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Updated: 21 जून, 2022 05:59 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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आज के टाइम में लोग-बाग अपनी शादी के मौके को यादगार बनाने के लिए क्या नहीं करते हैं. प्री-वेडिंग फोटो शूट से लेकर किसी वर्ल्ड क्लास जगह पर डेस्टिनेशन वेडिंग जैसी तैयारियों के साथ इस लम्हें को हमेशा के लिए दिल के करीब कर लेते हैं. वहीं, आम भारतीय शादियों की बात करें, तो वहां ये सब भले न होता हो. लेकिन, दुल्हन को लेने के लिए आमतौर पर दूल्हा घोड़ी या महंगी कार लेकर ही पहुंचने का ख्वाब ही देखता है. दूल्हे का सपना होता है कि चमचमाती और महंगी गाड़ी से दुल्हन को लेने जाए. तो, उत्तर प्रदेश के एक शख्स ने भी ये सपना देखा था. और, उसे पूरा करने की ठान ली. अब मामला क्योंकि, उत्तर प्रदेश का है, तो लिखी सी बात है कि नया ट्रेंड बनना ही था. तो, इन भाई साहब ने महंगी कारों का मोह छोड़कर बुलडोजर में जाने की सोचीं. और, जिस तरह से उत्तर प्रदेश के लोगों में बुलडोजर का क्रेज बढ़ रहा है. कहना गलत नहीं होगा कि दुल्हनियां लाने को बुलडोजर की सवारी, यूपी में ही संभव है.

Muslim Groom ride on Bulldozerबुलडोजर पर लगने वाली तोहमतों को मुस्लिम युवक बादशाह ने अपनी शादी में ध्वस्त कर दिया.

राजनीति करने का स्पेस ही खत्म कर दिया

पहले बात कर लेते हैं बुलडोजर से दुल्हनियां लेने जाने वाले बादशाह भाई की. तो, श्रावस्ती जिले के बादशाह का निकाह बहराइच के लक्ष्मणपुर की रहनी वाली रुबीना से तय हुआ था. तो, बादशाह भाई ने शादी को यादगार बनाने के लिए अनोखा फैसला लिया. उन्होंने महंगी कार की जगह बारातियों के साथ बुलडोजर की सवारी चुन ली. अब जिस सूबे में बुलडोजर के नाम पर सियासत की जाती हो. और, ये कहा जाता हो कि जान-बूझकर बुलडोजर का निशाना मुस्लिम समुदाय को बनाया जाता है. वहां पर मुस्लिम समुदाय के बादशाह का बुलडोजर पाना दुल्हन के घर बारात लेकर पहुंचना सुर्खियां न बटोरता तो और क्या बटोरता. आसान शब्दों में कहा जाए, तो मुस्लिम समुदाय से आने वाले बादशाह ने कई सियासी दलों की राजनीति पर भी बुलडोजर चला दिया है. 

केवल इस बारे में सोच कर ही तमाम राजनीतिक दलों का कष्ट महसूस कर पा रहा हूं कि जो सियासी दल सीएम योगी आदित्यनाथ की अपराधियों और माफियाओं की अवैध संपत्तियों पर बुलजोडर की कार्रवाई को आजतक गलत बताते आए हैं. एक मुस्लिम दूल्हे बादशाह के बुलडोजर को चुन लेने के बाद अब जनता से क्या कह पाएंगे? भले ही मुस्लिम समुदाय से आने वाले बादशाह ने बारात में बुलडोजर से जाने का फैसला किसी भी कारण से किया हो. और, इसे पब्लिसिटी पाने का हथकंडा ही क्यों न कह दिया जाए. लेकिन, बुलडोजर पर बारात लेकर आना, वो भी एक मुस्लिम समुदाय के शख्स के लिए आसान नही हुआ होगा. जिस उत्तर प्रदेश में बुलडोजर की ब्रांडिंग ही मुस्लिमों के खिलाफ कार्रवाई के कुख्यात के तौर पर की जाती हो. वहां इस मुस्लिम दूल्हे ने कई भ्रांतियों को खत्म कर दिया है.

बुलडोजर से जुड़े मिथकों और तोहमतों को किया ध्वस्त

खैर, अब बात बारातियों की भी कर ली जाए. तो, लिखी सी बात है कि दूल्हे को बुलडोजर पर देख बारातियों का जोश भी 'हाई' होना ही था. तो, डीजे पर नाच रहे बारातियों ने भी 'बुलडोजर बाबा' के गाने की फरमाइश कर दी. और, जमकर नाते. इसके बाद तो इस अनोखी शादी को देखने के लिए आसपास के लोगों का जमावड़ा लग गया. वैसे, 'बुलडोजर बाबा की जय' के नारों के साथ निकली मुस्लिम समुदाय की इस बारात से कईयों के दिल पर सांप लोट गए होंगे. और, इस एक कदम से बादशाह ने भारतीय शादियों में नागिन डांस की परंपरा को भी बचाए रखा. वो अलग बात है कि ये नागिन डांस बारातियों ने न किया हो. लेकिन, कईयों के दिलों में लोट लगाने वाले सांपों ने तो इसकी कमी पूरी कर ही दी होगी. खैर, बादशाह ने साबित कर दिया है कि बुलडोजर का जलवा अभी भी कायम है. और, इसका क्रेज किसी एक वर्ग या समुदाय से नहीं जुड़ा है.

वैसे, दूल्हे के इस फैसले का सियासी लाभ भाजपा और सीएम योगी आदित्यनाथ के ही खाते में जाएगा. क्योंकि, उत्तर प्रदेश में मजबूत कानून व्यवस्था का प्रतीक बन चुके बुलडोजर को कौतूहल का विषय बनकर सुर्खियां बटोरनी ही थीं. और, बादशाह की इस शादी को सुर्खियां भी उतनी ही मिल रही हैं. वैसे बताना जरूरी है कि उत्तर प्रदेश में अपराधियों और माफियाओं की अवैध संपत्तियों पर गरजने वाला बुलडोजर केवल उजाड़ने ही नहीं घरों की नींव बनाने के काम भी आता है. खैर, इस मुस्लिम दंपति ने बुलडोजर का इस्तेमाल कर कई गढ़े हुए मिथकों को ध्वस्त करते हुए अपनी जिंदगी की शुरुआत की है. तो, बुलडोजर को अपनी शादी में इस्तेमाल करने वाले बादशाह और रुबीना को उनके निकाह के लिए बधाई. एक कहावत है कि विश्वास पत्थर को भी भगवान बना देता है. तो, आशा की जा सकती है कि यही विश्वास शायद अब बुलडोजर के लिए भी बन पाएगा.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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