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Updated: 29 दिसम्बर, 2021 08:00 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
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दुनियाभर में कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट को लेकर दहशत बढ़ती जा रही है. भारत में भी ओमिक्रॉन के मामलों में लगातार तेजी दर्ज की जा रही है. हर बदलते दिन के साथ ओमिक्रॉन वेरिएंट के मामले अलग-अलग राज्यों में सामने आ रहे हैं. ओमिक्रॉन वेरिएंट के अलावा भी कोरोना संक्रमण के मामलों में उछाल आया है. कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए कई राज्यों में अलर्ट जारी कर दिया गया है. दिल्ली और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में एक बार फिर से प्रतिबंध लगाए जाने की शुरुआत हो चुकी है. हालांकि, ओमिक्रॉन से जुड़े खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने 15 से 18 साल के बच्चों को वैक्सीन और 60+ बुजुर्गों को प्रिकॉशन डोज यानी बूस्टर डोज देने का ऐलान कर दिया है. लेकिन, इसके बावजूद ओमिक्रॉन वेरिएंट का खतरा बना हुआ है. आइए जानते हैं ओमिक्रॉन वेरिएंट से जुड़े 3 बड़े अपडेट्स...

Corona virus Omicron Variantविशेषज्ञों का दावा है कि ओमिक्रॉन से संकमित होने पर डेल्टा वेरिएंट से इम्यून होने में मदद मिलेगी.

वैक्सीन से मिली सुरक्षा पर लगा रहा प्रश्न चिन्ह

बीते दिनों दिल्ली में सामने आए कोरोना संक्रमण के 34 मामलों में से 33 मरीजों को पहले से ही वैक्सीन की दोनों डोज दी जा चुकी थीं. ये सभी मरीज ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित थे. दिल्ली में ओमिक्रॉन वेरिएंट के इन मामलों में चौंकाने वाली बात ये सामने आई थी कि कोरोना संक्रमित मरीजों में तीन मरीज ऐसे थे, जो वैक्सीन की तीसरी डोज यानी बूस्टर डोज भी लगवा चुके थे. दरअसल, ये सभी मरीज विदेश से वापस आए थे. और, इन्होंने वहां बूस्टर डोज लगवाई थी. वहीं, हाल ही में मध्य प्रदेश के इंदौर में सामने आए ओमिक्रॉन के 8 मामलों में से 4 मरीजों ने वैक्सीन की दोनों डोज पहले ही लगवा ली थी. कई राज्यों में कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमण के मामलों में दोनों डोज लगवा चुके लोग भी संक्रमित हुए हैं. सरकारी आंकड़ों के हिसाब से ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित होने वाले करीब 50 फीसदी मरीजों ने वैक्सीन की दोनों डोज ले चुके थे.

इससे यह साफ हो जाता है कि पूरी तरह से वैक्सीनेटेड (Vaccine Efficacy) लोगों पर भी ओमिक्रॉन वेरिएंट का खतरा बरकरार रहेगा. केवल वैक्सीन लगवाने से ओमिक्रॉन वेरिएंट से बचाव की गारंटी नहीं मिल सकती है. आसान शब्दों में कहा जाए, तो ऐसे तमाम मामलों के सामने आने के बाद कोरोना वायरस के ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ वैक्सीन के प्रभावी होने की क्षमता पर प्रश्न चिन्ह लग रहा है. जो चिंताजनक कहा जा सकता है. हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से कहा गया है कि ऐसा कोई प्रमाण नहीं मिला है, जिसके आधार पर कहा जा सके कि भारत में उपलब्ध वैक्सीन ओमिक्रॉन वेरिएंट के खिलाफ प्रभावी नही हैं. हालांकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने राज्यसभा में कहा था कि कोरोना वायरस में हुए बदलाव वर्तमान टीकों के प्रभाव को थोड़ा कम जरूर कर सकते हैं.

गंभीर रोगियों और बुजुर्गों के लिए जानलेवा हो सकता है ओमिक्रॉन

ऑस्ट्रेलिया, ब्रिटेन, जर्मनी, अमेरिका जैसे देशों में ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से हुई मौतों में एक बात कॉमन थी कि ये सभी 60+ उम्र के लोग थे. इनमें से कुछ गंभीर बीमारियों से ग्रस्त भी थे. भारत में डॉक्टरों और फ्रंटलाइन वर्कर्स के बाद 60+ बुजुर्गों और 45+ गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों के टीकाकरण की शुरुआत हुई थी. वैक्सीन हेजिटेंसी की वजह से 60+ बुजुर्गों और 45+ गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों के टीकाकरण में लंबा वक्त लगा था. 1 मई से 18+ लोगों के लिए वैक्सीनेशन की राह खुल गई थी और इसके बाद भी लंबे समय तक बुजुर्गों के टीकाकरण का काम पूरा नहीं हो सका था. ओमिक्रॉन के खतरे को देखते हुए केंद्र सरकार ने 60+ बुजुर्गों को वैक्सीन की प्रिकॉशन डोज यानी बूस्टर डोज देने का ऐलान कर दिया है. लेकिन, जिस तेजी से ओमिक्रॉन संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं, इसे देखकर कहा जा सकता है कि 60+ बुजुर्गों और 45+ गंभीर बीमारियों से ग्रस्त लोगों के लिए स्थितियां खतरनाक हो सकती हैं. क्योंकि, वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा पर भी संशय है.

विशेषज्ञों का दावा- ओमिक्रॉन को फैलने दें!

अमेरिकी डॉक्टर एफशाइन इमरानी ने दावा किया है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट कोरोना वायरस के डेल्टा वेरिएंट से कम घातक है. ब्रिटेन और दक्षिण अफ्रीका के स्वास्थ्य विभाग की स्टडीज में कहा गया है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट की वजह से डेल्टा स्ट्रेन के खिलाफ इम्युनिटी और मजबूत होगी. साथ ही इससे गंभीर बीमारियों को कम करने में भी मदद मिलेगी. स्टडी में दावा किया गया है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट से संक्रमित होने के बाद कोरोना वायरस के जानलेवा डेल्टा वेरिएंट से दोबारा संक्रमित होने के खतरे को कम कर देगा. हालांकि, इस स्टडी को किसी पक्के सबूत के तौर पर नहीं माना जा सकता है.

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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