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 |  3-मिनट में पढ़ें  |   12-01-2018
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दुनिया के तीन देश, जिन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि उन्हें कोई क्या कह रहा है. ये देश हैं उत्तर कोरिया, रूस और चीन. यानी ये कहना गलत नहीं होगा कि किम जोंग उन, व्लादिमिर पुतिन और शी जिनपिंग किसी मौसेरे भाई की तरह हैं. ये तीनों एक दूसरे को बधाई देने और तारीफ करने का कोई मौका नहीं छोड़ते. इनका इशारा साफ है कि ये लोग एक साथ हैं. गुरुवार को ही रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने उत्तरी कोरिया के किम जोंग उन की तारीफों के पुल बांधे हैं. यह बात अहम इसलिए है क्योंकि एक ओर पूरी दुनिया किम जोंग उन को तानाशाह और क्रूर मानती है, वहीं दूसरी ओर पुतिन किम की तारीफ करते नहीं थक रहे हैं.

व्लादिमिर पुतिन, रूस, किम जोंग उन, उत्तर कोरिया, चीन, शी जिनपिंग

क्या कहा पुतिन ने?

पुतिन ने किम की तारीफ करते हुए कहा कि वह बहुत ही समझदार और परिपक्व राजनेता हैं. उन्होंने अपने परमाणु और मिसाइल प्रोग्राम के जरिए पश्चिम के खिलाफ एक तरह की जीत हासिल कर ली है. उनकी मिसाइलों की पहुंच पूरी दुनिया तक है. वह 13 हजार किलोमीटर तक किसी भी जगह को निशाना बना सकते हैं. वह एक खास रणनीति के तहत काम कर रहे हैं. पुतिन का कहना है कि नॉर्थ कोरिया से बातचीत जारी रहेगी. पुतिन नॉर्थ कोरिया की जिन परमाणु ताकत के लिए तारीफों के पुल बांधते दिखे, वही ताकत दुनिया के अन्य देशों की आंखों में खटकती है. अमेरिका को तो मानो नॉर्थ कोरिया फूटी आंख नहीं सुहाता. कभी अमेरिका नॉर्थ कोरिया को धमकी देता है तो कभी नॉर्थ कोरिया अमेरिका को.

चीन भी साथ देता है किम का

अक्टूबर 2017 में शी जिनपिंग दोबारा चीनी सत्ता पर काबिज हुए. इसे किम जोंग उन ने शी जिनपिंग की एक बड़ी सफलता कहा और बधाई दी. दोनों देशों की सीमा जुड़े होने के चलते कभी-कभी छोटा-मोटा तनाव भी होता है, लेकिन जैसे दो भाई अक्सर गुस्सा होकर फिर मान जाया करते हैं, वैसे ही किम और जिनपिंग में भी ये छोटे-मोटे झगड़े कोई मायने नहीं रखते. अंत में होता यही है कि दोनों एक ही पक्ष में खड़े दिखते हैं.

आपस में जुड़ी हैं तीनों देशों की सीमाएं

इन तीनों देशों की सीमाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं. जहां एक ओर रूस और चीन क्षेत्रफल के नजरिए और सेना के नजरिए से बेहद ताकतवर देश हैं, वहीं छोटा होने के बावजूद परमाणु ताकत के मामले में नॉर्थ कोरिया भी कम नहीं है. ऐसे में तीनों ही देश यह समझते हैं कि आपस में कोई बड़ा विवाद करने से किसी को फायदा नहीं होने वाला है, बल्कि नुकसान ही होगा. तीनों देश एक दूसरे से रिश्ते बनाए रखना चाहते हैं और मौसेरे भाइयों की तरह एक दूसरे का साथ भी देते हैं. नॉर्थ कोरिया कुल तीन देशों से अपनी सीमा साझा करता है, जिनमें दो इसके पक्के दोस्त (चीन और रूस) हैं और एक (दक्षिण कोरिया) पक्का दुश्मन.

नॉर्थ कोरिया

नॉर्थ कोरिया की भले ही रूस और चीन के साथ अच्छी दोस्ती हो, लेकिन अधिकतर देश किम को एक तानाशाह की तरह ही देखते हैं. नया साल शुरू होते ही अमेरिका को धमकाने के अंदाज में किम ने यह कहा था कि परमाणु बम का बटन हमेशा मेरी टेबल पर ही रहता है. नॉर्थ कोरिया के इस तरह से रवैये से डोनाल्ड ट्रंप भी काफी खफा हैं और दुनिया के कई अन्य देश भी. लेकिन पुतिन को किम का रवैया गलत नहीं, बल्कि एक खास रणनीति लगती है जो एक परिपक्व इंसान के दिमाग की उपज है.

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