New

होम -> समाज

 |  1-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 15 अक्टूबर, 2018 11:30 AM
आईचौक
आईचौक
  @iChowk
  • Total Shares

दुनिया की नजर भारत के इस सुदूर दक्ष‍िण में बसे रामेश्वरम पर टिकी है. 1931 में यहीं जन्म हुआ था अवुल पाकिर जैनुलआबेदीन (एपीजे) अब्दुल कलाम का. वैज्ञानिक, मिसाइलमैन और पूर्व राष्ट्रपति. और इन सबसे ऊपर एक श्रेष्ठ इंसान.कलाम के पिता पेशे से नाविक थे और ज्यादा पढ़े लिखे नहीं थे. ये मछुआरों को नाव किराये पर दिया करते थे. पांच भाई और पांच बहनों वाले परिवार को चलाने के लिए पिता के पैसे कम पड़ जाते थे इसलिए शुरुआती शिक्षा जारी रखने के लिए कलाम को अखबार बेचने का काम भी करना पड़ा. आठ साल की उम्र से ही कलाम सुबह 4 बचे उठते थे और नहा कर गणित की पढ़ाई करने चले जाते थे. सुबह नहा कर जाने के पीछे कारण यह था कि प्रत्येक साल पांच बच्चों को मुफ्त में गणित पढ़ाने वाले उनके टीचर बिना नहाए आए बच्चों को नहीं पढ़ाते थे. ट्यूशन से आने के बाद वो नमाज पढ़ते और इसके बाद वो सुबह आठ बजे तक रामेश्वरम रेलवे स्टेशन और बस अड्डे पर न्यूज पेपर बांटते थे.स्कूल टीचर सुब्रमण्यम अय्यर को वे अपनी प्रेरणा बताते रहे हैं, जिन्होंने पांचवीं कक्षा में ही उन्हें चिडि़या का उदाहरण देते हुए एयरोस्पेस टेक्नोलॉजी के बारे में बताया था.

आइए चलते हैं उनके गांव, जो अब किसी तीर्थ से कम नहीं है-

ये भी पढ़ें-

डॉ. कलाम के कुछ खास फोटो-ट्वीट

कलाम की ये 10 बातें किसी मंत्र से कम नहीं...

#एपीजे अब्दुल कलाम, #राष्ट्रपति, #भारत रत्न, एपीजे अब्दुल कलाम, राष्ट्रपति, भारत रत्न

लेखक

आईचौक आईचौक @ichowk

इंडिया टुडे ग्रुप का ऑनलाइन ओपिनियन प्लेटफॉर्म.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय