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Updated: 23 अगस्त, 2019 08:42 PM
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कृष्ण अलौकिक हैं और इनके जन्मदिन यानी जन्माष्टमी को भी अलौकिक तरीके से मनाया जाता है. दुनिया भर के कृष्ण मंदिरों में जन्माष्टमी बहुत धूम-धाम से मनाई जाती है और हो भी क्यों न हिंदू धर्म के सबसे नटखट माने जाने भगवान का जन्मदिन जो रहता है. भगवान श्री कृष्ण को लेकर कई लोगों के मन में कई सवाल रहते हैं जैसे उनका रंग काला है या नीला और नीला ही क्यों? उन्होंने राधा से शादी क्यों नहीं की. चलिए आज इन्हीं सवालों का जवाब पाने की कोशिश करते हैं.

1. रंग काला होने के बाद भी नीले क्यों दिखाए जाते हैं कृष्ण?

अक्सर आपने ये देखा होगा कि कृष्ण को श्याम रंग या नीले रंग का दिखाया जाता है. उनकी मूर्तियों में, चित्रों में उन्हें नीला दिखाया जाता है. कृष्ण को एक बेहद आकर्षक बालक कहा जाता रहा है, द्वारिका नरेश अपने पूरे वैभव में राज करते प्रतीत होते हैं, लेकिन हर जगह उनके रंग को लेकर यही कहा जाता है कि वो नीला था.

कृष्ण, जन्माष्टमी, राधा, धर्मकृष्ण के नीले रंग के पीछे कई मान्यताएं हैं

इसके पीछे कई थ्योरी दी जाती है..

1. एक मान्यता के अनुसार जब पूतना ने बालक कृष्ण को मारने की कोशिश की थी और उन्हें जहर वाला दूध पिलाया था तब कृष्ण मरे नहीं थे बल्कि उनका रंग नीला हो गया था.

2. एक और मान्यता के अनुसार कृष्ण का रंग नीला बाद में पड़ा है जब वो पांच सिर वाले नाग कालिया को मारने के लिए यमुना में कूदे थे. कालिया के जहर से उनका रंग नीला पड़ा है.

3. एक और लोककथा ये कहती है कि विष्णु ने देवकी की गर्भ में दो केश रखे थे. एक काला और एक सफेद देवकी की कोख में रखा था. एक बाल शक्ति से रोहिनी की कोख में चला गया और इसलिए भले ही केश काला था, लेकिन वो दैवीय होने के कारण नीला दिखाई देता था, और इसलिए कृष्ण नीले दिखाई दिए. देवकी ने कृष्ण को जन्म दिया था और रोहिनी ने बलराम को.

संस्कृत शब्द कृष्णा का मतलब है काला या गहरा और कुछ लोग इसे आकर्षक भी कहते हैं. कुछ ये मानते हैं कि कृष्ण का ये रंग नहीं बल्कि उनकी आभा या प्रभामंडल है. एक और मान्यता कहती है कि ये रंग पानी या फिर विशाल सागर के बारे में बताता है और यही कारण है कि कृष्ण का रंग नीला दिखाया जाता है.

2. कृष्ण ने राधा से शादी क्यों नहीं की?

सबसे ज्यादा जो चर्चित सवाल है वो ये कि आखिर कृष्ण ने राधा से शादी क्यों नहीं की. वो राधा जी से इतना प्यार करते थे फिर ऐसा क्यों?

कृष्ण राधा को सिर्फ 10 साल की उम्र तक ही जानते थे. पुराण कहते हैं कि उसके बाद कृष्ण वृंदावन छोड़कर चले गए थे. कृष्ण राधा को बोलकर गए थे कि वो वापस आएंगे, लेकिन कभी आए नहीं और राधा कभी द्वारका नहीं गईं. रुकमणि लक्ष्मी का रूप थीं और कृष्ण को अपना पति मानती थीं. भले ही उन्होंने कृष्ण को कभी देखा नहीं था. इसलिए कृष्ण ने रुकमणि से शादी की.

जहां तक राधा की शादी का सवाल है, राधा के पति का वर्णन ब्रह्मावैवर्त पुराण में किया गया है. ये वेदव्यास द्वारा रचित 18 पुराणों में से एक है.

राधा की शादी के बारे में भी अलग-अलग कहानियां प्रचलित हैं. कुछ के अनुसार राधा की शादी अनय से हुई थी. अनय भी वृंदावन निवासी थे और राधा और अनय की शादी बृह्मा की एक परीक्षा के बाद हुई थी.

एक दूसरी कहानी के अनुसार असल में राधा की शादी हुई ही नहीं थी. ब्रह्मावैवर्त पुराण के अनुसार राधा अपने घर को छोड़ते समय अपनी परछाई (छाया राधा/माया राधा) घर पर मां कीर्ती के साथ छोड़ गई थीं. छाया राधा की शादी रायान गोपा (यशोदा के भाई) से हुई थी और अनय से नहीं. इसीलिए ये भी कहा जाता है कि राधा रिश्ते में श्रीकृष्ण की मामी हुई थीं. इनकी शादी साकेत गांव में हुई थी जो बरसाने और नंदगांव के बीच स्थित था. यानि राधा ने अपना शादीशुदा जीवन अच्छे से व्यतीत किया भले ही मन से वो कृष्ण से जुड़ी रहीं.

3. आखिर इतनी गोपियां क्यों?

कृष्ण को लेकर एक सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर इतनी गोपियां क्यों? कृष्ण के पास इतनी गोपियां थी क्योंकि गोपियां कृष्ण की भक्ति के कारण परमात्मा में लीन होना चाहती थीं. कई लोककथाओं में इन गोपियों को जीवात्मा भी कहा जाता है जो परमात्मा से मिलना चाहती थीं. रास लीला को भी लोग गलत तरह से लेते हैं और इसे भी एक दैवीय घटनाक्रम ही मानना चाहिए.

4. आखिर कृष्ण ने अर्जुन से निहत्थे कर्ण को मारने को क्यों कहा?

महाभारत के युद्ध में कृष्ण की दो अहम भूमिकाएं थी. पहली ये कि उन्हें पांडवों को जीत तक पहुंचाना था और दूसरा ये कि महाभारत का युद्ध जल्दी खत्म करना था. दोनों में से कोई भी पक्ष ठीक से युद्ध नहीं कर रहा था और कहीं न कहीं नियम तोड़े जा रहे थे. इसलिए कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि वो कर्ण को मार दे. ऐसा करके कृष्ण ने अर्जुन का अहंकार भी खत्म किया. अर्जुन चाहते थे कि वो लोगों के बीच बहुत बड़े योद्धा के रूप में जाने जाएं और निहत्थे कर्ण को मारकर उनका ये सपना चूर-चूर हो गया.

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ये कर्ण कभी नहीं कर सकते थे. कर्ण लोगों के बीच महान कहलाते थे और वो कभी अपनी महान योद्धा बनने की इच्छा त्याग नहीं सकते थे. दूसरा कारण ये भी है कि कर्ण युद्ध में अपने जीवन को वैभव के साथ अंत करना चाहते थे. कुरुक्षेत्र की लड़ाई से बेहतर और कोई रास्ता नहीं हो सकता था.

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