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 |  4-मिनट में पढ़ें  |   16-04-2018
श्रुति दीक्षित
श्रुति दीक्षित
  @shruti.dixit.31
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ब्यूटी पार्लर... भारत में ये शब्द अपने आप में काफी रोचक है. इसका अलग ही महत्व है. कई इसे सिर्फ शो बिजनेस कहते हैं, कइयों को लगता है कि ये सिर्फ मॉर्डन लड़कियों के चोचले हैं. पर असल में ब्यूटी पार्लर के अंदर की एक अलग ही दुनिया होती है. ब्यूटी पार्लर जाने वाले हर लड़की लगभग एक जैसे दौर से गुजरती है. यहां पार्लर के ट्रीटमेंट की बात नहीं हो रही, बल्कि वहां लड़कियों के साथ होने वाले व्यवहार की बात हो रही है. 

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ब्यूटी पार्लर जाना वैसा क्यों नहीं समझा जाता जैसा लड़कों का शेविंग करना, बाल कटवाना? अंतर क्या है? ब्यूटी पार्लर में होने वाले ट्रीटमेंट भी तो लड़कियों की पर्सनल ग्रूमिंग ही हैं. पर आखिर भारतीय पार्लरों के साथ अलग क्या है? 

1. पार्लर की कोई हद नहीं...

ब्यूटी पार्लर में शायद पर्सनल मामलों की चर्चा करने की कोई हद नहीं होती. तभी तो किसी भी बात पर चर्चा हो सकती है. अगर किसी पार्लर में काफी समय से जा रहे हैं तो हर बात पर चर्चा की जाएगी. शादी, ब्वॉयफ्रेंड, वर्जिनिटी, अगर कोई लड़की नहीं बताना चाहे तो भी उससे कुरेद-कुरेद कर पूछा जाएगा और फिर पार्लर में काम करने वाली लड़कियां ज़ोर से ठहाका लगाकर हंसाएंगी.

2. बिकिनी वैक्स करवाना किसी हॉरर फिल्म को देखने जैसा लगेगा...

भारत में बिकिनी वैक्स का चलन नहीं है और इसे वाकई एक बड़ा काम है. इसे किसी हॉरर फिल्म या एडवेंचर स्पोर्ट से कम मत समझिए. ये बिलकुल वैसा ही है. अगर ये पहली बार करवा रहे हैं तब तो यकीनन काफी ज्यादा शर्म, झिझक ऊपर से वैक्स करने वाली के कमेंट्स इस पूरे प्रोसेस को और भी ज्यादा भयंकर बना देंगे. बिकिनी वैक्स करवाते समय भी वर्जिनिटी की बात की जाएगी. इसे पर्सनल केयर न समझते हुए यही माना जाएगा कि अगर कोई बिकिनी वैक्स करवाने आया है तो मतलब उसे अंतरंग संबंध ही बनाने हैं. भले ही मुंह पर कोई कुछ न बोले, लेकिन फिर भी उनकी मुस्कान ये जरूर समझा देगी. 

3. सेल्फ कॉन्फिडेंस को चूर-चूर कर दिया जाएगा...

ब्यूटी पार्लर जाना है सिर्फ थ्रेडिंग बनवाने? यकीन मानिए इतने से काम के बाद आपके सेल्फ कॉन्फिडेंस की धज्जियां उड़ा दी जाएंगी. थ्रेडिंग करवाते समय आपसे बोला जाएगा कि आपका चेहरा खराब हो गया है, काला पड़ रहा है, बालों को भी ट्रिमिंग की जरूरत है, कितने समय से क्लीनअप नहीं करवाया देखिए कितने ब्लैकहेड्स आ गए हैं. वगैराह-वगैराह. काम खत्म होते तक कई बार हालत ये हो जाती है कि आपको लगेगा कि आप अच्छे तो दिख ही नहीं रहे. ये सब वो लोग सिर्फ अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए करते हैं, लेकिन ग्राहक के मन में क्या होता है इसका अंदाजा नहीं लगाया जा सकता.

4. सस्ते पार्लर, महंगी कीमत...

भारत की ब्यूटी इंडस्ट्री बड़े अजीब तरीके से बढ़ रही है. पार्लर वाली आंटी सस्ता फेशियल तो करती हैं, लेकिन उसके कारण वो ये नहीं बतातीं कि कौन सा खराब प्रोडक्ट इस्तेमाल किया जा रहा है. कई बार सिर्फ अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए कोई फालतू सा ट्रीटमेंट कर दिया जाता है और फिर इसकी सज़ा उस लड़की को भुगतनी पड़ती है जो ये ट्रीटमेंट करवा रही है.

5. पार्लर और दर्शक...

भारतीय पार्लरों की लोकेशन अक्सर लड़कियों के साथ-साथ लड़कों को भी पता होती है. पास की किसी दुकान में अक्सर लड़के पार्लर के दरवाजे पर निहारते नजर आएंगे, अगर कोई लड़की बाहर निकली तो उसे ऊपर से नीचे तक स्कैन किया जाएगा और ये तय किया जाएगा कि आखिर वो क्या करवा कर आई है. कई बार तो स्थिती इतनी खराब हो जाती है कि लड़कियों को बचकर निकलना पड़ता है.

6. सुरक्षा या छलावा?

ब्यूटी पार्लर में एक सबसे बड़ी दिक्कत ये होती है कि कभी ये तय नहीं किया जा सकता कि पार्लर कितने सुरक्षित हैं. वैक्सिंग के लिए कपड़े बदलकर एक पतला सा छोटा गाउन पहनते समय लगता है कि चारों ओर देख लिया जाए, कहीं कोई कैमरा तो नहीं लगा. इसी बीच अगर कहीं गलती से किसी काम के लिए भी कोई पुरुष पार्लर में आ जाए तो उस लड़की को तो छुपा दिया जाता है, लेकिन जब तक वो शख्स पार्लर में रहता है ऐसा लगता है जैसे पैरों के नीचे से किसी ने जमीन खींच ली हो. भले ही फिर वो दो मिनट के लिए ही क्यों न हो.

लड़कों को लगता है कि ब्यूटीपार्लर में लड़कियां जा रही हैं तो बस उनकी काया पलट कर ही आएगी, पर ऐसा कुछ नहीं है. ये एक तरह का पर्सनल ग्रूमिंग सेशन ही है. हां, कुछ मामलों में ब्यूटी पार्लर के अंदर काम करने वाली और वहां आने महिलाएं थोड़ी ज्यादा ही पर्सनल हो जाती हैं. एक तरह से ये कहा जा सकता है कि महिलाएं जो शायद घरों में ज्यादा बोल नहीं पातीं, जो शायद किसी और से खुलकर बात नहीं कर पातीं वो पार्लर में थोड़ा सहज महसूस करती हैं. वजह चाहें जो भी हो, लेकिन कई बार ये सहज बातें वहां आने वाले लोगों को असहज करने के लिए काफी होती हैं. 

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लेखक

श्रुति दीक्षित श्रुति दीक्षित @shruti.dixit.31

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

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