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Updated: 08 सितम्बर, 2019 06:50 PM
विकास कुमार
विकास कुमार
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Chandrayaan-2 चांद के दक्षिणी ध्रुव की सतह से 2.1 किलोमीटर दूर था और हम अंतरिक्ष विज्ञान में इतिहास रचने के करीब थे. लेकिन ऐसा करने से हम चूक गए. हालांकि इससे घबराने की जरूरत नहीं है. क्योंकि विज्ञान एक प्रयोगशाला है. इसमें प्रयोग जारी रहते हैं. भारत से पहले अमेरिका, रूस, जापान, इजरायल और दक्षिण कोरिया जैसे देश कई अंतरिक्ष मिशनों में असफल साबित हुए हैं. आइए जानते हैं कि दुनिया की बड़ी-बड़ी अंतरिक्ष एजेंसियों को अपने महत्वपूर्ण मिशनों में कब-कब अफसलता हाथ लगी.

चंद्रयान-2, Chandrayaan 2, ISROलैंडिंग में भले ही चूक गया हो चंद्रयान 2, लेकिन ऑर्बिटर अभी भी काम कर रहा है

1. चांद का पहला ही मिशन रहा था फेल

चंद्रमा तक पहले मिशन की प्लानिंग 17 अगस्त 1958 में अमेरिका ने बनाई थी लेकिन ‘पायनियर 0' का प्रक्षेपण असफल रहा. इसके बाद भी 5 मिशन फेल रहे. उसके बाद अमेरिका को सफलता मिली, जब 20 जुलाई 1969 को अपोलो 11 मिशन के जरिए चांद पर यान उतारा था. अमेरिका के अंतरिक्ष यात्री नील आर्मस्ट्रांग और बज एल्ड्रिन चांद पर उतरने वाले पहले और दूसरे अंतरिक्ष यात्री बने थे.

2. असफल रहा इजरायल का मून मिशन

इसी साल यानी अप्रैल 2019 में इजरायल ने भी अपना स्पेसक्राफ्ट बेरेशीट चांद पर भेजा था. हालांकि, इजरायल का यह मिशन सफल नहीं रह सका और स्पेसक्राफ्ट लैंड करते वक्त क्रैश हो गया. यह दुनिया का पहला निजी चंद्र अभियान था. यह चंद्रमा की सतह से करीब 10 किलोमीटर दूर था. हालांकि, हमारा चंद्रयान-2 इजरायल के मिशन से भी बेहद करीब था.

3. स्पेस शटल चैलेंजर  

28 जनवरी, 1986 को लॉन्च होने के 73 सेकंड के अंदर ही अमेरिका का स्पेस शटल चैलेंजर हवा में ही नष्ट हो गया. इस हादसे में शटल में मौजूद सात क्रू मेंबर्स की मौत हो गई थी. शटल में लगे खराब यंत्रों के साथ ठंडा तापमान इस हादसे का कारण बना था.

4. स्पेस शटल कोलंबिया

NASA का ही कोलंबिया स्पेस शटल 1 फरवरी 2003 को दुर्घटनाग्रस्त हो गया था. इस मिशन में भारतीय मूल की कल्पना चावला का निधन हुआ था. वह अंतरिक्ष में जाने वाली प्रथम भारतीय महिला थीं. ये दर्दनाक हादसा उस वक्त हुआ था, जब कल्पना का अंतरिक्ष यान कोलंबिया शटल STS-107 धरती से महज 16 मिनट की दूरी पर था.

5. मार्स क्लाइमेट ऑरबिटर

NASA ने 1999 में मार्स क्लाइमेट ऑरबिटर लॉन्च किया था, ताकि मंगल के मौसम, वातावरण और सतह में होने वाले बदलावों का पता लगाया जा सके. अमेरिकी ग्लोबल एयरोस्पेस लॉकहेड मार्टिन के इंजीनियरों ने इस ऑपरेशन की अंग्रेजी की संख्यात्मक प्रणाली से गणना की, जबकि नासा की टीम ने ऑपरेशन की मीटर संबंधी सिस्टम से गणना की. सॉफ्टवेयर में इस्तेमाल किए गए गलत कोड के चलते नतीजा ये हुआ कि अंतरिक्ष यान से संपर्क टूट गया, क्योंकि यान सूर्य की ओर मंगल ग्रह की सतह की तरफ चला गया. इस मिशन पर करीब 762 करोड़ रुपए लागत आई थी.

6. अमेरिका का ऑरबिंटिन एस्ट्रोनॉकिल ऑब्जर्वेट्री

सबसे बड़े टेलीस्कोप को लेकर जा रही ऑरबिटिन एस्ट्रोनॉकिल ऑब्जर्वेट्री सैटेलाइट का प्रपेक्षण उस वक्त विफल हो गया, जब 12 फीट लंबे इसके सुरक्षात्मक कोन ने ठीक से काम नहीं किया. सैटेलाइट पृथ्वी के वायुमंडल से ऊपर नहीं जा पाया. अमेरिका का ये स्पेस प्रोग्राम 1966 से 1972 के बीच का है. 600 करोड़ की लागत के साथ ये उस वक्त सबसे मंहगा सैटेलाइट था.

7. ग्लोरी, क्लाइमेट सैटेलाइट

नासा ने 2011 में करीब 25 अरब रुपए की लागत से ग्लोरी नाम का सैटेलाइट लॉन्च किया, जिसे पृथ्वी की जलवायु से जुड़े रिकॉर्ड रखने थे. इस सैटेलाइट को जिस रॉकेट टॉरस एक्सएल के साथ लॉन्च किया गया था, उसमें खराबी आ गई. नतीजा ये हुआ कि रॉकेट प्रशांत महासागर में गिर गया.

8. रूस ने खोया लूना 15

इसी तरह से रूस (उस समय सोवियत संघ) के लूना 15 ने 13 जुलाई, 1969 को अंतरिक्ष के लिए उड़ान भरी. चार दिन बाद और अपोलो 11 से 72 घंटे पहले यह यान चंद्रमा की कक्षा में दाख़िल हो गया. लेकिन सतह पर पहुंचने की कोशिश में यह नष्ट हो गया.

9. रूस का जेनिट-2एसबी रॉकेट

साल 2012 में रूस का जेनिट-2एसबी रॉकेट ने एक जांच शुरू की, जिसके तहत उसे मंगल ग्रह के चांद फोबोस पर जाना था और धूल के सैंपल इकट्ठा करना था. बताया जाता है कि रोवर के कई हिस्से दशकों पुरानी तकनीक पर आधारित थे. ये कमजोर साबित हुआ और पृथ्वी की कक्षा में नष्ट हो गया. रूस ने दावा किया कि अमेरिकी रडार सैटेलाइट के दखल के चलते ये रॉकेट नष्ट हो गया. इसपर 1000 करोड़ रुपए खर्च हुए थे.

10. सोवियत रॉकेट

इलेक्ट्रिक रोबोट को लेकर जा रहा सोवियत रॉकेट तब प्रशांत महासागर में गिर गया था, जब महीने भर में ही सोवियत यूनियन का सैल्यूट स्पेस स्टेशन फेल हो गया था. इस पूरे मिशन पर करीब 4000 करोड़ रुपए की खर्च हुए थे. इस घटना ने ये सवाल छोड़ दिए थे कि क्या रूस ऐसे नुकसानों के साथ भी अपना अंतरिक्ष कार्यक्रम चालू रखने में सक्षम होगा.

11. रूस का एक्सप्रेस AM4

रूस का प्रोटोन रॉकेट अगस्त 2011 में संचार सैटेलाइट एक्सप्रेस AM4 के साथ लॉन्च किया गया. 24 घंटे बाद ये एक बार कक्षा में पाया गया और इसके बाद अंतरिक्ष में खो गया. पृथ्वी से इसको नियंत्रित कर रही रूसी टीम और अमेरिकी स्पेस सर्विलांस टीम बस एक बिंदु तक ही रॉकेट के एक छोटे हिस्से को देख सकी थी. इसपर मिशन पर करीब 1800 करोड़ रुपए की लागत आई थी.

12. चीन का मंगल मिशन फेल

वर्ष 2011 में चीन ने रूस के साथ मिलकर मंगल पर अपना मिशन यिंगहुओ-1 लॉन्च किया था लेकिन यह पृथ्वी की कक्षा से ही बाहर नहीं जा पाया. जिसके कारण 15 जनवरी 2012 को इस अभियान को असफल घोषित कर दिया गया.

13. जापानी स्पाई सैटेलाइट

2003 में जापान का दो स्पाई सैटेलाइट उड़ाने भरने के दौरान आई खराबी के कारण नष्ट हो गया. जापान ये सैटेलाइट उत्तर कोरिया पर नजर रखने के लिए भेज रहा था. H2-A रॉकेट अपने पूर्ववर्ती रॉकेट के मुकाबले ज्यादा सस्ता और विश्वसनीय था, इसपर मात्र 475 करोड़ की लागत आई थी. हालांकि इस खराबी से पहले ही करीब एक साल तक इस मिशन में तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ा था.

14. दक्षिण कोरिया का पहला सैटेलाइट और रॉकेट

दक्षिण कोरिया की ओर से लॉन्च किया गया पहला रॉकेट अपनी निर्धारित कक्षा में जाने से चूक गया और पृथ्वी के वायुमंडल में ही नष्ट हो गया. बताया जाता है कि इसकी रफ्तार अचानक से धीमी पड़ी और ये सैटेलाइट पृथ्वी की ओर वापस आने लगा इसके बाद ये जलकर नष्ट हो गया. इसपर करीब 2300 करोड़ रुपए खर्च हुए थे.

चांद पर लैंडिंग के आधे प्रयास असफल

अब तक चंद्रमा पर कुल 110 मिशन हो चुके हैं. जिसमें से 42 असफल हुए हैं. अमेरिका और रूस ने कुल मिलाकर 64 मिशन चांद पर भेजे, जिसमें 43 बार सफलता हाथ लगी. वहीं चांद पर ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के अब तक 38 प्रयास हुए, जिसमें 52 फीसदी ही सफल रहे. अब तक चंद्रमा पर सैटेलाइट भेजने में सिर्फ अमेरिका, रूस और चीन को कामयाबी मिली है.

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लेखक

विकास कुमार विकास कुमार @100001236399554

लेखक आजतक में पत्रकार हैं

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