही दे रहा है तो मुसलमानों को भी हिंदू बहू को हिंदू ही रहने देने का संदेश दे रहा है. ठीक है मुसलमानों को नहीं समझ आएगा पर तुम्हारा माइंड इतना कमजोर क्यों है कि एक विज्ञापन से वॉश हो जाए.

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लेखक

नवीन चौधरी नवीन चौधरी @choudharynaveen

लेखक मार्केटिंग प्रोफेशनल हैं और 'जनता स्टोर' नाम की किताब के ऑथर हैं

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