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Updated: 06 अक्टूबर, 2021 03:23 PM
ज्योति गुप्ता
ज्योति गुप्ता
  @jyoti.gupta.01
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आपसे भी कभी किसी ने पूछा होगा कि तुम्हारी बॉस महिला (Female boss) है या पुरुष (male boss)? और आपका जवाब सुनकर क्या उनका वो अजीब रिएक्शन आपको याद है? अच्छा लेडी बॉस है फिर कैसे मैनेज करते हो? अच्छा, मेल बॉस है फिर चिंता किस बात की? बढ़ियां तो है.

मतलब लोगों के दिमाग में यह पूरी तरह से बैठ चुका है कि लेडी बॉस अच्छी नहीं होतीं. वे खड़ूस होती हैं. उनके साथ काम करना मुश्किल होता है. वे काम नहीं करतीं सिर्फ काम करवाती हैं. उनके 10 बहाने होते हैं और वे बिना बात पर अपने मूड के हिसाब से चिल्ला देती हैं.

उनके मूड स्विंग का असर उनके काम पर होता है. वे घर के काम और परिवार की जिम्मेदारियों पर ज्यादा ध्यान देती हैं और ऑफिस में खुद से नीचे के काम करने वाले सहकर्मियों पर बिना बात के चिक-चिक करती रहती हैं.

   Female boss, male boss, महिला बॉस,पुरुष बॉस, ऑफिस, लेडी बॉस,Female boss or male boss who is bestलोगों के हिसाब से अच्छा बॉस कौन है? महिला है या पुरुष...

खैर, ऐसी सोच आखिर किसने बनाई है. ये बातें कहीं से शुरु होकर किसी महिला बॉस के लिए एक विचार बन गई हैं कि महिलाएं उंचे पद पर काम नहीं कर सकतीं, वे अच्छी टीमलीडर नहीं बन सकतीं. जबकि ऐसा नहीं है सभी महिलाएं ऐसी नहीं होतीं, ठीक वैसे ही जैसे सभी पुरुष अच्छे बॉस नहीं होते हैं.

जब भी किसी बड़े पद पर कोई महिला होती है तो लोग नाक-मुंह तो सिकोड़ ही लेते हैं. हालांकि अब ऐसी बातें करना बेकार ही लगती होंगी लेकिन सच यह है भले ही उंचे पदों पर काम करते हुए महिलाओं को एक जमाना बीत गया लेकिन इन बातों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा.

हम यहां महिला और पुरुष बॉस की तुलना नहीं कर रहे हैं, क्योंकि बॉस होना एक ओहदा है जिसे हांसिल करना इतना आसान नहीं. काम करना पड़ता है, काबिलियत साबित करनी पड़ती है. किसी को भी मुफ्त में यह पद नहीं मिल जाता है. जब भी कोई महिला किसी बड़े पद पर जाती है तो लोग बोलते हैं शॉर्ट कट लिया होगा. किसी पुरुष के लिए ऐसी बातें नहीं बोली जातीं.

जबकि अच्छा बॉस बनने के लिए बहुत सी बातें चाहिए होती हैं, सिर्फ महिला और पुरुष के आधार पर हम किसी का आंकलन नहीं कर सकते. वो बातें अब पुरानी हो गईं कि कोई महिला बड़े पद को हैंडल नहीं कर सकती, बल्कि यह सोच तो लोगों की नहीं बदल रही है. हमने इस बारे में कुछ लोगों ने पूछा बस ऐसे ही, यह कोई सर्वे नहीं है. देखिए उनका इस बारे में क्या कहना है?

रवि सिंह का कहना है कि, हां लेडी बॉस खड़ूस होती है, जिसका एक मात्र कारण है पुरुष प्रधान समाज में अपनी पहचान को ना खोने देने का डर. एक महिला को पुरुष प्रधान संस्कृति में कई अड़चनों को लांघ कर अपनी एक जगह बनानी पड़ती है और जब वे एक ऊंचे ओहदे पर पहुंच जाती है तो उसे बनाए रखने के लिए, उसपर कायम रहने के लिए कई बार अलग-अलग परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है. इसी के चलते शायद एक महिला अपने बर्ताव में खड़ूसपना दिखाती है तो कई बार ये परिस्थितियों के अनुकूल स्वभावत: हो जाता है.

कविता मिश्रा का कहना है कि हां कोई-कोई ऐसी हो सकती हैं लेकिन सब नहीं. क्यींकि कुछ महिलाओं में असुरक्षा या ईर्ष्यालु की भावना होती है इसलिए वे आपकी सफलता से खुश नहीं होती हैं. मेरी लेडी बॉस तो बहुत अच्छी थीं. वो हमेशा प्यार से समझाती थीं, इस तरह काम आसानी से हो जाता था.

इस मामले में सोनम कहती हैं मैं खुद एक बॉस हूं और मेरी भी लेडी बॉस रही हैं. मैं तो सहकर्मियों के साथ विनम्र हूं. बाकी मेरे साथ काम करने वाले साथियों से पूछना बेहतर रहेगा. असल में महिलाएं बड़ी मुश्किल से इस मुकाम तक पहुंचती हैं. लोगों को इनकी काबिलियत पर शक होता है कि क्या वे कोई बड़ा प्रोजेक्ट हैंडल कर पाएंगी? कुछ लोगों का लगता है कि उनमें इगो प्रॉब्लम होती है. स्थिति को समझ नहीं सकतीं. लड़कियां बॉस की प्रोफाइल को संभाल नहीं सकतीं. वे किसी के अंडर में ही बेहतर काम कर सकती हैं. नेहा की कहना है कि हां थोड़ी दिक्कत तो होती है, लेकिन असली वहज क्या है यह मैं खुद नहीं समझ पाई. ये मेरा खुद का अनुभव है.

मोनिका का कहना है कि मुझे लगता है वो अपने काम को लेकर जरुरत से ज्यादा गंभीर होती हैं. प्लस घर या काम दोनों को मैनेज करना इतना आसान नहीं होता. आप कितने भी मॉडर्न हो जाएं, पैसे वाले हो जाएं लेकिन एक महिला के कंधे पर सास ससुर, पति की जिम्मेदारी होती ही है. अगर महिला हाउस वाइफ है तो भी जिमेदारी उठाती है और वर्किंग है तो भी...ऐसे मैं उनमे कहीं न कहीं चिड़चिड़ापन लड़कों के मुकबले ज्यादा होता है...इसलिए वो छोटी-छोटी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया दे देती हैं.

हालांकि अगर आपको महिलाओं की काबिलियत पर शक है तो बता दें कि आपकी यह सोच गलत है. एकअध्ययन में यह दावा किया गया कि पुरुषों के मुकाबले महिलाएं बेहतर बॉस होती हैं. वो अपने कर्मचारियों के लिए कोई ऐसा लक्ष्य नहीं तय करतीं, जिन्हें पाना उनके लिए मुश्क‍िल है. कर्मियों और अपने सबऑर्डिनेट्स के बीच बेहतर तालमेल रखती हैं और टीम में सकारात्मक माहौल को बढ़ावा देती हैं. यही नहीं वो कर्मचारियों को आगे बढ़ने के मौके भी ज्यादा देती हैं.

यह अध्ययन 'द वर्कर्स' ने किया है, जिसमें 2.7 करोड़ कर्मचारियों के जवाब पर शोध किया गया. अध्ययन की रिपोर्ट के अनुसार जिन दफ्तरों में महिला बॉस होती हैं वहां के कर्मचारियों का अपने काम के प्रति संतुष्टि का स्तर पुरुष बॉस के मुकाबले कहीं अधिक है. वहीं महिला बॉस अपने कर्मचारियों के बेहतर प्रदर्शन पर उनकी खुले दिल से तारीफ भी करती हैं, जिसका कर्मचारियों पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इस तरह वे किसी भी काम में बढ़चढ़ कर हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित रहते हैं.

हमारे देश में जिन लोगों की यह धारणा है कि महिलाओं की बुद्धि मोटी होती है, उनको अपनी सोच बदलने की जरूरत है. कई लोगों का यह मानना है कि जहां महिला बॉस होती हैं वहां लड़कियों के लिए काम करना आसान हो जाता है.

खैर, यह तो अपना-अपना एक्सपीरियंस है क्योंकि लेडी बॉस भी अच्छी हो सकती है और पुरुष बॉस भी. यह उनके स्वभाव, व्यक्तित्व और गुण पर निर्भर करता है ना की उनके लिंग पर…

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लेखक

ज्योति गुप्ता ज्योति गुप्ता @jyoti.gupta.01

लेखक इंडिया टुडे डि़जिटल में पत्रकार हैं. जिन्हें महिला और सामाजिक मुद्दों पर लिखने का शौक है.

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