charcha me| 

होम -> समाज

 |  5-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 03 अगस्त, 2022 03:07 PM
देवेश त्रिपाठी
देवेश त्रिपाठी
  @devesh.r.tripathi
  • Total Shares

'आज फतवे जारी करने वाले उलेमा तब कहां थे, जब मेरे पति ने बिना तलाक लिए दूसरी शादी कर ली थी? मैं अपने बच्चे का पेट पालने के लिए गाती हूं. क्योंकि, सिंगल मदर हूं. बेटा बीमार हुआ, तब ससुरालवालों ने भगा दिया. उस समय फतवा देने वाले ये मौलाना कहां थे? मेरे अंदर कला है, तो गाती हूं. और, सभी धर्मों के लिए गाती हूं. इन उलेमाओं का बस चले, तो महिलाओं की हर चीज को हराम बताने का फतवा जारी कर दें.' ये दो टूक शब्द फरमानी नाज (Farmani Naaz) ने इस्लाम के कट्टरपंथियों और उलेमाओं के लिए कहे हैं. दरअसल, हाल ही में 'हर हर शंभू' (Har Har Shambhu Song Controversy) गाना गाने पर फरमानी नाज के खिलाफ कट्टरपंथी उलेमाओं ने फतवा जारी कर दिया था. इन मौलानाओं ने फरमानी नाज के गाने को शरीयत के खिलाफ और इस्लाम विरोधी बताया था. वहीं, सोशल मीडिया पर कट्टरपंथी उन्हें 'हर हर शंभू' गाने पर जमकर धमकियां दी जा रही हैं.

Har Har Sambhu Song Controversy Islam Fatwa Farmani Naazफरमानी नाज ने इस्लाम के पैरौकारों को उन्हीं की भाषा में मुंहतोड़ जवाब दिया है.

मौलानाओं का क्या कहना है?

- देवबंद के मुफ्ती असद कासमी ने फरमानी नाज के 'हर हर शंभू' गाने (Har Har Shambhu Song) पर कहा है कि इस्लाम और शरीयत के मुताबिक किसी भी तरह का गाना जायज नही है. ये इस्लाम के खिलाफ है. अगर मुसलमान होते हुए भी कोई ऐसे गाने गाता है, तो यह माफी के लायक नहीं है. इसके लिए उन्हें तौबा करनी चाहिए.

- फतवा ऑनलाइन के चेयरमैन मौलाना मुफ्ती अरशद फारुकी का कहना है कि किसी दूसरे धर्म की शिनाख्त वाले कार्यों से मुसलमानों को परहेज करना चाहिए. क्योंकि, इस्लाम में इस तरह की चीजों की सख्ती के साथ मनाही है. मुसलमानों को अपने धर्म की शिक्षाओं पर अमल करना चाहिए और गैर-इस्लामी कामों से बचना चाहिए.

सोशल मीडिया पर कट्टरपंथियों के निशाने पर

फरमानी नाज अपना एक यूट्यूब चैनल चलाती हैं. इसके साथ ही फरमानी सोशल मीडिया के अन्य प्लेटफॉर्म पर भी मौजूदगी दर्ज कराती हैं. उनके गानों के वीडियो पर मुस्लिम कट्टरपंथी (Farmani Naaz troll) गाली-गलौज वाली भाषा का इस्तेमाल कर रहे हैं. इतना ही नहीं, फरमानी नाज (Farmani Naaz controversy) को माफी न मांगने पर जान से मारने की धमकियां भी मिल रही है.

मौलानाओं का बस चले, तो महिलाओं से जुड़ी हर चीज हराम हो जाए

बीती सदी का एक मशहूर भजन 'मन तरपत हरि दर्शन को आज' गाया था मोहम्मद रफी ने. इसे लिखने वाले थे शकील बदायूंनी और इस भजन को संगीत दिया  था नौशाद अली साहब ने. ये तीनों ही लोग मुसलमान थे. लेकिन, उस समय फतवा नहीं जारी किया गया था. वैसे, बॉलीवुड की मशहूर 'खान तिकड़ी' आमिर खान, सलमान खान और शाहरुख खान भी लंबे समय से अभिनय कर रहे हैं. लेकिन, इनके खिलाफ कभी फतवा नहीं दिया गया. आसान शब्दों में कहा जाए, तो जहां तीन तलाक और हिजाब जैसी चीजों को शरीयत का जामा पहनाकर महिलाओं पर थोपा जाता हो. वहां फरमानी नाज का गाना किसी मौलाना को कैसे पसंद आ सकता है? मौलानाओं का बस चले, तो महिलाओं से जुड़ी हर चीज को 'हराम' घोषित कर दें.

अब बात सिंगल मदर फरमानी नाज की

फरमानी नाज (who is Farmani Naaz) मुजफ्फरनगर जिले की रहने वाली हैं. 2018 में उनकी शादी मेरठ के इमरान से हुई थी. लेकिन, शादी के कुछ ही समय बाद फरमानी नाज को ससुराल वालों ने प्रताड़ित करना शुरू कर दिया. बेटे के जन्म के बाद नाज को पता चला कि उनके बेटे को गले की बीमारी थी. जिसके बाद बच्चे के इलाज के खर्च के लिए ससुराल वालों ने मायके से और पैसे लाने का दबाव बनाना शुरू कर दिया. मेरा पति मेरे सामने ही दूसरी लड़कियों से बात करता था. विरोध करने पर मारपीट की जाती थी. मां-बाप ने कर्ज लेकर शादी की थी. लेकिन, ससुराल वालों ने और पैसों के लालच में मुझे तंग करना नही छोड़ा. जिसके बाद मुझे घर से भी निकाल दिया.

फतवा देने वालों को पहले नही दिखी ये मुसलमान

फरमानी नाज ने आजतक के साथ बातचीत में कहा है कि मुझे तलाक दिए बिना ही मेरे पति ने दूसरी शादी कर ली. उसके बच्चे भी हो गए. लेकिन, इस दौरान एक भी मौलाना या उलेमा ये कहता हुआ मेरे घर नही आया कि ये भी मुसलमान है, इसकी मुश्किल का हल निकाला जाए. लेकिन, मेरे 'हर हर शंभू' गाना गाने के बाद मेरे खिलाफ फतवा दिया जा रहा है. ये लोग मेरे मुश्किल समय में मेरे साथ नही आए. लेकिन, जब मैं अपनी कला के दम पर आगे बढ़ रही हूं. तो, फतवा निकाला जा रहा है कि मेरा गाना इस्लाम विरोधी है. अगर मेरा गाना इस्लाम विरोधी है, तो मेरे पति की हरकत को क्या जायज ठहराया जाएगा?

कलाकार किसी धर्म का नही होता

फरमानी नाज का कहना है कि जिन्हें मेरा गाना अच्छा नहीं लग रहा है. वो इसे न देखें. मैं किसी से कहने नहीं जा रही हूं कि इसे देखो. मैं अपने बच्चे को पालने और उसके इलाज के लिए गाना गा रही हूं. मेरे इस मुश्किल दौर में कोई मौलाना और कट्टरपंथी मेरी मदद करने आगे नही आए थे. मैं कलाकार हूं और कलाकार का कोई धर्म नहीं होता है. मैं हर धर्म के गाने गाती हूं. लेकिन, लोगों को 'हर हर शंभू' गाने से ही दिक्कत होने लगी.

यहां देखें फरमानी नाज का 'हर हर शंभू' गाना 

लेखक

देवेश त्रिपाठी देवेश त्रिपाठी @devesh.r.tripathi

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं. राजनीतिक और समसामयिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय