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Updated: 09 दिसम्बर, 2019 06:27 PM
पारुल चंद्रा
पारुल चंद्रा
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उन्नाव की रेप पीड़िता (Unnao rape victim) के आखिरी शब्द थे कि- 'मैं मरना नहीं चाहती'. ये वो लड़की थी जिसे आरोपियों ने पेट्रोल डालकर जिंदा जला दिया था. 95 प्रतिशत जल चुकी इस लड़की के शरीर में सिर्फ उम्मीद ही थी जो जलने से रह गई थी. जीने की उम्मीद...लेकिन वो भी नहीं रही. उन्नाव पीड़िता के शव में जलाने लायक कुछ बचा ही नहीं था इसलिए उसके शव को परिवार वालों ने दफना दिया. अंतिम संस्कार तो उसका उसी दिन हो गया था जिस दिन उसे जलाया गया, ये सब तो औपचारिकता थी.

जरा सोचिए हैदराबाद पीड़िता (Hyderabad rape victim) जिसे चार आरोपियों ने गैंगरेप करके जलाकर फेंक दिया था उसके परिजनों ने किस तरह उसका अंतिम संस्कार किया होगा. इन लड़कियों की किस्मत देखिए...अंतिम संस्कार की क्रिया जीते जी भोगी और अंतिम संस्कार के वक्त जलाने लायक कुछ बचा ही नहीं, शव को दफनाना पड़ा. परिवार की पीड़ा शायद कोई और नहीं समझ सकता, लेकिन इन लड़कियों की पीड़ा का अंदाजा जरूर लगाया जा सकता है, क्योंकि हम में से ज्यादातर लोगों ने छोटी-मोटी जलन तो सही ही होगी. गर्म तेल का छींटा पड़ जाने से पूरा घर सिर पर उठा लेने वाले ये सोचकर शर्मिंदा हो जाएंगे कि उन्नाव पीड़िता जलने के बावजूद भी एक किलोमीटर तक मदद के लिए भागी थी. उसका जला शरीर देखकर कोई उसे पहचान नही नहीं पाया कि वो है कौन.

woman burntजला कर मार दी गई महिलाओं का अंतिम संस्कार अब औपचारिकता है

हैदराबाद मामले से रेपिस्ट ने बहुत कुछ सीखा है

किसी को भी जला देना आज कितना आसान हो गया है. नफरत की इंतहां देखिए, कि मौत भी देना है तो सबसे दर्दनाक. जला देने के ये सिर्फ दो मामले नहीं हैं, बल्कि महिलाओं को जिंदा जला देने का सिलसिला थमने का नम नहीं ले रहा. हैदराबाद मामले से रेपिस्ट ने भले की डरना न सीखा हो, लेकिन खेल खत्म करना जरूर सीख लिया है.

- 2 दिसंबर को ही बिहार के बक्सर में भी एक 20-22 साल की युवती का जला हुआ शव मिला. पहली युवती के गोली मारी गई फिर पराली की आड़ में खेत में उसका शव भी जला दिया गया. शव इतनी बुरी तरह जलाया गया कि रेप की पुष्टी नहीं हो सकती थी. लेकिन डॉक्टर्स का कहना है कि जिस तरह से वारदात को अंजाम दिया गया है, दुष्कर्म की बात नकारी नहीं जा सकती. इस मामले का सुराग देने वाले को पुलिस ने 50 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है.

- अगली घटना समस्तीपुर की है ठीक इसी तरह एक 20-22 साल की महिला को जला दिया गया. महिला की अधजली लाश मिली जिससे ये पता चला कि ये महिला विवाहित थी. लेकिन अभी तक महिला की हत्या का सुराग नहीं मिल सका है. समस्तीपुर की घटना में भी हत्‍या के पहले दुष्‍कर्म की आशंका व्‍यक्‍त की गई है.

- बिहार के ही पटना की खबर है कि यहां जब एक लड़की ने छेड़खानी का विरोध किया तो उसपर भी एसिड अटैक किया गया. उसका चेहरा बुरी तरह से झुलस गया है. वो अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रही है.

- 8 दिसंबर को ही त्रिपुरा से भी इसी तरह की खबर आई थी. एक 17 साल की नाबालिक को भी जिंदा जला दिया गया. 25 साल का एक लड़का इस लड़की को अगवा कर अपने घर ले गया. वहां कई बार उसके साथ बलात्कार किया गया. लड़की के घरवालों से शादी के लिए 5 लाख दहेज की मां की. और जब उसे पैसों की पहली किश्त मिली तो वो लड़की के साथ शादी के लिए राजी हो गया. लेकिन दहेज के पैसों को लेकर उसकी मां के साथ विवाद हो गया और गुस्से में आकर उसने लड़की पर केरोसीन डालकर आग लगा दी. 

rapeजलाकर मार देना अपराधियों को सबसे सुरक्षित लगता है

- 8 दिसंबर की खबर थी कि यूपी के मुजफ्फरनगर में एक 30 साल की महिला के घर में घुसकर 4 लोगों ने उसपर एसिड डाल दिया. महिला के साथ रेप किया गया था जिसकी शिकायत उसने कोर्ट जाकर की. उसपर शिकायत वापस लेने का दबाव डाला जा रहा था, लेकिन वो नहीं मानी तो उसपर तेजाब डाल दिया. ये महिला 30 प्रतिशत तक जल चुकी है.

- और अब खबर आई है कि मुजफ्फरपुर में भी रेप करने में नाकाम होने पर एक युवती को जिंदा जला देना का प्रयास किया गया. बताया जा रहा है कि घर में युवती को अकेला देख एक युवक उसके घर में घुस आया और साथ दुष्कर्म का प्रयास किया. उसने विरोध किया और शोर मचाया तो रेपिस्ट के मंसूबे कामयाब न हो सके तो उसने लड़की के शरीर पर केरोसीन डालकर आग लगा दी. ये लड़की 80 प्रतिशत तक जल चुकी है.

दरिंदे पहले अपनी हवस मिटाते हैं और फिर न पकड़े जाने के डर से वो महिला के शरीर को जला देना ही बेहतर समझते हैं. क्योंकि शव अच्छी तरह से जल जाता है तो पहचान होना मुश्किल होती है. बक्सर और समस्तीपुर में अभी तक पता ही नहीं चल पाया कि ये महिलाएं कौन थीं. और जब यही पता नहीं चला तो फिर आरोपियों को पकड़ना तो और भी मुश्किल काम है. वजह कोई भी हो लेकिन किसी को भी जिंदा जला देने की सोच उस शख्स के वहशीपन का दर्शा रही है. ये भयानक मौतें जिन्हें रेपिस्ट महिलाओं को दे रहे हैं वो ये दिखा रही हैं कि असल में वो सेक्स को लेकर पागल ही नहीं बल्कि क्रूर भी हैं, जो इतनी भयानक मौत दे रहे हैं. क्या इस हैवानियत को देखकर भी प्रशासन को नहीं लगता कि उसे भी थोड़ा क्रूर होने की जरूरत है?

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लेखक

पारुल चंद्रा पारुल चंद्रा @parulchandraa

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं

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