New

होम -> सोशल मीडिया

 |  4-मिनट में पढ़ें  |  
Updated: 25 जनवरी, 2023 07:19 PM
बिलाल एम जाफ़री
बिलाल एम जाफ़री
  @bilal.jafri.7
  • Total Shares

मुसलमान को हिंदू इलाकों में घर न मिले हिंदू उसे घर न दें एक बार तो ये बात समझ में आती है लेकिन एक मुसलमान को मुस्लिम परिवार ही रहने के लिए जगह न दें तो बात भी बनेगी और मुद्दा भी उठेगा. मामले के तार जुड़े हैं अक्सर ही अपने अतरंगे कपड़ों के कारण सुर्ख़ियों में रहने वाली उर्फी जावेद से. सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर उर्फी जावेद को मुंबई में रहने के लिए किराए का घर नहीं मिल रहा है. घर क्यों नहीं मिल रहा ? एक बड़ी वजह जहां एक तरफ उनका धर्म है. तो वहीं दूसरी तरफ उनके कपड़ों ने भी उन्हें मुसीबत में डालने का काम कम नहीं किया है.

Urfi Javed, Home, Tenant, Landlord, Musalman, Diccrimination, Hindu, Twitterउर्फी जावेद की भी घर के मामले में समस्या वही है जो किसी आम मुसलमान की है

अभी बीते दिन ही उर्फी ने अपने ट्विटर से एक ट्वीट किया है. ट्वीट में गुस्सा भी है और घर न मिलने का दर्द भी साफ़ झलकता हुआ दिखाई दे रहा है. उर्फी ने ट्वीट किया है कि मेरे पहनावे की वजह से मुस्लिम मकान मालिक मुझे किराए पर घर नहीं देना चाहते, हिंदू माकन मालिक मुझे घर इसलिए नहीं देना चाहते क्योंकि मैं मुस्लिम हूं. कुछ मकान मालिकों को मुझे मिलने वाली राजनीतिक धमकियों से दिक्कत है. मुंबई में किराये का अपार्टमेंट ढूंढना बहुत कठिन है.

पोस्ट क्योंकि उर्फी जावेद का था लोगों ने भी इसका संज्ञान लिया. कुछ लोग थे जिन्होंने उर्फी के प्रति हमदर्दी जताई तो वहीं ऐसे लोगों की भी कमी नहीं थी जिन्होंने इस मामले में उर्फी की भरपूर मौज ली और कहा कि अगर मुंबई जैसे शहर में उन्हें रहने के लिए घर चाहिए तो वो सुधर जाएं और ढंग के कपड़े पहनना शुरू कर दें.

सवाल ये है कि अगर उर्फी ने सही कपड़े पहनने शुरू कर दिए तो इसकी क्या गारंटी है कि उनके साथ साथ रहने के लिए किराए का घर खोज रहे देश के मुसलमानों को रहने के लिए घर मिल ही जाए. ये सवाल यूं ही नहीं है. वो तमाम मुसलमान जो घर खोजने के लिए निकलते हैं तो शायद ओनर के पास वो ढंग से और पूरे कपड़ों में ही जाते हैं. इसलिए इस बात की पुष्टि स्वतः ही हो जाती है कि समस्या कपड़ों में नहीं लोगों की सोच में है.

तो बात मुसलमानों को मुंबई जैसे शहर में किराए का घर न मिलने की हुई है तो क्या उर्फी का मामला इकलौता है? नहीं. उर्फी के मामले में मुसीबत भले ही उनके धर्म के साथ साथ कपड़े हों लेकिन बाकी लोगों के साथ ऐसा नहीं है. 2009 में बॉलीवुड अभिनेता इमरान हाशमी ने बांद्रा की एक पॉश हाउसिंग सोसाइटी पर भेदभाव के गंभीर आरोप लगाए थे. असल में इमरान एक पॉश हाउसिंग सोसाइटी में घर लेना चाहते थे और उन्हें नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट देने से इनकार कर दिया गया था.

इमरान का आरोप था कि उन्हें एनओसी इस लिए नहीं मिली क्योंकि वो मुसलमान थे. साथ ही इमरान ने सोसाइटी को लेकर ये भी कहा था कि सोसाइटी के लोगों में मुसलमानों को लेकर पूर्वाग्रह हैं. सिर्फ इमरान ही नहीं टीवी एक्टर आमिर अली के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था. आमिर मुंबई स्थित लोखंडवाला में एक प्रॉपर्टी लेना चाहते थे मगर उसके मालिक ने उन्हें सिर्फ इसलिए प्रॉपर्टी नहीं बेची क्योंकि वो मुसलमान हैं.

बहरहाल, चाहे वो इमरान और आमिर अली हों या उर्फी उन्हें इस बात को समझना होगा कि फेसबुक ट्विटर पर क्रांति करने से लाइक कमेंट समर्थन विरोध और फॉलोवर तो मिल सकते हैं लेकिन घर नहीं मिलेगा. जिस ऊर्जा को फेसबुक और ट्विटर पर जाया किया जा रहा है बेहतर है उसे घर खोजने में लगाया जाए. यूं भी मशहूर शायर उम्मीद फ़ाज़ली ने बहुत पहले ही कह दिया था कि

जाने ये कैसा ज़हर दिलों में उतर गया,

परछाईं ज़िंदा रह गई, इंसान मर गया.

 

ये भी पढ़ें -

लाहौर बार चुनाव में वकीलों की फायरिंग तो हाफिज सईद को संत ही साबित कर रही है!

विमान हादसे का सबसे भयानक लाइव! सोनू जायसवाल की कहानी भी कम मार्मिक नहीं...

RRR पर सीएम रेड्डी की बांटने वाली बातों पर अदनान का गुस्सा जायज है!

लेखक

बिलाल एम जाफ़री बिलाल एम जाफ़री @bilal.jafri.7

लेखक इंडिया टुडे डिजिटल में पत्रकार हैं.

iChowk का खास कंटेंट पाने के लिए फेसबुक पर लाइक करें.

आपकी राय