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Updated: 01 अप्रिल, 2016 03:03 PM
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
  @parulchandraa
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'महिलाओं, अगर तुम समझती थीं कि ये शरीर तुम्हारा अपना है, तो तुम गलत थीं' शायद इंडियाना स्टेट के गवर्नर कुछ ऐसा ही सोचते हैं. हाल ही में इंडियाना के गवर्नर माइक पेन्स ने एक एंटी अबॉर्शन बिल पास किया, जिसे अमरीका के इतिहास का सबसे खौफनाक और क्रूर बिल माना जा रहा है.

क्या कहता है ये बिल-

- इस कानून के अनुसार महिलाओं को गर्भपात के बाद भ्रूण के बचे अवशेषों को दफनाना होगा, या उनका अंतिम संस्कार करना होगा. तब तक एक व्यक्ति उस महिला की निगरानी करेगा कि उसने भ्रूण का अंतिम संस्कार किया या नहीं.

- गर्भपात अगर 20 हफ्ते से पहले हो गया है तब भ्रूण के टिशू और प्लेसेंटा को सामान्य कचरे की तरह फेंका जा सकता है, लेकिन अगर गर्भपात 20 हफ्ते के बाद हुआ है तो इसे मृत प्रसव माना जाएगा, जिसका अंतिम संस्कार जरूरी होगा.

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- गर्भपात तभी संभव है अगर बच्चे में कोई घातक विकार होगा. अगर बच्चा विकलांग या उसे मानसिक विकास संबंधी समस्या है तो गर्भपात नहीं कराया जा सकता. इसके साथ साथ भ्रूण की जाति, रंग, वंश या फिर लिंग के आधार पर गर्भपात करवाया जाता है तो वो महिला और डॉक्टर दोनों के लिए अपराध माना जाएगा.

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अलग अलग तरीकों से महिलाएं इस कड़े कानून का विरोध कर रही हैं

डॉक्टर भी कर रहे हैं इस बिल का विरोध-

ऐसा नहीं कि इस बिल का केवल महिलाएं ही विरोध कर रही हों, अमेरिका की डॉक्टर्स एसोसिएशन भी इसके खिलाफ है. डॉक्टर्स का कहना है कि इससे महिलाएं डॉक्टरों के पास न जाकर गर्भपात के अवैध तरीके अपनाएंगी, जिससे मां की जान को खतरा हो सकता है.

अमरीका में गर्भपात कानून कई वर्षों से विवाद और बहस का मुद्दा रहा है. कई राज्यों में महिलाओं को कानूनन गर्भपात कराने का अधिकार नहीं है. दक्षिण और मिडवेस्ट की महिलाओं के शरीर पर प्रतिबंध लगाने के साथ-साथ इस बिल में बहुत से प्रावधान ऐसे हैं जो बेहद हैरान और परेशान करने वाले हैं. कहा जा रहा है कि ये बिल उन सभी बिलों का मिला जुला रूप है जो इंडियाना में अब से पहले पास नहीं हो सके थे. लिहाजा इसे गहरी आलोचनाओं का सामना भी करना पड़ रहा है.

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ये तो साफ है कि ये बिल महिला अधिकारों के खिलाफ है, महिला विरोधी है और अमानवीय भी, इसने ये भी समझा दिया है कि इंडियाना की महिलाओं के शरीर पर उनका अपना कोई अधिकार नहीं. इस बिल में सारे प्रावधान सिर्फ गर्भवती महिला के लिए ही किए गए हैं, उसके पुरुष पार्टनर का जिक्र भी नहीं है. फिर भी अपने प्रजनन अधिकारों के लिए महिलाओं की जंग जारी रहेगी.

लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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