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 |  4-मिनट में पढ़ें  |   12-09-2018
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa
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मैसूर सिल्क साड़ियों की सेल के विज्ञापन मैंने दिल्ली के अखबारों में हमेशा देखे. हर थोड़े दिनों में ये सेल लगाई जाती थी. समझ नहीं आता था कि ऐसा क्या है इन साड़ियों में जो इतना बिकती हैं. लेकिन आज एक नजारा देखकर मैसूर सिल्क साड़ियों के प्रति महिलाओं की दीवानगी का अंदाजा हुआ.

यूं तो सेल के नाम से वैसे ही दुकानों और मॉल्स में महिला सेना टूट पड़ती है, जैसे सामान फ्री में बंट रहा हो. लेकिन साड़ी खरीदने के लिए इतनी लंबी लाइन मैंने अपने जीवन में कभी नहीं देखी. और वो भी तब जब साड़ी कुछ सौ की नहीं बल्कि हजारों की हो.

saree saleसाड़ियों के लिए कभी इतनी भीड़ देखी है??

पहले इस तस्वीर से जुड़ी सारी जिज्ञासा शांत कर लीजिए-

ये तस्वीर है कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (KSIC) के शोरूम की जिसके बाहर सैकड़ों महिलाएं लाइन लगाकर अपनी बारी आने का इंतजार कर रही हैं. यहां मैसूर सिल्क साड़ियों की सेल लगी हुई है जिनपर काफी डिस्काउंट दिया गया. शहर में ये अकेला आउटलेट है जहां ये सेल लगाई गई. इसीलिए भीड़ का आलम ये था.

मैसूर अपनी सिल्क की साड़ियों के लिए दुनिया भर में जाना जाता है. हर महिला चाहती है कि उसके साड़ी कलेक्शन में एक साड़ी मैसूर सिल्क की भी हो. मैसूर सिल्क की एक साड़ी की कीमत करीब 8 हजार से 12 हजार रूपए होती है. सेरीकल्चर मिनिस्टर एस.आर.महेश ने ऐलान किया था कि वरमहालक्ष्मी उत्सव के दौरान ये महंगी साडियां 4500 रुपए में महिलाओं को उपलब्ध कराई जाएं क्योंकि बहुत सी महिलाएं महंगी होने की वजह से ये साड़ियां खरीद नहीं पातीं.

लेकिन तब चुनाव की वजह से ये सेल हो नहीं सकी. कोड ऑफ कंडक्ट आड़े आ गया. और सेल की तारीख आगे बढ़ा दी गई. लेकिन चुनाव के बाद भी सेल की तारीख नहीं बताई गई. और अचानक मंगलवार को गौरी गणेश उत्सव के मौके पर कर्नाटक सिल्क इंडस्ट्री कॉर्पोरेशन (KSIC) के शोरूम पर ये एक दिन की सेल लगा दी गई. 5000 साड़ियां सेल के लिए बनाई गई थीं, जो KSIC के सभी शोरूम पर बेचने के लिए दे दी गईं.

मैसूर सिल्क साड़ी सेल के साथ नियम व शर्तें लागू 

महिलाओं को जैसे ही ये खुशखबरी मिली वो शोरूम पर दौड़ पड़ीं, भीड़ इतनी थी कि पुलिस को महिलाओं को व्यवस्थित करना पड़ा. लाइनों में लगने के बाद महिलाओं को इस सेल की शर्तें पता चलीं. जिसे सुनकर बहुतों के चेहरे लाल जरूर हुए होंगे. ये शर्तें इस प्रकार थीं-

* केवल 1500 साड़ियां ही सेल में रखी गई थीं.

* ये साड़ियां केवल 5 रंगों में ही उपलब्ध थीं.

* केवल महिलाएं ही साड़ियां खरीद सकती थीं.

* एक महिला एक ही साड़ी खरीद सकती थी.

* साड़ी खरीदने के लिए आधार कार्ड रजिस्ट्रेशन जरूरी था.

* साड़ी पर 5% टैक्स भी था जिसे मिलाकर साड़ी की कीमत 4750 हो गई.

मैसूर सिल्क साड़ी खरीदने के लिए भी आधार कार्ड??

माना कि आज कुछ भी करने के लिए आधार रजिस्ट्रेशन जरूरी हो गया है, मोबाइल का सिम लो, बैंक में खाता खुलवाओ या कोई आर्थिक लेनदेन करो तो आधार रजिस्ट्रेशन का होना समझ आता है, लेकिन एक साड़ी खरीदने के लिए भी आधार रजिस्ट्रेशन करना पड़ता है ये सुनने में वाकई अजीब लगा. लेकिन सरकार ने ऐसा क्यों किया ये भी दिलचस्प है. सरकारी की मानें तो आधार कार्ड की वजह से बिचौलिए आपसे दूर रहेंगे और ये पक्का हो जाएगा कि डिस्काउंट वाली साड़ी सही कस्टमर के पास गई है. साथी ही ये भी सुनिश्चित हो जाएगा कि साड़ी खरीदने वाली महिला अगले पांच साल तक दोबारा वो साड़ी ऐसी सेल से नहीं खरीद सके.

सरकार ने महिलाओं के बारे में इतना सोचा और साथ ही ये इस बात का भी ध्यान रखा कि कोई महिला हर सेल में से इस तरह की साड़ियां बार बार न खरीद सके. इस तरकीब से होगा ये कि हर महिला के पास कुछ ही समय में एक मैसूर सिल्क साड़ी जरूर हो जाएगी.

काश मैं भी दिल्ली के बजाए मैसूर में होती तो एक साड़ी तो मेरी भी पक्की होती. पर महिलाओं की फौज को देखकर तो लगता है कि अपन बिना साड़ी के ही भले. धन्य हो ये महिलाएं जिनका सब्र सेल की लाइन में घंटो खड़े रहने पर भी जवाब नहीं देता. जोश-जुनून और संयम का ऐसा मेल आपको सिर्फ सेल की लाइन में ही देखने का मिलेगा. सेल और डिस्काउंट वो शब्द हैं जिसके लिए महिलाएं कुछ भी करने को तैयार रहती हैं.

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लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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