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Updated: 13 अगस्त, 2019 10:57 PM
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सुप्रीम कोर्ट में अयोध्या मामले की सुनवाई चल रही है, 9 अगस्त को सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राम लला पक्ष से उत्सुकता में एक सवाल पूछा था कि- क्या राम का कोई वंशज है? सुप्रीम कोर्ट की तरफ से पूछे जाने वाले इस सवाल पर लोगों को बहुत आश्चर्य हुआ, कि आखिर ये किस तरह का सवाल था. लेकिन जिस केस पर सुनवाई हो रही है उसपर इतनी जिज्ञासा तो बनती है. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के इस सवाल पर आज उसी तरह के जवाब भी मिल रहे हैं.

सवाल जब राम के वंशजों पर हुए तो एक नहीं कई दावेदार सामने आए. राजस्थान के राजपूतों में तो राम के वंशज होने पर बहस चल ही रही है कई बातें और भी हैं जो यकीन से परे लगती हैं. लेकिन सवाल सत्य है कि आखिर भगवान राम के असली वंशज कौन हैं. एक नजर दावों और उन बातों पर जो अब तक लिखे और पढ़े गए हैं-  

- राजस्थान के राजसमंद से बीजेपी सांसद और जयपुर की पूर्व राजकुमारी दिया कुमारी का दावा है कि वह श्रीराम के बेटे कुश की वंशज हैं. और कुश से उनका रजवाड़ा निकला है. दीया कुमारी ने एक पत्रावली के जरिए इसके सबूत भी पेश किए जिस पर अयोध्या के राजा श्री राम के वंश के सभी पूर्वजों का क्रमवार नाम लिखा हुआ है. इसी में 209वें वंशज के रूप में सवाई जयसिंह और 307वें वंशज के रूप में महाराजा भवानी सिंह का नाम लिखा हुआ है.

diya kumariसाक्ष्य की बात करें तो राजकुमारी दिया कुमारी के पास ही राम के वंशज होने के प्रमाण मिलते हैं

- श्री राजपूत करणी सेना के संयोजक लोकेंद्र सिंह कालवी ने दावा किया कि वह भगवान राम के बड़े पुत्र लव के वंशज हैं. वो सिसोदिया राजपूत हैं जो लव के वंशज माने जाते हैं. फिल्म पद्मावत का विरोध के वक्त भी उन्होंने इस बात के दावे किए थे.

- राजस्थान के मेवाड़ राजघराने ने भी भगवान श्रीराम के वंशज होने का दावा किया. मेवाड़ राजघराने के महेंद्र सिंह मेवाड़ ने भी दावा किया कि मेवाड़ राजपरिवार भगवान राम के पुत्र लव का वंशज है. मेवाड़ के पूर्व राजकुमार लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने दावा करते हुए बताया था कि कर्नल जेम्स टॉड ने अपनी पुस्तक 'एनल्स एंड एंटीक्विटीज ऑफ राजस्थान' में जिक्र किया था कि श्रीराम की राजधानी अयोध्या थी और उनके बेटे लव ने लव कोट यानी लाहौर बसाया था. जबकि लव के वंशज बाद में गुजरात से होते हुए आहार यानी मेवाड़ में आकर बस गए, जहां सिसोदिया राज्य की स्थापना हुई. पूर्व राजकुमार लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ ने अपने दावे में कहा कि मेवाड़ का राज प्रतीक सूर्य है. श्रीराम भी शिव के उपासक थे और मेवाड़ परिवार भी भगवान शिव का उपासक है. यह मेवाड़ आज श्रीराम के वंशज होने के दावे को प्रमाणित करता है.

- राजस्थान के कांग्रेस प्रवक्ता सत्येंद्र सिंह राघव ने भी खुद को राम के वंशज होने का दावा किया है. उनका कहना तो ये है कि राम के असल वंशज तो राघव राजपूत हैं. उनका दावा है कि आज का अयोध्या लव के राज्य क्षेत्र में आता था. श्रीमद् वाल्मीकि रामायण का उल्लेख करते हुए राघव ने दावा किया कि लव का राज्य उत्तर कौशल था, जो आज का अयोध्या है. राघव का कहना है कि भगवान राम के दूसरे पुत्र कुश, जिनका वंशज अपने आप को जयपुर का पूर्व राजघराना बताता है, को दक्षिण कौशल राज्य मिला था. यह राज्य आज का छत्तीसगढ़ है.

- प्रमाणिक तौर पर सिख वंश परंपरा में गुरु नानक देव जी का एक वक्तव्य मिलता है जिसमें उन्होंने कहा है कि वह भगवान राम के वंशज हैं यानी वंश तो है लेकिन यह वंशावली उन गुरुओं की निकलकर सामने आई है जिन्होंने ईश्वरत्व को प्राप्त किया.

ram राम के वंशज ढूंढना आसान काम नहीं है

- लक्ष्मण ने विदिशा नगरी मध्य मध्य प्रदेश में बसाई वहां के लोग खुद को भगवान राम का वंशज कहते हैं.

- तुलसी शोध संस्थान जहां राम के इतिहास और पुरातत्व पर शोध चलते रहते हैं वहां ऐसी कई किताबें हैं जिसमें भगवान राम की ऐतिहासिकता और पुरातात्विकता दोनों खोजी गई हैं. कई किताबों में इस बात का जिक्र मिलता है कि भगवान राम के बाद उनकी वंश परंपरा चली है. इस संस्थान के पास 63 से 65 वंशों की परंपरा और वंशावली है लेकिन भगवान राम के पुत्र लव और कुश के बाद कोई वंशावली नहीं मिलती.

- हरियाणा के लियाकत अली ने 2017 में दावा किया था कि वो भगवान राम के असल वंसज हैं. मेवात क्षेत्र के मुसलमानों के बारे में उन्होंने कहा था कि दहंगल गोत्र से ताल्लुक रखने वाले मुसलमान असल में रघुवंशी हैं. इन्हें छिरकोल गोत्र का मुस्लिम यदुवंशी माना जाता है. तब इसपर बहुत विवाद हुआ था. कुशवाहा वंश से ताल्लुक रखने वाले लोगों को मुगलकाल में धर्म परिवर्तन करना पड़ा था, लेकिन ये लोग आज भी खुद को प्रभु श्रीराम का वंशज ही मानते हैं. राजस्थान के अलावा बिहार, उत्तर प्रदेश, दिल्ली समेत कई राज्यों में ऐसे कई मुस्लिम हैं जो राम के वंश से संबंथ रखते हैं.

फिलहाल दावेदार कई हैं, आगे न जाने और कितने आएं. लेकिन ये मसला ऐसा है कि इसकी डीएनए जांच भी नहीं की जा सकती. तथ्यों के नाम पर रामायण और पौराणिक ग्रंथों में लिखी बातें ही हैं. वंश कहां से शुरू हुआ और व्यक्ति किसका वंशज है इसे जानने के तरीके भी पौराणिक हैं. हिन्दू मान्यताओं में गोत्र और कुल का बड़ा महत्व है और यही दोनों निर्धारित भी करते हैं कि वंश-वृक्ष कहां से शुरू हुआ.

पहले वर्ण, जाति या समाज नहीं होते थे, पहले समुदाय कुल और कुटुम्ब होते थे. कुल और कुटुम्ब के लोगों के कुल देवता या देवी होती थी. इससे कई पीढ़ीयों के बाद में भी लोगों को ये पता होता था कि उनका कुल या कुल देवता का स्थान कहां है. गोत्र को वंश भी कहते हैं. यह एक ऋषि के माध्यम से शुरू होता है. आगे चलकर यही गोत्र वंश परिचय के रूप में समाज में प्रतिष्ठित हो गया. एक समान गोत्र वाले एक ही ऋषि परंपरा के प्रतिनिधि होने के कारण भाई-बहिन समझे जाते हैं. प्रारंभ मैं सात गोत्र थे कालांतर मैं दूसरे ऋषियों के सानिध्य के कारण अन्य गोत्र अस्तित्व मैं आए. महाभारत के शान्ति पर्व में वर्णन है कि मूल चार गोत्र थे- अंगिरा, कश्यप, वशिष्ठ और भृगु. बाद में आठ हो गए और इनमें जमदन्गि, अत्रि, विश्वामित्र तथा अगस्त्य के नाम जुड़ गए.

अब सुप्रीम कोर्ट के एक सवाल ने एक नहीं कई उत्तर दिए हैं, लेकिन साक्ष्य की बात करें तो राजकुमारी दिया कुमारी के पास ही राम के वंशज होने के प्रमाण मिलते हैं. बाकी लोगों की बातों में दम तो है कि वो रघुवंशी हैं लेकिन वो उसे प्रमाणित नहीं कर सकते. भगवान राम के वंशज असल में कौन हैं इसका जवाब देने के लिए खुद भगवान राम को ही आना पड़ेगा.

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