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Updated: 02 सितम्बर, 2016 08:31 PM
आर.के.सिन्हा
आर.के.सिन्हा
  @RKSinha.Official
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राजधानी दिल्ली के समयपुर बादली में बीते दिनों बंटी गुप्ता नाम के एक 26 वर्षीय शख्स ने अपने दो बरस के अबोध पुत्र को तालाब में फेंक दिया. उसने खुद पुलिस को दिए अपने इकबालिया बयान में बताया कि जब वो अपने पुत्र को तालाब में फेंक रहा था तो रोते हुए पुत्र भीख मांगते हुए कह रहा था, ‘मुझे मत फेंको. मैं अब नहीं रोऊंगा.‘ यही नहीं, बंटी अपनी दो पुत्रियों को अपने कोठरीनुमा घर में बंद करके लापता हो गया. दोनों कन्याएं जब भूख से तड़पते हुए मौत के करीब थी तब उन्हें कुछ पड़ोसियों ने बचाया. इस खबर को पढ़कर किसी पत्थर दिल इंसान के भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. मन अवसाद से घिर जाता है. और इन बच्चों की मां अपने शराबी पति की हरकतों से आजिज आकर पहले ही घर छोड़ चुकी थी. ये ठीक है कि वो अपने पति की करतूतों से त्रस्त और प्रताड़ित थी, दुखी थी. लेकिन मां का अपने बच्चों को मरने के लिए छोड़कर जाना बहुत कुछ कहता है. मां तो कठिन हालातों में भी अपनी कोख से जन्में बच्चों को छोड़ती नहीं है. तो फिर बंटी की पत्नी ने बच्चों को कैसे छोड़ा?

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 भूख से तड़पी इन बच्चियों को बचाया गया

और दिल्ली से दूर मुंबई में मीडिया की दुनिया में दौलत-शोहरत अर्जित करने वाली इंद्राणी मुखर्जी  को लीजिए. इंद्राणी मुखर्जी ने अपनी पुत्री शीना का कत्ल कर दिया. इंद्राणी पर आरोप है कि उसने अपनी बेटी शीना की गला दबाकर हत्या की.

स्टार इंडिया के पूर्व सीईओ पीटर मुखर्जी की पत्नी इंद्राणी मुखर्जी को वर्ष 2012 में अपनी पुत्री शीना की हत्या के मामले में हिरासत में लिया गया था. पहले कहा जा रहा था कि इंद्राणी की बहन थी शीना. अब खुलासा हुआ है कि शीना तो इंद्राणी की पुत्री थी उसके पहले पति से. कहने वाले कह रहे हैं कि इंद्राणी ने अपने ड्राइवर श्याम राय के साथ मिलकर शीना की हत्या की थी.

बंटी और इंद्राणी के वर्ग चरित्र में अंतर है. बंटी बेरोजगार था. फिर नेश की लत का शिकार था. इसके चलते उसका परिवार आर्थिक संकट के कठिन दौर से गुजर रहा था. पर वो पिता भी था. अपने बच्चों पर अत्याचार करते हुए वो कैसे भूल गया कि वो उनका पिता है?

यहां अगर पिता राक्षस हो गया था तो फिर बच्चों की मां इतनी पत्थर दिल कैसे हो गई? मां की ममता का क्या हुआ?

दिल्ली और मुंबई के केस कहीं मिलते-जुलते हैं तो कही भिन्न हो जाते हैं. जहां दिल्ली का परिवार गरीबी की मार से जूझ रहा था, वहीं मुंबई में अकूत दौलत की मालकिन इंद्राणी थी. उसने कथित तौर पर अपनी बेटी की हत्या कराई क्योंकि उसे इस बात की नाराजगी थी शीना का उसके मौजूदा पति पीटर मुखर्जी की पहली पत्नी के बेटे से अफेयर था.  दोनों मामलों में खून के रिश्ते शर्मसार हुए.

बेशक,दोनों केस बहुत सारे सवाल समाज और अपराध के कारणों का खुलासा करने वालों के समक्ष छोड़ रहे हैं. पहला, क्या हमारे यहां परिवार नाम की संस्था क्रमश: हौले-हौले कमजोर पड़ रही है? और अपने खून के संबंधियों को मारने वाले कौन हैं? क्यों आर्थिक संकट के वक्त बंटी की मदद के लिए कोई सामने नहीं आया?

बहरहाल बंटी गुप्ता और इंद्राणी मुखर्जी के केस साफतौर पर इस बात की चीख-चीखकर गवाही दे रहे है कि हमारे इर्द-गिर्द इन्सानियत का खून करने वाले घूम रहे  हैं.

यहां पर नैतिकता का सवाल सामने आ रहा है. मुंबई के पेज थ्री सर्किल में घूमने वाली इंद्राणी, जो कई पुरुषों से संबंध रख चुकी थी, वो नैतिकता के प्रश्न पर पुत्री की बेरहमी से जान ले लेती है. इंद्राणी के लिए नैतिकता का सवाल क्यों इतना अहम हो गया, यह भी विचारणीय मसला है.

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इंद्राणी मुखर्जी पर अपनी ही बेटी शीना की हत्या का आरोप

इंद्राणी ने पीटर मुखर्जी से पहले भी कई बार विवाह किए थे. उसके पीटर से विवाह के बाद भी अपने एक प्रेमी से पति बने शख्स संजीव खन्ना से भी मधुरतम सम्बन्ध बरकरार थे. यह उसका निजी मामला है. पर इस पर बात इसलिए हो रही है, क्योंकि; उसने नैतिकता के प्रश्न पर अपनी जवान पुत्री की जीवनलीला ही समाप्त कर दी. जबकि, वह स्वय जवानी से बुढ़ापे तक न जाने कितने पुरुषों से बेहिचक सम्बन्ध बनाती और तोड़ती रही.

और जरा गौर करें कि भारतीय परम्पराओं और लोक लाज को ठेंगा दिखाने वाली इंद्राणी को यह कतई स्वीकार नहीं था कि उसकी पुत्री उसके वर्तमान पति के पुत्र से संबंध बनाए. यहां पर वो ठीक हो सकती है. लेकिन, क्या उसका खुद का बार-बार पति बदलना सही माना जा सकता है? और जो शख्स शीना का पिता था, उसे भी देख लें. वो गुवाहाटी में रहता है. वो सारे घटनाक्रम को लेकर निर्विकार रुख अपनाए हुए हैं. उसे याद नहीं आता कि एक बार भी अपनी पुत्री के कत्ल पर शोक जताया हो. बेशक, ये सब सुनकर आप स्तब्ध होते हैं. इसी क्रम में बहुचर्चित आरुषि तलवार केस का उल्लेख करने का भी मन हो रहा है. उसमें भी खूनी रिश्ते तार-तार हुए थे.

आपको याद होगा कि आरुषि और हेमराज की 15 मई 2008 को हत्या हुई थी. लंबी पुलिस तफ्तीश और कोर्ट में चली जिरह के बाद आरुषि के पिता राजेश एवं मां नूपुर तलवार को अपनी 14वर्षीया बेटी और नौकर हेमराज के कत्ल का कोर्ट ने दोषी माना था. अपनी मासूम सी बेटी की जान लेते हुए डा. राजेश तलवार के हाथ कांपें नहीं? उसका खून देखकर तलवार दम्पति सामान्य कैसे रहे? उन्होंने एक पल भी नहीं सोचा कि वे अपनी ही पुत्री की जीवन लीला खत्म कर रहे हैं?

और इंसान के खून के प्यासों की बात हो और राजधानी दिल्ली से सटे निठारी के सुरेंद्र कोली का जिक्र न आए ये हो नहीं सकता. उसके कृत्यों का तब पता चला जब नोएडा के कुछ घरों के आगे की नाली से नर कंकाल मिले. कोली को 29 दिसंबर 2006  को गिरफ्तार किया गया था. कोली ने कई बच्चों की हत्या करके उनके शरीर को टुकड़े टुकड़े करके घर के पीछे और नाले में फेंका था. कोली ने कई मासूम लड़कियों से रेप किया. उनका बेरहमी से कत्ल किया था. उनका मांस पकाकर खाता भी था. सुरेन्द्र अपने मालिक मोहिंदर सिंह पंढेर की'अय्याश' जीवन शैली को देखकर प्रेरित हुआ. कोली औरतों, बच्चों पर यौन हमला करने लगा. उनकी जान लेने के लिए प्रेरित होता था. यानी किसी की जान की कोई कीमत ही नहीं.

जरा सोचिए कि जिस अभागे इंसान को मारा जाता है, उस प्रक्रिया के दौरान उसे कितना कष्ट होता होगा. इन मौत के सौदागरों की आत्मा इन्हें कचोटती नहीं होगी कि ये किसी शख्स की जीवन लीला समाप्त कर रहे हैं. बंटी गुप्ता से लेकर इंद्राणी के हाथ खून से सने हैं. ये देखने में हमारे-आपकी तरह ही लगते हैं. लेकिन वास्तव में ये हैं तो नरपिशाच. इनसे बचिए.

कारण क्या है? आख़िरकार, समाज का नैतिक पतन इस हद तक कैसे हो गया? पचास साल पहले तो एसी घटनाएँ सुनने को शायद ही मिलती थीं. क्या संयुक्त परिवारों का विघटन इसका कारण है? या फिर, शिक्षापद्धति से नैतिक शिक्षा को हटा देने का परिणाम? या फिर, पशिचमी सभ्यता की बिना सोचे समझे अंध भक्ति? या फिल्मों और टेलीविजन के हिंसक और अनैतिक कार्यक्रम? कारण कुछ भी हो, इसपर समाज और शासन व्यवस्था को आज नहीं तो कल गंभीरता से चिंतन मनन करके कारगर कदम तो उठाने ही होंगें.    

लेखक

आर.के.सिन्हा आर.के.सिन्हा @rksinha.official

लेखक राज्यसभा सांसद हैं

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