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 |  5-मिनट में पढ़ें  |   09-10-2018
अनुज मौर्या
अनुज मौर्या
  @anujmaurya87
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बेहद छोटे, लेकिन सबसे जानलेवा जीव ने एक बार फिर शिकार करना शुरू कर दिया है. अभी तक राजस्थान में मच्छरों से फैलने वाले जीका वायरस से पीड़ित लोगों की संख्या करीब 29 हो चुकी है. यूं तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कहा है कि सब कुछ काबू में है और घबराने की कोई जरूरत नहीं है, लेकिन लगातार बढ़ रही पीड़ितों की संख्या लोगों में इसका डर पैदा करने के लिए काफी है. पीएमओ ने भी जयपुर में जीका वायरस से संक्रमित होने को लेकर स्वास्थ्य मंत्रालय से रिपोर्ट मांगी है. जिन इलाकों में लोगों में संक्रमण पाया गया है, वहां अन्य लोगों की भी जांच हो रही है और गर्भवती महिलाओं पर अधिक फोकस किया जा रहा है.

जीका वायरस, मच्छर, राजस्थान, बिहारराजस्थान में जीका वायरस से पीड़ितों की संख्या 29 तक पहुंच चुकी है.

जीका वायरस से संक्रमित लोगों में एक व्यक्ति बिहार का भी है, जिसके बाद बिहार में भी यह चिंता फैल गई है कि कहीं वहां भी वायरस का हमला तो नहीं हो चुका है. यह व्यक्ति बिहार के सीवान का रहने वाला है. ऐसे में व्यक्ति के परिजनों की भी जांच कराई जा रही है कि कहीं वह भी जीका वायरस से पीड़ित तो नहीं हैं. एहतियातन बिहार सरकार ने अपने सभी 38 जिलों में एक एडवाइजरी जारी कर दी है और निर्देश दिए गए हैं कि जीका वायरस के संक्रमण दिखाई देने पर तुरंत जांच की जाए. हालांकि, अभी तक बिहार से कोई मामला सामने नहीं आया है.

मच्छर से फैलने वाला 'जीका' वायरस

मई 2017 में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने गुजरात में 3 लोगों के जीका वायरस से पीड़ित होने की पुष्टि की थी. भारत में जीका वायरस का ये पहला मामला था. जीका वायरस गर्भवती महिलाओं को आसानी से अपना शिकार बनाता है और इसका सबसे बुरा असर गर्भ में पल रहे बच्चे के दिमाग और उसके विकास पर होता है. यह वायरस Aedes aegypti मच्छर से फैलता है. आपको बता दें कि डेंगू और चिकगुनिया फैलाने के लिए भी यही मच्छर जिम्मेदार है. जीका कितना खतरनाक है, इसका अंदाजा ब्राजील को देखकर लगता है. ब्राजील में जीका वायरस से करीब 1 लाख 70 हजार लोग प्रभावित हुए थे और 8 लोगों की मौत भी हो गई थी. उस दौरान कई देशों ने तो यह एडवाइजरी तक जारी कर दी थी कि अगर बहुत अधिक जरूरी ना हो तो ब्राजील ना जाएं.

इसका संक्रमण होने पर क्या करें?

इस वायरस से पीड़ित शख्स को बुखार, गले में खराश, जोड़ों में दर्द, आंखें लाल होने जैसी शिकायतें होती हैं. इससे बचने के लिए कोई टीका नहीं है. ऐसे में इसके लक्षण दिखाई देने पर तुरंत जांच कराएं. जीका वायरस से पीड़ित शख्स को तरल पदार्थों का सेवन करना चाहिए और भरपूर आराम करना चाहिए. जीका वायरस से संक्रमित लोगों को बुखार आता है तो बुखार पर नियंत्रण करने के लिए पैरासिटामोल खानी चाहिए. हालांकि, ऐसे अधिकतर मामलों में अस्पताल में भर्ती होने ही बेहतर होता है, जहां डॉक्टर की देखरेख में आपको दवाएं और इलाज मुहैया कराया जा सके.

जीका वायरस, मच्छर, राजस्थान, बिहारसबसे पहले मई 2017 में WHO ने गुजरात में 3 लोगों के जीका वायरस से पीड़ित होने की पुष्टि की थी.

बेहत आसान 'टारगेट' है भारत

भारत की सीमाओं में जिस तरह इंसानों का घुसना कोई मुश्किल काम नहीं है, उसी तरह यह वायरस भी भारत में इंसानों के साथ-साथ चले आते हैं. पूरी दुनिया में लगभग हर जगह भारतीय फैले हुए हैं. कई बार वह विदेश से ऐसे किसी वायरस से संक्रमित होकर भारत आते हैं और फिर भारत में भी बहुत से लोग इस वायरस का शिकार हो जाते हैं. इतना ही नहीं, नेपाल और बांग्लादेश से खुली सीमाओं से जरिए भी बहुत से लोग आसानी से भारत में घुस जाते हैं. ऐसे में अगर वायरस नेपाल या बंग्लादेश पहुंच जाए तो वहां से भारत में बड़ी आसानी से पहुंच सकता है. देखा जाए तो अगर ऐसे किसी वायरस से भारत पर हमला करना हो तो किसी भी देश को कोई मुश्किल नहीं होगी. आपको बता दें कि पिछले कुछ सालों में भारत में ऐसे 3 जानलेवा वायरस (निपाह, इबोला और जीका) विदेशों से आ चुके हैं. इबोला और जीका वायरस से तो भारत में किसी की जान नहीं गई, लेकिन कुछ समय पहले भारत पहुंचा निपाह वायरस कई लोगों की जान ले चुका है.

ब्रेन ट्यूमर का इलाज है जीका वायरस !

जहां एक ओर जीका वायरस जानलेवा है, वहीं इससे एक बड़ा फायदा भी हो सकता है. कुछ समय पहले ही चीन और अमेरिका के रिसर्चर ने एक खोज की और बताया कि उन्होंने जीका वायरस के जरिए एक ऐसी वैक्सीन बनाई है, जो ब्रेन ट्यूमर का उपचार कर सकती है. इसकी रिपोर्ट पहले American Society for Microbiology पत्रिका में छपी थी और उसके बाद ScienceNet.cn पर भी प्रकाशित हुई. रिसर्च के अनुसार जीका वायरस तंत्रिका अग्रदूत कोशिकाओं (neural precursor cells) और तंत्रिका स्टेम कोशिकाओं (neural stem cells) को संक्रमित कर के मार सकता है. इस तरह ब्रेन ट्यूमर का इलाज हो सकता है. हालांकि, अभी इस रिसर्च पर काफी शोध होना बाकी है, तभी जाकर जीका वायरस से बनी वैक्सीन का इस्तेमाल ब्रेन ट्यूमर के इलाज में हो सकेगा.

WHO की मानें तो मच्छर इस धरती का सबसे जानलेवा प्राणी है. करीब 7,25,000 लोग हर साल मच्छरों द्वारा पैदा की जाने वाली बीमारियों से मरते हैं. सिर्फ मलेरिया से ही हर साल करीब 20 करोड़ लोग ग्रसित होते हैं, जिनमें से लगभग 6 लाख लोगों की मौत हो जाती है. मच्छर सिर्फ दिखने में छोटा होता है. इससे होने वाली बीमारियां (मलेरिया, डेंगू और इंसेफेलाइटिस) तो जानलेवा हैं ही, इनकी वजह से फैलने वाला जीका वायरस भी जानलेवा है. अभी राजस्थान से जीका वायरस के 29 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है और ये संख्या आने वाले समय में और अधिक बढ़ सकती है.

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