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Updated: 08 जून, 2020 08:19 PM
रमेश ठाकुर
रमेश ठाकुर
  @ramesh.thakur.7399
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सामान्य व्यक्ति जहां से सोचना छोड़ देता है, अपराधी वहीं से सोचना शुरू करते हैं. अपराध करके कैसे लोगों की नजरों से बचा जाए, हर तरकीब अपराधी के पास होती है. अपराध जगत का सरगना कहे जाने वाले अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के कोरोना से मरने की खबरें एक बार फिर से उड़ी हैं. न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया पर उनके मरने की खबरें फैली हुई हैं. लेकिन भला कोई कैसे विश्वास कर लें, इससे पहले भी चार-पांच मर्तबा उसके निधन की खबरें आ चुकी हैं. बाद में पता चलता है कि उसने खुद अपने मरने की खबरें उड़ाईं. कैसे दुनिया की नजरों में धूल झोंककर आराम से रहा जाए, ये तरीका दाऊद इब्राहिम को आता है.

गौरतलब है, ये तो सभी जानते हैं कि भारत से भागने के बाद दाऊद इब्राहिम पाकिस्तान में छिपा है. यदा-कदा ऐसी खबरें आती भी रही हैं जिससे ये बात पुख्ता हो जाती है कि वह पाकिस्तान के कराची में सुरक्षित तरीके से आरामदाह जीवन जी रहा है. आईएसआई उसे संरक्षण दे रही है, उसके बदले वह आईएसआई के लिए वहां रहकर भारत की अंदरूनी जासूसी करवाता है, क्योंकि उसका नेटवर्क अब भी भारत में सक्रिय है, जो उसे हिंदुस्तान की हर गतिविधियों से अवगत कराते हैं. उन्हीं गतिविधियों को दाऊद इब्राहिम आईएसआई को परोसता रहता है. उसके बदले उसे पाकिस्तान में रहने का संरक्षण मिलता है.

कभी हार्ड अटैक तो कभी एड्स से मर चुका है दाऊद

वैसे, देखा जाए तो दाऊद इब्राहिम के मरने का यह पहला मौका नहीं है. कई मर्तबा पहले भी उसके मरने की खबरें उड़ी हैं. कई अन्य कारणों से उसके मरने की अटकलों का बाजार गर्म रहा. इससे पहले भी चार बार दाऊद के मरने की खबरें आईं. सबसे पहले बताता गया था कि उसे नेटवर्क के लोगों के हाथों ही मारा गया. उसके बाद गैंगरीन से मौत होना बताया गया. एक बार हार्ट अटैक से दाऊद इब्राहिम की मौत की खबर उड़ी, फिर एड्स से मौत हुई और अब कोरोना संक्रमण होने से दाऊद को मरा बताया जा रहा है. पर, हर बार खबरें झूठी साबित हुईं, इस बार भी वैसा ही होगा? ऐसा करके शायद वह दुनिया की नजरों में मर जाने का नाटक करता है. विशेषकर भारत के लिए, क्योंकि भारत से ही उसको सबसे ज्यादा डर है. वह भारत का मोस्टवांटेड अपराधी है.

दाऊद इब्राहिम ने वर्ष 1993 में लोगों के खून से पूरी मुंबई को लाल कर दिया था. बम ब्लास्ट करके कइयों को जिंदा उड़ा दिया था. तभी से वह भारत से भागा हुआ है. हिंदुस्तान की तमाम एजेंसियां उसको पकड़ने के लिए दशकों से पीछे लगी हैं. साल 2014 में जब भारत की केंद्रीय राजनीति में नरेंद्र मोदी का उदय हुआ, तो उन्होंने दाऊद इब्राहिम को पकड़ने का प्रण लिया था. प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस दिशा में बकायदा कोशिशें भी शुरू कर दीं. इसके लिए उन्होंने अपने सबसे भरोसेमंद टॉप अफसर व एनएसए प्रमुख को अजीत डोभाल को कमान सौंपी हुई है. अंदरूनी रणनीतियां भी दाऊद इब्राहिम को पकड़ने को लगातार जारी हैं.. इस बात की सूचना हिंदुस्तान में छिपे दाऊद इब्राहिम के जासूस उसे समय-समय पर देते रहते हैं.

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मोदी सरकार के निशाने पर

साल 2016 में दाऊद को पाकिस्तान से खदेड़कर भारत लाने की योजना बनाई गई थी. दाऊद को भनक लगी, तब उसने गैंगरीन से खुद की मौत होने की खबर उड़वा दी. लेकिन वह खबर भी अफवाह में तब्दील होते देर नहीं लगी. उसके अगले ही साल दाऊद के एड्स से मरने की खबर भी उड़ाई गई, लेकिन वह भी खबर अफवाह बनकर रह गई. दाऊद शातिर के अलावा चतुर दिमाग का भी मालिक है. कराची में जहां वह रहता है, उस जगह परिंदा भी पर नहीं मार सकता. चारों ओर आर्मी का पहरा है और उसे जंजीरों की भांति आईएसआई का संरक्षण हासिल है. पाकिस्तान की हुकूमत भी उसका कुछ नहीं कर सकती. यही कारण है, वहां की सरकार ने उसे आज तक छुआ भी नहीं? उसकी कराची में दामाद जैसी खातिरदारी हो रही है. दाऊद पाकिस्तान को अपने रहने की सबसे मुकम्मल पनाहगार समझता है. अन्य किसी मुल्क में होता तो शायद अब तक मारा भी जा चुका होता. उसे पता है, उसके ठिकाने की खबर लगते ही उसे कोई न कोई टपका देगा.

दाऊद इब्राहिम जानता है कि हिंदुस्तान में इस वक्त जो हुकूमत है, वह उसकी सबसे बड़ी दुश्मन है? उसे दिखते ही दबोच लेगी. भारत और उनकी सुरक्षा एजेंसियों से बचने की एक और तरकीब दाऊद ने चली है. तरकीब फिलहाल वही पुरानी ही है, मरने का नाटक? एकाध दिन पहले उसके कोरोना पॉजिटिव होने की खबरें सामने आई थीं. उसके दूसरे ही दिन कोरोना वायरस से मौत की अटकलें भी लगने लगीं. दरअसल, दाऊद इब्राहिम दुनिया की नजरों से दशकों से बचा हुआ है. जब भी उसके पकड़ने की सुगबुगाहटें होती हैं तो वह अपने मरने की अफवाहें फैलवा देता है. इस बार भी शायद ऐसा ही कर रहा है? क्योंकि वह पहले भी कई बार बीमारियों से मरने की अफवाह फैला चुका है. अब कोरोना ने उसकी जान ली है.

आईएसआई की निगरानी में ऐशोआराम की जिंदगी

अपराध का सरगना दाऊद आराम से कराची के आर्मी बेस इलाके में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के सुरक्षा चक्र में है. हालांकि उसकी हर एक चाल से भारतीय एजेंसियां वाकिफ हैं. सरकार और सुरक्षा एजेंसियों को पता है कि दाऊद फिर मरने का नाटक कर ध्यान भटकाना चाहता है, लेकिन उसकी ये चाल की नाकाफी और नाकाम होगी. बहरहाल, केंद्र सरकार ने पाकिस्तान दूतावास को इस अफवाह की सच्चाई जानने के लिए अलर्ट कर दिया है. वैसे, दाऊद के लिए केंद्र सरकार पाकिस्तान सरकार से कई मर्तबा गुहार लगा चुकी है, लेकिन इतना आसान नहीं है कि पाकिस्तान कभी भी भारत को दाऊद सौंपेगा.

पाकिस्तान हमेशा इस बात से इनकार करता रहा है कि दाऊद पाकिस्तान में है, जबकि, भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर से कई बार पुख्ता सबूत भी दिए जा चुके हैं. नक्से द्वारा स्थित जगह को भी बताया जा चुका है जहां दाऊद का ठिकाना है. पर हर बार आईएसआई उसका ठिकाना बदल देती है. दाऊद शुरू से ही आईएसआई की निगरानी में है. बावजूद इसके वह मानने को राजी नहीं? ओसामा बिन लादेन पर भी पाकिस्तान ने ऐसा ही टालमटोल रवैया अपनाथा था, जबकि अमेरिका ने ओसामा के वहां रहने के पुख्ता सेटेलाइट इमेज दिए थे. आखिरकार अमेरिका ने खुद से ओसामा को इस्लामाबाद के पास स्थित एबटाबाद में खोजकर मार गिराया. काश ऐसी ही कार्रवाई हमारी हुकूमत भी दाऊद पर करती.

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