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Updated: 01 सितम्बर, 2021 06:07 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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बंगाल की अभिनेत्री और टीएमसी सांसद नुसरत जहां (Nusrat jahan) ने जबसे बच्चे का जन्म दिया है उन्हें बुरी तरह से ट्रोल किया जा रहा है. उनके चरित्र पर सवाल उठाया जा रहा है. ट्रोल करने वाले लोग उन पर अश्लील मीम्स बना रहे हैं. इन लोगों को शायद यह पता नहीं है कि ऐसा करना अपराध की श्रेणी में आता है.

भारत देश में एकल मां को कई अधिकार दिए गए हैं, जिससे वह अपने बच्चे की सिंगल अभिभावक हो सकती है. चाहें उसकी शादी हुई हो, वह तलाकशुदा हो या फिर विधवा. एक मां को अपने बच्चे का संरक्षण करने का पूरा अधिकार है.

वहीं जबसे नुसरत का बेटा ‘ईशान’ इस दुनियां में आया है तबसे लोगों की जुबान पर बस एक ही सवाल है कि आखिर इस बच्चे का बाप कौन है? उसका नाम क्या है. लोगों ने कहा कि नुसरत की शादी टूटने की वजह उनके कथित प्रेमी यशदास गुप्ता हैं जो बच्चे के जन्म के समय अस्पताल में मौजूद थे. जिन्होंने पोस्ट शेयर करके यह बताया कि मां और नवजात दोनों स्वस्थ हैं.

 Nusrat jahan, Nusrat jahan baby, Single mothers, Single mother rights in indiaनुसरत के बच्चे के पिता का नाम नहीं पूछ सकते

जो नुसरत जहां की अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद बच्चे को गोद में लिए देखे गए. लोगों को इस तस्वीर से देखने के बाद तो नुसरत को ट्रोल करना छोड़ देना चाहिए लेकिन नहीं ये लोग बाल्टी भर-भर के नुसरत और उनके बच्चे के पीछ पड़े हैं. जैसे बच्चे के पिता का नाम जानने के बाद इन्हें कोई खजाना हाथ लग जाएगा.

हमारे समाज में अगर कोई महिला किसी बच्चे के साथ अकेली रहती है तो उससे जरूर पूछा जाता है कि इसके पिता कहां है, क्या करते हैं, उनका नाम क्या है. अगर किसी महिला की शादी नहीं हुआ तो उससे पूछा जाता है कि क्या उसने इस बच्ची को गोद लिया है? जरूर कोई कमी है इसलिए शादी नहीं हो रही.

तलाकशुदा महिलाओं पर लोग उंगली उठाकर कहते हैं कि उसे देखो वो अपने पति से अलग होकर बच्चे के साथ अकेले रहती है. पता नहीं कौन सा काम करके घर चलाती है? अगर कोई सिंगल मदर ऑफिस जाती है तो लोग कहते हैं बच्चे को छोड़कर दिन भर बाहर रहती है. आजकल के लोगों को बच्चे की परवाह ही नहीं है.

आज हम जिस समाज में रहते हैं वहां हर कदम पर लोग आपको जज करने के लिए बैठे रहते हैं. कुछ लोगों का तो काम ही होता है दूसरों की जिंदगी में तांका-झांकी करना...ऐसे में कोई एकल मां कैसे चैन से रह सकती है.

सिंगल मदर को हर कदम पर लोगों के चुभते सवालों का जवाब देना पड़ता है. जैसे- अच्छा आप उसकी मां है तो बच्चे के पापा अब कहां हैं, क्या आप लोग अब साथ नहीं हैं? या फिर मनोबल कम करने वाली बातें जैसे- अकेले बच्चा पालना बहुत मुश्किल होता होगा ना, सिर पर बाप का साया होना जरूरी है आदि.

पिता के नाम को लेकर क्या कहता है कानून

समाज के लोग भले ही सौ बातें बनाएं लेकिन हमारे देश का कानून सिंगल मदर की अवधारणा को मान्यता देता है. जिसके अनुसार, कोई भी अविवाहित, तलाकशुदा महिला बच्चे को जन्म दे सकती है.

साफ शब्दों मे कहें तो कोई महिला अगर सिंगल मदर बनती है तो कोई भी उसके बच्चे के पिता कौन है, इस बारे में नहीं पूछ सकता. उसे कोई भी बच्चे के पिता का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं कर सकता.

हाल ही में केरल हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए कहा है कि यदि कोई कुंवारी यानी बिन ब्याही महिला या तलाकशुदा महिला गर्भधारण कर मां बनती है तो उसके बच्चे के पिता का नाम नहीं पूछा जा सकता है. केरल हाईकोर्ट ने यह फैसला एक तलाकशुदा महिला की याचिका सुनाया था. जो आईवीएफ ट्रीटमेंट के जरिए 8 माह की गर्भवती थी.

कोर्ट ने कहा था कि इस महिला के मां बनने पर समाज को सवाल पूछने का कोई हक नहीं है. यह महिला और उसके बच्चे के सम्मान के विरूद्ध माना जाएगा. इसके साथ ही कोर्ट ने ऐसे बच्चों के लिए अलग से जन्म प्रमाण पत्र के फॉर्म भी जारी करने के आदेश दिए.

एक और फैसले में दिल्ली उच्च न्यायालय ने कहा था कि कोई पिता अपनी बेटी के लिए शर्तें नहीं थोप सकता है और हर बच्चे को अपनी मां के उपनाम यानी सरनेम का इस्तेमाल करने का अधिकार है. यह फैसला अदालत ने एक नाबालिग लड़की के पिता की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की.

जस्टिस रेखा पल्ली ने कहा था कि, ‘एक पिता के पास बेटी को यह फरमान सुनाने का अधिकार नहीं होता है कि वह केवल उसके उपनाम का उपयोग करे. अगर नाबालिग बेटी अपने मां के ‘सरनेम’ से खुश है तो आपको क्या दिक्कत है?’

वहीं एकल मां के पक्ष में सर्वोच्च न्यायालय ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था कि कोई भी संस्था मां को इसके लिए बाध्य नहीं कर सकती कि वह अपने बच्चे के डॉक्युमेंट्स में पिता का नाम दर्ज करे. सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा था कि पूरे विश्व में यह माना गया है कि मां ही बच्चे की सर्वश्रेष्ठ गार्जियन है.

एकल मां के लिए प्राइवेसी राइट

सुप्रीम कोर्ट के अनुसार, किसी मां को उसके बच्चे के पिता का नाम बताने के लिए मजबूर करना 'निजता के अधिकार का उल्लंघन होगा. वहीं अविवाहित मां को बिना पिता को 'अनिवार्य नोटिस' भेजे अपने बच्चे की एकमात्र संरक्षकता के लिए आवेदन करने की अनुमति है.

इसके साथ उसे अपनी इच्छा के विरुद्ध पिता का नाम बताने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता है. यहां तक की बच्चे का जन्म प्रमाण पत्र प्राप्त करने के लिए पिता की पहचान की भी आवश्यकता नहीं हो सकती है.

दरअसल, हिंदू अल्पसंख्यक और अभिभावक अधिनियम, 1956 (भारत) नाजायज बच्चों के प्राकृतिक अभिभावकों के संबंध में मां को प्राथमिकता देता है. यानी पिता की मंजूरी के बिना एक अविवाहित मां अपने बच्चे की एकमात्र कानूनी अभिभावक हो सकती है. साफ शब्दों में यह समझ लीजिए कि कोई सिंगल मदर अगर मां बनती है तो उसके होने वाले बच्चे का पिता कौन हैं, उससे कोई नहीं पूछ सकता है.

संयुक्त राष्ट्र (यूनाइटेड नेशन) की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में करीब 4.5% परिवार को सिंगल मदर चला रही हैं. यानी भारत में लगभग 13 मिलियन सिंगल मदर हैं, जिनका परिवार पूरी तरह से उनपर निर्भर है. वहीं, 32 मिलियन सिंगल मदर ऐसी हैं जो संयुक्त परिवार में रह रही हैं. इस रिपोर्ट को संयुक्त राष्ट्र ने प्रोग्रेस ऑफ द वर्ल्ड वीमन 2019-2020 के नाम से इस रिपोर्ट को जारी किया था.

तो अब आप समझ जाइए कि भारत में सिंगल मदर होना कोई नई बात नहीं है, जो नुसरत जहां ने आपको अचानक से याद दिला दिया है. इसके पहले भी कई महिलाओं को सिंगल मदर होने पर सवालों के घेरे में लिया गया...अब पता नहीं यह बात ट्रोलर्स के कितनी समझ आएगी, भगवान जानें.

लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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