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Updated: 21 फरवरी, 2023 10:23 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
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मध्यप्रदेश के छतरपुर में दूल्हे मियां को अपनी बारात के साथ डीजे (DJ) और ढोल लाना भारी पड़ गया, क्योंकि स्टेज पर उनके काजी ने निकाह कराने से इनकार कर दिया. उनका कहना था कि जाओ डीजे वाले से ही निकाह पढ़वा लो. दूल्हा मरता क्या न करता, उसने भी काजी की हां में हां मिलाना ही सही समझा, आखिर निकाह की जो बात थी.

काजी को कहते हुए सुना जा सकता है कि आप लोगों ने शहर के उलेमाओं का मजाक बना कर रख दिया है. आपने शैतान को खुश करने का काम किया. उन्होंने दूल्हे मियां को जम कर खरी-खोटी सुनाई. आखिरकार दूल्हे को काजी से माफी मांगनी पड़ी तब जाकर कहीं निकाह संभव हो पाया.

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जब यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ तो कई लोग काजी के समर्थन में आए कि उन्होंने सही किया. वहीं कई लोगों ने जमकर काजी के मजे लिए लिए. उनका कहना था कि शादी में नाच-गाना नहीं होगा तो कहां होगा, शादी ब्याह में लोग खुश नहीं होंगे तो कब होंगे? जब दूल्हा-दुल्हन राज़ी तब काहें परशान हो काजी?

देखिए सोशल मीडिया पर लोगों ने क्या कहा है?

परि शर्मा ने कहा है कि इनको बताओ कि इनको बताओ शादी और मय्यत में फर्क होता है, शादी में लोग नाचते गाते हैं खुश होते हैं. कबीर का कहना है कि रोज सुबह भोपू बजाकर दूसरे की नींद हराम करते वक्त नहीं सुझता. वहीं सादुल्ला खत्री का कहना है कि शादी ऐसी होनी चाहिए कि लड़की के बाप के ऊपर कोई कर्ज़ ना हो. चंद्रा पाण्डेय लिखती हैं कि पठान वाला गाना बजाए होते तो काजी न गुस्साता. संदेश ने लिखा है कि मटका बजाओ मटका. वहीं लतीफ सैख लिखते हैं कि बहुत सही काम किए काजी साहब. अल्लाह आपकी हिफाजत फरमाए. हम और हमारे भैइयों को और दीन इस्लाम सीखने की तौफीक दें. मगर फेनिल ने लिखा जब मिया बीवी राज़ी तब कहे परशान हो रहे काजी?

वहीं रंजन श्रीवास्वत लिखते हैं कि डीजे वाले बाबू मेरा गाना बजा दे, सिर्फ इतना कहने पर निकाह वाले दिन ही इतनी घनघोर बेज्जती? दूल्हे राजा शादी की वजह से जरा जोश में आ गए और चल दिए डीजे के पास. डीजे वाला भी जोश में आ गया. फिर दोनों पार्टी जोश में आ गईं और निकाल दिया जुलूस. पर इत्ती सी खता की इतनी बड़ी सजा?

इस पर नीदर्थल ने लिखा है कि ये सेहरा अब काज़ी साहब को पहना दो ताकि इन्हें मुंह न दिखाना पड़े शहर में. वहीं गौरव ने लिखा है कि अरे काजी साहब काहे गर्म हो रहे हो 100-200 ज्यादा ले लेना. हर्ष परिहार का कहना है कि नमूना हर धर्म में होता है भाई. हालांकि मोहसिन अली लिखते हैं कि लगता है किसी ने काजी साहब की बिरयानी में मिर्च अलग से दाल दी इसी ताम तमये हुए हैं.

मोहम्मद ख़ालिद हुसैन का कहना है कि यह मुस्लिम समाज का आपसी मामला है. दूसरों को इस मामले से दूर रहना चाहिए. मगर कंचन झां लिखती हैं कि निकाह बस माइक में पढूंगा. वहीं अखिलेश कुमार ने पूछा है कि जब मस्जिद के ऊपर लाउडस्पीकर बज सकता है तो शादी में डीजे क्यों नहीं? सैम का कहना है कि यह वीडियो देखने के बाद मैं जहर खरीदने दुकान गया था मगर दुकान बंद थी. रूपेश तिवारी ने लिखा है कि काजी को पता नहीं था क्या? वो शादी करने आया था मातम मनाने नहीं.

वहीं चौधरी जैद हुसैन का कहना है कि अब काज़ी साहेब को ऐसे दुल्हो का भी निकाह पढ़ने से मना करना चाहिए जो दहेज लेते हैं, तब जाके लालची लोगों के दिमाग ठीक होंगे. सपन कुमार का कहना है कि काजी साहब को ध्वनि प्रदुषण रोकने में अहम योगदान के लिए पुरस्कार मिलना चाहिए.

वैसे एक डीजे बजाने के कारण सरेआम दूल्हे की बेइज्जती करने वाले काजी साहब के बारे में आपकी राय क्या है?

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लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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