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Updated: 21 नवम्बर, 2017 10:36 AM
अनुराग तिवारी
अनुराग तिवारी
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कश्मीर घाटी में सुरक्षा बलों का ऑपरेशन 'आल आउट' जारी है. इसी के साथ अब नया ट्रेंड आया है कि पाकिस्तान के बहकावे में आकर आतंक का रास्ता अपनाने वाले युवा अब सरेंडर कर मुख्य धारा में लौटने लगे हैं. साथ ही आंतकियों और उनके पाकिस्तानी आकाओं को डबल झटका देने के लिए सीआरपीएफ ने एक हेल्पलाइन '14411' जारी कर दी है. इसका मकसद है, आतंक का रास्ता छोड़ मुख्य धारा में लौटने वाले युवाओं की मदद करना. इस हेल्पलाइन का नाम 'मददगार' है.

ये हेल्पलाइन उन युवकों की काउंसलिंग करती है, जो आतंक की राह पर चल पड़े थे और मुख्या धारा में लौटना चाहते हैं. इसके अलावा सुरक्षा बल अब उन घरवालों की मदद ले रहे हैं, जिनके घर के युवा आतंकियों के बहकावे में आकर आतंक अपना रहे हैं. बीते दिनों ऐसा ही एक युवा फुटबॉलर माजिद आतंक का रास्ता छोड़ सेना के सामने सरेंडर कर गया था.

भारतीय सेना, जम्मू और कश्मीर, आतंकवाद   आतंक का मार्ग छोड़ आतंकियों का समाज की मुख्यधारा से जुड़ना एक अच्छी खबर है

इसी बीच माजिद के बाद के एक और युवक ने आतंक का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में वापसी की है. सेना के सूत्रों ने बताया कि यह साउथ कश्मीर का रहने वाला है और इसके घरवालों में भी ऑपरेशन मददगार के तहत उससे घरवापसी की अपील की थी. सेना ने इस युवक का नाम सुरक्षा कारणों से उजागर नही किया है. कश्मीर के आईजी मुनीर खान के मुताबिक सुरक्षाबलों ने इस साल अबतक 60 युवकों को आतंकियों के चंगुल से बचाया है.

बता दें कि ऑपरेशन आल आउट के तहत सुरक्षा बलों ने जनवरी 2017 से अबतक हुए एनकाउंटर्स में कुल 190 आतंकियों को मौत के घाट उतारा है. इनमे से 80 स्थानीय और 110 विदेशी आतंकी थे. इनमे से भी 66 पाकिस्तान से भारत की सीमा में घुसपैठ करते समय मारे गए. बीते शनिवार बांदीपुरा में हुए एनकाउंटर में सुरक्षाबालों ने छह आतंकियों को मार गिराया था.

सुरक्षा बल न केवल कश्मीर घाटी में ऑपरेशन चला रही है बल्कि सीमा पर भी उसका ऑपरेशन पूरे चरम पर है. इसी का नतीजा है कि एलओसी पर घुसपैठ करने वाले आतंकियों के मारे जाने की संख्या बढ़ रही है. इस साल अबतक 66 आतंकी सिर्फ एलओसी पर ही मारे गए हैं.

कश्मीर के आईजी मुनीर खान एक मुताबिक़ अभी भी कश्मीर घाटी में करीब 200 आतंकी छिपे बैठे हैं. इनमें से आधे से ज्यादा कश्मीर घाटी के ही रहने वाले हैं. उन्होंने कहा कि जिस तरह कश्मीरी युवा आतंकियों की चालों को समझ घरवापसी कर रहे हैं, वह एक शुभ संकेत है. उनके मुताबिक आने वाले दिनों में कश्मीर में कोई आतंकी नहीं बचेगा. इस बीच अच्छी खबर यह है कि सुरक्षाबलों के प्रयास से अब स्थानीय लोग भी आतंकियों के खिलाफ आगे आ रहे हैं और आतंकियों के बारे में सूचनाएं दे रहे हैं.

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अनुराग तिवारी अनुराग तिवारी @vnsanut

लेखक पत्रकार हैं

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