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Updated: 21 अप्रिल, 2018 02:23 PM
अनिल कुमार
अनिल कुमार
  @apkaanil
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कठुआ, उन्नाव और फिर सूरत में रेप की घटनाओं के बाद उठ रही आवाजें इंसाफ की मांग कर रही हैं. कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप के अलावा उन्नाव और फिर अब सूरत में रेप की घटना ने पूरे देश में ऐसा माहौल बना दिया है कि कोने-कोने से लोग अलग-अलग तरीके से अपना रोष जता रहे हैं. रेप की घटनाएं ही मुद्दा नहीं हैं बल्कि समस्या महिलाओं की पूर्ण सुरक्षा है, एक ऐसी सुरक्षा जिसमें भय न हो जबकि सहजता हो.

यूं तो महिलाएं आज कई तरह की समस्याओं का सामना कर रही हैं मगर इनमें भी वो समस्या जो सबसे मुखर होकर सामने आती है, वो है मानव तस्करी की समस्या. बताया जाता है कि आज देश में रेप के बाद ये दूसरी बड़ी समस्या है जो महिलाओं से सम्बंधित है. ध्यान रहे कि मानव तस्करी के कुल मामलों में उन मामलों की तादाद ज्यादा है जिनमें महिलाओं की तस्करी हुई है.

मानव तस्करी, महिला, अपराध, रेप    आज ऐसी कई समस्याएं हैं जिनका सामना एक महिला करती है

गौरतलब है कि वर्ष 2017 में महाराष्ट्र में 27 और 28 जुलाई को राज्य महिला आयोग और अन्य संगठनों की ओर से आयोजित सम्मेलन में बताया गया कि भारत से हर साल 30 हजार महिलाओं और बच्चियों की तस्करी की जा रही है. इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों तरह की तस्करी शामिल हैं. महाराष्ट्र राज्य महिला आयोग के मुताबिक अकेले महाराष्ट्र से ही हर साल तकरीबन 10 हजार महिलाओं की तस्करी कर, उन्हें विदेशों में बेचा जाता है.

यहां के रास्ते बाहर भेजी जा रही हैं गरीब महिलाएं :

महाराष्ट्र (मुंबई), पश्चिम बंगाल और असम के रास्ते गरीब महिलाओं को विदेश भेजा जाता है. इन महिलाओं को जबरन बहला फुसलाकर और नेपाल, बंगलादेश, भूटान, म्यांमार से लाई गई महिलाओं को भी शामिल कर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बेचा जाता है. बिकने के बाद, घाना जैसे देशों में इनका उपयोग खेतिहर मजदूरों के रूप में एवं अरब देशों में घरेलू नौकरानियों एवं देहव्यापार के लिए किया जाता है.

डॉमेस्टिक खरीद-फरोख्त भी

वर्ष 2015 में शुक्रवार पत्रिका के 1 से 15 जून के अंक में एक तथ्य सामने आया था. जिसके मुताबिक गरीब महिलाओं की घरेलू तस्करी भी होती है. असम, पश्चिम बंगाल और ओडिशा जैसे राज्यों से खरीदकर लाईं गईं गरीब महिलाओं को हरियाणा, पंजाब और पश्चिम उत्तर प्रदेश के इलाकों में बेच दिया जाता है. खरीदी गईं गरीब महिलाओं को हरियाणा, पंजाब और पश्चिम उत्तर प्रदेश में 'मोलकी' कहते हैं. इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 5000 रुपए तक में गरीब महिलाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें बेच दिया जाता है.

गैर सरकारी संगठन दृष्टि स्त्री अध्ययन प्रबोधन केंद्र के जमीनी सर्वेक्षण के अनुसार हरियाणा मेवात क्षेत्र के 10 हजार परिवारों में से नौ हजार स्त्रियों को कहीं से खरीदकर लाया गया. महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दे का दायरा इससे कहीं ज्यादा बड़ा है. रेप की घटनाएं ही नहीं बल्कि ऐसी कई घटनाएं हैं जो देश को बदनाम कर रही हैं.

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लेखक

अनिल कुमार अनिल कुमार @apkaanil

लेखक पत्रकार हैं और समसामयिक मुद्दों पर लिखते हैं.

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