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Updated: 15 जुलाई, 2018 05:06 PM
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujkumarmaurya87
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राजस्थान सरकार ने कॉन्स्टेबल भर्ती परीक्षा को नकल रहित बनाने के लिए बेहद सख्त कदम उठाया है. सरकार ने पूरे राज्य में इंटरनेट सेवाएं ही बंद कर दी हैं, ताकि ऑनलाइन पेपर लीक जैसी दिक्कतों से निपटा जा सके. आपको बता दें कि इससे पहले मार्च में यह परीक्षा ऑनलाइन आयोजित की थी, जिसमें बड़ी धांधली का भंडाफोड़ हुआ था और परीक्षा रद्द तक करनी पड़ गई थी. सरकार ने नकल रहित परीक्षा आयोजित करने के लिए इतना सख्त कदम तो उठा लिया, लेकिन इसकी वजह से कई तरह की दिक्कतें भी हुईं. जहां ओर करोड़ों का कारोबार इंटरनेट बंद होने से प्रभावित हुआ, वहीं दूसरी ओर आम जनता को कैब आदि बुक करने में भी दिक्कत हुई. भारत जैसे देश में बड़ी परीक्षाओं का आयोजन करना ही अपने आप में एक बड़ी चुनौती है. आइए जानते हैं बड़ी परीक्षाओं के आयोजन में किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता है-

पेपर लीक- शिक्षा व्यवस्था में फैला हुआ भ्रष्टाचार किसी भी परीक्षा के आयोजन में बाधाएं पैदा करता है. अक्सर ही पेपर परीक्षा के दिन से पहले ही लीक हो जाता है. ये काम करते हैं नकल माफिया, जो पेपर के बदले लोगों से पैसे लेते हैं.

शिक्षा, नकल, राजस्थान, पुलिसअक्सर कुछ तस्वीरें भी भारत की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़ी करती रही हैं.

नकल- भारत में किसी भी परीक्षा में नकल होना कोई बड़ी बात नहीं है. इससे बचने के लिए अक्सर कई तरह के इंतजाम किए जाते हैं, लेकिन बावजूद इन सब के नकल की शिकायतें आती ही रहती हैं.

आलोचना- कई बार सख्ती इतनी अधिक हो जाती है कि उसके चलते विद्यार्थियों को परेशानी का सामना भी करना पड़ता है. इसके बाद परीक्षा का आयोजन करने वालों की आलोचना भी होती है. NEET की परीक्षा तो आपको याद ही होगी, जिसमें विद्यार्थियों को नंगे पैर परीक्षा देनी पड़ी. दरअसल, सख्ती के लिए जो गाइडलाइंस बनाई गई थीं, वह सभी विद्यार्थियों तक नहीं पहुंच पाने के चलते ऐसा हुआ था, लेकिन सख्ती की वजह से आलोचना भी खूब हुई.

बड़ी परीक्षाओं में होती है बड़ी लापरवाही भी !

जब कभी किसी बड़ी परीक्षा का आयोजन होता है, तो उसमें लापरवाही और धांधली के भी कई मामले देखने को मिलते हैं. इन परीक्षाओं में जो हुआ, उसने शिक्षा व्यवस्था पर सवालिया चिन्ह लगा दिए-

- 19 जून 2018 को यूपी पीसीएस मेंस की परीक्षा में गलत पेपर दे दिया गया. इलाहाबाद के एक सेंटर में हिंदी की जगह निबंध का पेपर बांट दिया, जिसके बाद हिंदी और निबंध दोनों की ही परीक्षाओं को रद्द करना पड़ा. आपको बता दें कि 2013 से 2015 के बीच हुई भर्तियों की पहले से ही जांच चल रही है.

- मार्च 2015 में बिहार के वैशाली से नकल की जो तस्वीर सामने आई, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया. यहां पर बच्चों के परिवार के लोग और दोस्त चार मंजिला स्कूल की दीवारों पर छिपकलियों की तरह चिपक कर जान खतरे में डालकर नकल करा रहे थे.

देखा जाए तो देश में जिस परीक्षा को लेकर सबसे अधिक बवाल होता है, वह पुलिस की भर्ती के लिए होने वाली परीक्षाएं ही होती हैं. इन परीक्षाओं में तो अधिकतर में खूब पैसा चलता है. अगर बात राजस्थान की ही करें तो मार्च में कॉन्स्टेबल भर्ती के लिए ऑनलाइन परीक्षा का आयोजन किया गया था, जिसमें खूब धांधली हुई थी. इसमें एक बड़े नकल गिरोह का पर्दाफाश हुआ था. इस बार हो रही परीक्षा से पहले करीब आधा दर्जन लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार भी किया है, जो परीक्षा में नकल कराने के लिए आए थे. पुलिस ऐसे भी गिरोह के लोगों को पकड़ा है जो पेपर लीक करने की कोशिश में थे या फिर पास करवाने के नाम पर ठगी कर रहे थे.

जहां एक ओर हर परीक्षा सवालों के घेरे में है, वहीं देश में कुछ ऐसी भी परीक्षाएं होती हैं, जो बड़ी ही आसानी से साफ-सुथरे तरीके से आयोजित हो जाती है. अगर बात करें बैंकिंग परीक्षाओं की या फिर सीपीएमटी और एसएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की, तो इनमें नकल की गुंजाइश काफी कम होती है. इन परीक्षाओं में ओएमआर शीट के जरिए परीक्षा होती है, जिसमें विद्यार्थियों के पास सिर्फ इतना ही समय होता है कि वह अपना खुद का पेपर कर सके. अक्सर स्पीड कम होने पर तो सारे सवाल तक नहीं हो पाते हैं. ऐसे में अगर नकल करने के चक्कर में कोई पड़ेगा, तो उसका खुद का पेपर ही छूट जाएगा.

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